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Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM

भारत की परमाणु यात्रा

संदर्भ

  • भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍धि हासिल की है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 6 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी (स्व-धारित नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया की स्थिति) प्राप्त की, जो एक सतत् परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत का संकेत है। यह पीएफबीआर एक 500 मेगावाट विद्युत (एमडब्ल्यूई) रिएक्टर है, जिसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) द्वारा कल्पक्कम नाभिकीय परिसर में निर्मित किया गया है। 

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के बारे में 

  • पीएफबीआर स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन और अभियांत्रिकी में लगे दशकों के प्रयास को दर्शाता है। इसकी प्रौद्योगिकी का विकास परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक अनुसंधान एवं विकास केंद्र, इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा किया गया था।
  • पारंपरिक तापीय रिएक्टरों के विपरीत, पीएफबीआर यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का उपयोग करता है। प्रयुक्त विखंडनीय पदार्थ दाबित भारी जल रिएक्टरों से प्राप्त प्रयुक्त ईंधन के पुनर्संसाधन से प्राप्त किया जाता है, जिससे चरण 1 का चक्र पूर्ण होता है। 
  • पीएफबीआर का कोर यूरेनियम-238 की एक ब्‍लैंकेट से घिरा होता है। तीव्र न्यूट्रॉन इस उपजाऊ पदार्थ को विखंडनीय प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करते हैं, जिससे रिएक्टर अपने उपभोग से अधिक ईंधन उत्पन्न करने में सक्षम होता है।
  • रिएक्टर को अंततः ब्लैंकेट में थोरियम-232 के उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। ट्रांसम्‍यूटेशन के माध्यम से, थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित किया जाएगा, जो थोरियम आधारित भारत के परमाणु ऊर्जा के तीसरे चरण को संचालित करने वाला ईंधन होगा।  
  • पीएफबीआर द्वारा उत्पन्न प्रयुक्त ईंधन का पुनर्संसाधन कर उसे पुनः रिएक्टर में उपयोग किया जाएगा। इससे दूसरे चरण का ईंधन चक्र पूर्ण होता है और चरण 3 में भारत के प्रचुर थोरियम भंडार के बड़े पैमाने पर उपयोग का मार्ग प्रशस्त होता है।

इसे भी जाने  

क्रिटिकलिटी (Criticality) 

  • क्रिटिकलिटी वह अवस्था है जब एक सतत और नियंत्रित नाभिकीय विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया शुरू होती है। इस चरण पर, विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉनों की संख्या, अवशोषण और रिसाव के कारण खोने वाले न्यूट्रॉनों के बराबर हो जाती है, जिससे ऊर्जा उत्पादन स्थिर बना रहता है। यह निर्माण चरण से संचालन चरण में परिवर्तन का संकेत देता है और ऊष्मा तथा अंततः विद्युत उत्पादन की दिशा में पहला आवश्यक कदम होता है। 

भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम  

  • भारत के पास सीमित यूरेनियम भंडार हैं, लेकिन विश्व में थोरियम के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए, परमाणु ऊर्जा विभाग ने बंद नाभिकीय ईंधन चक्र पर आधारित तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का निर्माण किया। इसका उद्देश्य घरेलू विखंडनीय संसाधनों को क्रमिक रूप से बढ़ाना और दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है।

चरण 1: दाबित भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर)

  • पीएचडब्ल्यूआर में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग ईंधन के रूप में विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। इन रिएक्टरों से प्राप्त प्रयुक्त ईंधन प्लूटोनियम उत्पन्न करता है, जो अगले चरण के लिए मुख्य इनपुट बनता है। 

चरण 2: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (एफबीआर) 

  • चरण 1 से प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में ईंधन के रूप में किया जाता है, जो जितना ईंधन उपभोग करते हैं उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करते हैं। कल्पक्कम स्थित पीएफबीआर इस चरण में भारत के प्रवेश का संकेत देता है। इन रिएक्टरों का उपयोग थोरियम से यूरेनियम-233 बनाने के लिए किया जाएगा, जिससे चरण 3 की नींव रखी जाएगी। 

चरण 3: थोरियम-आधारित रिएक्टर 

  • इस चरण में भारत के विशाल थोरियम भंडार का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा, जिसमें चरण 2 में उत्पन्न यूरेनियम-233 को ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाएगा। थोरियम को व्यावहारिक रूप से असीमित ऊर्जा स्रोत माना जाता है और यह चरण भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की कुंजी है। 

भारत में वर्तमान परमाणु ऊर्जा की स्थिति

  • स्थापित क्षमता : देश की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता इस समय 8.78 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है। वर्ष 2024–25 के दौरान, विभिन्न परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने मिलकर 56,681 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया।
  • निरंतर योगदान : भारत के कुल विद्युत उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का योगदान स्थिर रूप से लगभग 3% बना हुआ है। वर्ष 2024–25 में इसका हिस्सा 3.1% दर्ज किया गया।
  • भविष्य की विस्तार योजनाएँ : आने वाले वर्षों में भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाने की योजना बना रहा है। स्वदेश में विकसित 700 मेगावाट (एमडब्ल्यू) के रिएक्टरों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से तैयार किए जा रहे 1,000 मेगावाट के रिएक्टरों के माध्यम से, वर्ष 2031–32 तक कुल स्थापित क्षमता 22.38 गीगावाट (जीडब्ल्यू) तक पहुँचने का अनुमान है। 
  • वैश्विक सहयोग : भारत ने शांतिपूर्ण उपयोग के लिए नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में 18 देशों के साथ अंतर-सरकारी समझौते (आईजीए) किए हैं, जो इस क्षेत्र में भारत के प्रति बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे को दर्शाते हैं। 

भारत का दीर्घकालिक परमाणु मिशन 

  • भारत ने अपने ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की भूमिका को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय बजट 2025–26 में सरकार द्वारा घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन का उद्देश्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट की परमाणु विद्युत क्षमता हासिल करना है। यह पहल वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करती है। 

लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उठाए गए कदम 

  • वित्तीय निवेश : परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) के डिजाइन, विकास और तैनाती हेतु 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो स्वदेशी परमाणु तकनीक में दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • एसएमआर लक्ष्य : योजना के अनुसार, कम से कम पाँच स्वदेशी रूप से विकसित एसएमआर वर्ष 2033 तक परिचालन में लाए जाएंगे, जिससे स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था को बल मिलेगा। 
  • बार्क की पहल : भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) उन्नत रिएक्टर तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसके अंतर्गत 200 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर-200), 55 मेगावाट विद्युत का एसएमआर-55, तथा हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विकसित लगभग 5 मेगावाट तापीय क्षमता का उच्च-ताप गैस-शीतित रिएक्टर शामिल हैं। 
  • शांति अधिनियम, 2025 : इस मिशन को समर्थन देने के लिए सरकार ने सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम, 2025 लागू किया है। यह कानून देश के परमाणु कानूनी ढांचे को अधिक सुसंगत और आधुनिक बनाता है तथा विनियामक निगरानी के तहत निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी को अनुमति देकर सहयोग और निवेश के नए अवसर उत्पन्न करता है। 

निष्कर्ष 

  • प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में क्रिटिकैलिटी की प्राप्ति केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है। यह भारत के दीर्घकालिक परमाणु विज़न की परिपक्वता और उसकी स्वदेशी क्षमताओं की मजबूती को दर्शाती है। सीमित यूरेनियम संसाधनों से लेकर थोरियम-संचालित भविष्य तक, भारत का तीन-चरणीय कार्यक्रम अब डिजाइन से क्रियान्वयन की दिशा में निरंतर अग्रसर है। 
  • कल्पक्कम नाभिकीय परिसर में हुई प्रगति उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों में विश्वास को दर्शाती है और इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने में परमाणु ऊर्जा विभाग जैसी संस्थाओं की भूमिका को सुदृढ़ करती है। जैसे-जैसे क्षमता का विस्तार होगा और नई प्रौद्योगिकियाँ आकार लेंगी, परमाणु ऊर्जा भारत के ऊर्जा मिश्रण में कहीं अधिक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। अतः यह क्षण एक उपलब्धि के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण मोड़ भी है, जो ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता और साल 2070  तक शुद्ध शून्य प्रतिबद्धता की दिशा में देश के मार्ग को सुदृढ़ करता है।
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