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भारत का समुद्री खाद्य निर्यात FY 2025–26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा

चर्चा में क्यों?

  • भारत ने वित्त वर्ष 2025–26 में समुद्री खाद्य (Seafood) निर्यात के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए मात्रा और मूल्य दोनों के आधार पर अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज किया है।
  • वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद देश ने 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिसका कुल मूल्य 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर (₹73,890.46 करोड़) रहा। यह उपलब्धि भारत की मत्स्य एवं जलीय कृषि (Aquaculture) क्षमता, निर्यात अवसंरचना और वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग को दर्शाती है।

समुद्री खाद्य क्षेत्र का महत्व

  • भारत का समुद्री खाद्य क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा अर्जन और तटीय समुदायों की आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 
  • यह क्षेत्र लाखों मछुआरों, मत्स्य किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है तथा ग्रामीण एवं तटीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।

FY 2025–26 की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान भारत ने 19,72,018 मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिसका कुल मूल्य 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। यह मात्रा और मूल्य दोनों के लिहाज से भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इस उपलब्धि ने भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।

फ्रोजन श्रिम्प रहा निर्यात का प्रमुख आधार

  • फ्रोजन श्रिम्प (जमे हुए झींगे) भारत के समुद्री खाद्य निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद बना रहा। वर्ष 2025–26 में 7,92,647 मीट्रिक टन फ्रोजन श्रिम्प का निर्यात किया गया, जिससे 5.62 अरब अमेरिकी डॉलर (₹49,037.93 करोड़) की आय हुई। 
  • यह कुल निर्यात मात्रा का 40.19 प्रतिशत तथा कुल निर्यात आय का 66.52 प्रतिशत हिस्सा था।
  • फ्रोजन श्रिम्प के निर्यात में रुपये के मूल्य के आधार पर 13.16 प्रतिशत तथा डॉलर के मूल्य के आधार पर 8.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 
  • भारत से निर्यात होने वाले प्रमुख श्रिम्प प्रजातियों में लिटोपेनियस वन्नामेई (Litopenaeus vannamei) और ब्लैक टाइगर श्रिम्प शामिल रहे, जिनके निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों के स्तर पर वृद्धि हुई।

अन्य प्रमुख निर्यातित समुद्री उत्पाद

  • फ्रोजन फिश भारत का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री निर्यात उत्पाद रहा, जिससे 643.70 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई। 
  • इसके बाद सूखे समुद्री उत्पादों (Dried Seafood) का स्थान रहा, जिनसे 577.44 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात राजस्व प्राप्त हुआ। विशेष रूप से सूखे समुद्री उत्पादों के निर्यात मूल्य में 78.05 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
  • फ्रोजन स्क्विड (Squid) का निर्यात 1,02,060 मीट्रिक टन रहा, जिससे 513.84 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई। वहीं फ्रोजन कटलफिश (Cuttlefish) के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसका निर्यात 67,157 मीट्रिक टन रहा और इससे 331.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए।
  • इसके अतिरिक्त, चिल्ड (Chilled) समुद्री उत्पादों के निर्यात से 71.27 मिलियन अमेरिकी डॉलर तथा जीवित समुद्री उत्पादों (Live Products) के निर्यात से 62.43 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई। लाइव उत्पादों के निर्यात मूल्य में 11.46 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

प्रमुख निर्यात बाजार

  • संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और चीन भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के सबसे बड़े आयातक बने रहे। 
  • मूल्य के आधार पर अमेरिका भारत का सबसे बड़ा बाजार रहा, जहाँ 2.33 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 2,79,193 मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया गया। 
  • अमेरिका को होने वाले कुल समुद्री खाद्य निर्यात में फ्रोजन श्रिम्प की हिस्सेदारी 93.55 प्रतिशत रही। हालांकि अमेरिका को निर्यात में मूल्य और मात्रा दोनों के स्तर पर कुछ गिरावट भी दर्ज की गई।
  • चीन मात्रा के आधार पर भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहा। वर्ष 2025–26 में चीन ने भारत से 4,90,369 मीट्रिक टन समुद्री उत्पाद आयात किए, जिनका मूल्य 1.61 अरब अमेरिकी डॉलर था।
  • यूरोपीय संघ (EU) 1.59 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के आयात के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व भी भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के महत्वपूर्ण बाजार रहे।

समुद्री खाद्य निर्यात में प्रमुख बंदरगाहों की भूमिका

  • वर्ष 2025–26 में भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को संभालने वाले प्रमुख बंदरगाहों में Visakhapatnam Port, Jawaharlal Nehru Port और Cochin Port शामिल रहे। इन बंदरगाहों ने समुद्री उत्पादों के प्रसंस्करण, भंडारण और निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु प्रमुख सिफारिशें

  • विशेषज्ञों ने भारतीय समुद्री खाद्य क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। 
  • इनमें स्वदेशी ब्रूडस्टॉक (Broodstock) विकास योजना को बढ़ावा देकर आयातित बीजों पर निर्भरता कम करना, वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करना, देश-विशिष्ट निर्यात प्रतिबंधों और उच्च मालभाड़ा लागत की समस्या का समाधान करना तथा समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए एक समन्वित शीर्ष संस्था जैसे Seafood Sector Governing Council (SSGC) का गठन करना शामिल है।

सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम

  • समुद्री उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए Marine Products Export Development Authority महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
  • यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक विशेष संस्था है, जो समुद्री उत्पादों के निर्यात संवर्धन और गुणवत्ता सुधार के लिए कार्य करती है।
  • इसके अतिरिक्त, Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana तथा Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund जैसी योजनाओं के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में निवेश, अवसंरचना विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने समुद्री खाद्य प्रसंस्करण में प्रयुक्त कुछ कच्चे माल के शुल्क-मुक्त आयात की सीमा भी बढ़ाई है तथा SHAPHARI प्रमाणन जैसी पहलों को बढ़ावा दिया है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद भारतीय समुद्री खाद्य क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विभिन्न देशों द्वारा लगाए जाने वाले गैर-टैरिफ अवरोध (Non-Tariff Measures), अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) संबंधी मानक, एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) और काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) जैसी व्यापारिक बाधाएँ निर्यात को प्रभावित करती हैं।
  • इसके अलावा कच्चे माल की मौसमी उपलब्धता, गुणवत्ता में असमानता तथा अपर्याप्त कोल्ड-चेन अवसंरचना भी प्रमुख समस्याएँ हैं। 
  • समुद्री उत्पाद अत्यधिक नाशवान होते हैं और इनके संरक्षण के लिए निरंतर तापमान नियंत्रण आवश्यक होता है। कोल्ड-स्टोरेज और परिवहन अवसंरचना की कमी से उत्पाद की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ प्रभावित हो सकती है।
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