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भारत–दक्षिण कोरिया संबंध

संदर्भ  

  • नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच हुई बैठक ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। यह यात्रा व्यापार, तकनीक, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक एकता के क्षेत्रों में एक भविष्योन्मुखी रोडमैप तैयार करती है।   

ऐतिहासिक एवं रणनीतिक पृष्ठभूमि 

  • वर्ष 1973 में औपचारिक संबंधों की शुरुआत से लेकर 2015 में विशेष रणनीतिक साझेदारी बनने तक, यह गठबंधन सुरक्षा और समृद्धि पर आधारित रहा है। 
  • भारत की एक्ट ईस्ट नीति और दक्षिण कोरिया की न्यू सदर्न पॉलिसी के बीच का सामंजस्य इस रिश्ते को और अधिक प्रासंगिक बनाता है।  

बैठक के मुख्य स्तंभ और समझौते 

1. व्यापार और आर्थिक गतिशीलता 

  • महत्वाकांक्षी लक्ष्य : द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 50 अरब डॉलर करने का संकल्प लिया गया।
  • सीईपीए (CEPA) का उन्नयन : 2010 से प्रभावी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आधुनिक बनाने के लिए वार्ता फिर से शुरू हुई है। 
  • व्यापार संतुलन पर ध्यान : भारत के बढ़ते व्यापार घाटे (निर्यात 5.8 अरब डॉलर बनाम आयात 21 अरब डॉलर) को कम करने के लिए कृषि, फार्मा और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों पर विशेष बल दिया गया है।   
  • संस्थागत ढांचा : औद्योगिक सहयोग समिति और आर्थिक सुरक्षा संवाद की शुरुआत की गई है।  

2. डिजिटल एवं तकनीकी क्रांति (Chips to Talent) 

  • इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी में सहयोग के लिए एक नए मंच की शुरुआत। 
  • औद्योगिक टाउनशिप : भारत में विशेष कोरियाई औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे दक्षिण कोरियाई लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भारत में विस्तार करने में सुगमता होगी। 

3. समुद्री सुरक्षा और शिपबिल्डिंग (Ships and Maritime) 

  • रणनीतिक तालमेल : भारत के मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के साथ कोरियाई तकनीक का मेल होगा। कोरिया उन्नत तकनीक प्रदान करेगा, जबकि भारत बुनियादी ढांचा और बाजार उपलब्ध कराएगा।
  • आर्कटिक और जलवायु : समुद्री लॉजिस्टिक्स के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और आर्कटिक अनुसंधान पर भी दोनों देशों ने सहमति जताई है। 

4. सांस्कृतिक कूटनीति और जन-संपर्क 

  • K-Culture का केंद्र : मुंबई में एक समर्पित कोरिया सेंटर की स्थापना की जाएगी जो कोरियाई संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनेगा।  
  • मैत्री महोत्सव : संबंधों के जश्न के तौर पर 2028 में भारत-कोरिया मैत्री महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। 
  • साझा विरासत : अयोध्या में रानी सुरिरत्ना स्मारक जैसे प्रतीक हमारी प्राचीन ऐतिहासिक जड़ों को जीवित रखते हैं। 

रक्षा और भू-राजनीति: एक साझा दृष्टि  

  • रक्षा उत्पादन : K9 वज्र-टी गन सिस्टम की सफलता के बाद अब संयुक्त अनुसंधान और रक्षा निर्यात पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
  • वैश्विक मंच : दक्षिण कोरिया ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होकर वैश्विक स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। 

चुनौतियाँ 

  • व्यापार असंतुलन भारत के लिए प्रमुख चिंता है 
  • टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण प्रगति धीमी
  • बुनियादी ढांचे, कौशल और नीति सुधार की आवश्यकता
  • भू-राजनीतिक अस्थिरता का ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर संभावित प्रभाव 
  • MoU का क्रियान्वयन विशेषकर एमएसएमई (MSMEs)  और तकनीकी हस्तांतरण में चुनौतियाँ 

आगे की दिशा  

  • सीईपीए (CEPA) पुनर्वार्ता को तेज गति देना और व्यापार घाटा कम करना
  • फार्मास्यूटिकल, वस्त्र और आईटी सेवाओं में भारतीय निर्यात को बढ़ावा देना
  • सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में डिजिटल सहयोग को मजबूत करना
  • भारत के औद्योगिक कॉरिडोर में कोरियाई निवेश आकर्षित करना
  • महत्वपूर्ण खनिजों और नई तकनीकों के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना
  • शिपबिल्डिंग सहयोग को सागरमाला परियोजना और मेरीटाइम इंडिया विजन (Maritime India Vision) से जोड़ना
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सहयोग और समृद्धि के केंद्र के रूप में विकसित करना
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