इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल (इथेनॉल मिश्रित) वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इन्हें गणना में अधिक वेटेज दिया गया है। इससे कंपनियों को जीवाश्म ईंधन से हटकर वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।
कंपनियों को अपनी तकनीक और उत्पादन क्षमता में बदलाव के लिए पर्याप्त समय देते हुए, CAFE-3 को वित्त वर्ष 2027-28 से 2031-32 की अवधि के लिए तैयार किया गया है।
यह मसौदा केवल एक नियामक ढांचा नहीं है, बल्कि भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने की एक योजना है। यह न केवल नवाचार (Innovation) को प्रेरित करता है, बल्कि देश के आर्थिक विकास को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम भी है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी।
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