संदर्भ
- इक्कीसवीं सदी के वैश्विक परिदृश्य में, विकास और पर्यावरण का अंतर्संबंध अब केवल नीतिगत चर्चाओं का हिस्सा न रहकर राष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया के मूल में स्थापित हो गया है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए यह चुनौती और भी महत्वपूर्ण है, जहाँ उसे तीव्र आर्थिक प्रगति के साथ-साथ जैव विविधता के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान एक साथ खोजना है।
- भारत का हरित मार्ग इस आधारभूत समझ पर टिका है कि पारिस्थितिक सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि एक-दूसरे के पूरक हैं। जलवायु परिवर्तन को भविष्य की किसी दूरगामी घटना के बजाय वर्तमान की एक विकासपरक वास्तविकता मानते हुए, भारत ने जैव विविधता के संवर्धन और जलवायु अनुकूलन के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया है।
जैव विविधता संरक्षण और विनियामक ढांचा
विश्व के प्रमुख मेगा-डायवर्स देशों में शामिल भारत, अपनी मात्र 2.4 प्रतिशत भू-भाग पर वैश्विक प्रजातियों का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा संजोए हुए है। इस विशाल प्राकृतिक संपदा की रक्षा के लिए भारत ने कई महत्वपूर्ण कानूनी और रणनीतिक कदम उठाए हैं:
- अद्यतन रणनीति (NBSAP 2024-30) : कोलंबिया में आयोजित कॉप 16 के दौरान भारत ने अपनी राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना प्रस्तुत की, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्रकृति के नुकसान को रोकना और 2050 तक पर्यावरण के साथ पूर्ण सामंजस्य स्थापित करना है।
- कानूनी सुदृढ़ता : वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) से लेकर जैव विविधता अधिनियम (2002) तक, भारत ने प्रदूषण नियंत्रण और संसाधन प्रबंधन के लिए एक व्यापक नियामक तंत्र विकसित किया है।
वन्यजीव संरक्षण: प्रमुख परियोजनाएं और उपलब्धियां
- भारत ने संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में वैश्विक मानक स्थापित किए हैं। संरक्षित क्षेत्रों का संजाल जो 2014 में 745 था, वह 2025 तक बढ़कर 1,134 हो गया है।
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परियोजना
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मुख्य प्रगति (2025-26 तक)
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प्रोजेक्ट टाइगर
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बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 58 तक पहुँची; 2022 की गणना के अनुसार 3,167 बाघ दर्ज।
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प्रोजेक्ट एलिफेंट
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हाथी अभ्यारण्यों का विस्तार 33 तक हुआ; 150 गलियारों की पहचान।
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प्रोजेक्ट चीता
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गांधीसागर और नौरादेही में विस्तार; कुल संख्या 30 तक पहुँची (19 भारत में जन्मे शावक)।
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प्रोजेक्ट हिम तेंदुआ
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पहली राष्ट्रव्यापी गणना में 718 हिम तेंदुए पाए गए; गणना 2.0 का शुभारंभ।
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प्रोजेक्ट डॉल्फिन
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गंगा, सिंधु और इरावदी डॉल्फिनों की वैज्ञानिक गणना का दूसरा चरण जारी।
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पारिस्थितिकी तंत्र का पुनरुद्धार और जन-भागीदारी
भारत की संरक्षण रणनीति केवल प्रजातियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे परिदृश्य (Landscape) की बहाली पर केंद्रित है :
- बायोस्फीयर रिजर्व : देश के 18 बायोस्फीयर रिजर्व में से 13 यूनेस्को की सूची में हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के कोल्ड डेजर्ट को इस वैश्विक नेटवर्क में शामिल किया गया है।
- एक पेड़ माँ के नाम : इस जन-आंदोलन ने पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत भावनाओं से जोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप दिसंबर 2025 तक 262.4 करोड़ पौधे रोपे गए।
- आर्द्रभूमि और तटीय सुरक्षा : रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। मिष्टी (MISHTI) योजना के तहत मैंग्रोव बहाली और ब्लू फ्लैग प्रमाणन के जरिए समुद्र तटों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ऊर्जा संक्रमण और जलवायु कार्रवाई
भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं, जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं :
- स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य : भारत ने 2030 के अपने लक्ष्य से पाँच वर्ष पूर्व ही (2025 में) गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50% से अधिक विद्युत क्षमता प्राप्त कर ली है।
- वैश्विक नेतृत्व : अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से भारत स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र बन रहा है।
- ऊर्जा दक्षता : बिजली उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में उल्लेखनीय कमी आई है, जो 2015-16 के 61.45 टन से घटकर 2022-23 में 40.52 टन (प्रति 1 करोड़ रुपये GDP) रह गई है।
प्रदूषण नियंत्रण और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy)
- वायु गुणवत्ता : राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत 100 से अधिक शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।
- अपशिष्ट से कंचन : फ्लाई ऐश के 100% उपयोग को अनिवार्य किया गया है। वर्तमान में उत्पन्न फ्लाई ऐश का बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण और सीमेंट उद्योग में उपयोग हो रहा है।
- विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) : प्लास्टिक, ई-कचरा और बैटरी प्रबंधन के लिए EPR ढांचे ने रिसाइक्लिंग पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है, जिससे लाखों टन कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित हुआ है।
निष्कर्ष
- भारत का पर्यावरणीय परिवर्तन उसके व्यापक दृष्टिकोण और ठोस कार्यान्वयन को दर्शाता है। नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिकी बहाली और जनभागीदारी आदि सभी मिलकर एक मजबूत और समग्र रणनीति का निर्माण करते हैं।
- प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की दिशा में भारत का लक्ष्य ठोस नीतियों और प्रयासों के माध्यम से समर्थित है। राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों के जरिए भारत सतत विकास, जलवायु स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।