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भारत का गैस विजन

संदर्भ 

  • भारत में ऊर्जा उपभोग के ढांचे में तेजी से बदलाव हो रहा है, खासकर घरेलू खाना पकाने के ईंधन के क्षेत्र में। देश में लगभग 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं, लेकिन अब पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के सचिव के अनुसार, यदि सभी उपभोक्ता पीएनजी अपनाते हैं, तो घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन से ही लगभग 30 करोड़ कनेक्शनों की जरूरत पूरी की जा सकती है। 

एलपीजी, एलएनजी, पीएनजी और सीएनजी में अंतर 

  • एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) कच्चे तेल के शोधन और प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण का सह-उत्पाद है। इसका उत्पादन इन दोनों स्रोतों पर निर्भर करता है।  
  • एलएनजी (Liquefied Natural Gas) प्राकृतिक गैस को -160 डिग्री सेल्सियस से नीचे ठंडा करके तरल रूप में परिवर्तित किया जाता है, जिससे उसका आयतन लगभग 1000 गुना कम हो जाता है और लंबी दूरी तक परिवहन आसान हो जाता है। 
  • सीएनजी (Compressed Natural Gas) में प्राकृतिक गैस को 200–250 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर के दबाव पर संपीड़ित किया जाता है, जिसका उपयोग मुख्यतः वाहनों में ईंधन के रूप में होता है। दूसरी ओर, पीएनजी पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों और संस्थानों तक पहुंचाई जाने वाली प्राकृतिक गैस है। 

एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति व्यवस्था 

  • एलपीजी के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों को मिलाकर दबाव में रखा जाता है और 40 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर ठंडा करके जहाजों के जरिए आयात किया जाता है। इसके बाद इसे सिलेंडरों में भरकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। 
  • प्राकृतिक गैस को आमतौर पर पाइपलाइन के जरिए पहुंचाया जाता है। आयात के मामले में इसे पहले एलएनजी के रूप में जहाजों द्वारा लाया जाता है, फिर गंतव्य पर पुनः गैसीकृत कर पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से उपभोक्ताओं तक वितरित किया जाता है।  
  • एलपीजी की अंतिम-मील डिलीवरी अपेक्षाकृत आसान है क्योंकि सिलेंडरों को ट्रक या छोटे वाहनों से सीधे घर तक पहुंचाया जा सकता है, जबकि पीएनजी के लिए व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क की आवश्यकता होती है। 

पीएनजी को बढ़ावा देने के पीछे कारण 

  • भारत की एलपीजी के लिए आयात पर निर्भरता काफी अधिक है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है, जिसमें अधिकांश आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती रही है। भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण यह आपूर्ति बाधित हो सकती है। 
  • इसके विपरीत, प्राकृतिक गैस के वैश्विक स्रोत अधिक विविध हैं और एलएनजी के रूप में इसकी उपलब्धता भी बेहतर मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में एलएनजी उत्पादन क्षमता में वृद्धि से इसकी आपूर्ति और स्थिर होगी। 

क्या प्राकृतिक गैस एलपीजी का विकल्प बन सकती है ? 

  • घरेलू उपयोग के लिए प्राकृतिक गैस एलपीजी का एक सरल और प्रभावी विकल्प है। हालांकि प्राकृतिक गैस हल्की होती है, लेकिन प्रति किलोग्राम यह अधिक ऊर्जा प्रदान करती है। खाना पकाने के संदर्भ में यह अंतर ज्यादा मायने नहीं रखता। 
  • औद्योगिक उपयोग में कुछ बदलाव की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि उपकरणों को अलग सेटिंग या संशोधन की जरूरत पड़ती है। छोटे और मध्यम उद्योगों में अभी भी एलपीजी का व्यापक उपयोग होता है। 

सरकार के प्रयास 

  • सरकार पीएनजी के विस्तार के लिए कई कदम उठा रही है। हाल ही में बड़ी संख्या में नए कनेक्शन जोड़ने की योजना बनाई गई है। लक्ष्य है कि 2034 तक 12 करोड़ पीएनजी कनेक्शन स्थापित किए जाएं। 
  • पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 25,000 किलोमीटर लंबा नेटवर्क मौजूद है और 10,500 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन निर्माणाधीन है। साथ ही, पीएनजी की कीमतों को एलपीजी के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। 
  • सरकार ने ऐसी नीतियां भी लागू की हैं जिनके तहत एक परिवार को एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन रखने की अनुमति नहीं होगी, जिससे पीएनजी अपनाने की गति तेज हो सकती है।  

चुनौतियाँ 

पीएनजी का विस्तार कई लाभ लेकर आता है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। 

  • देश का पाइपलाइन नेटवर्क अभी मुख्यतः पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में केंद्रित है, जबकि कई अन्य क्षेत्र अभी भी इससे अछूते हैं।
  • कई शहरों में अंतिम-मील कनेक्टिविटी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों को लाइसेंस दिया गया है, उनमें से कई अभी मुख्य पाइपलाइन से जुड़े नहीं हैं। 
  • ऊर्जा के अन्य क्षेत्रों—जैसे उर्वरक, बिजली और उद्योग में भी प्राकृतिक गैस की बड़ी खपत होती है। ऐसे में घरेलू उपयोग के लिए आपूर्ति बढ़ाने के लिए संसाधनों का पुनर्वितरण करना पड़ सकता है।  

आगे की राह 

  • यदि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार पीएनजी कनेक्शनों का विस्तार होता है, तब भी एलपीजी की मांग पूरी तरह समाप्त नहीं होगी और देश को आयात जारी रखना पड़ेगा।
  • घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, खासकर नए गैस क्षेत्रों के विकास के माध्यम से। फिर भी, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एलएनजी आयात की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। 
  • कुल मिलाकर, भारत का ऊर्जा परिदृश्य एक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है, जहां एलपीजी से पीएनजी की ओर धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है। यह बदलाव न केवल आयात निर्भरता कम करने में मदद करेगा, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगा।
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