चर्चा में क्यों ?
हाल ही में ईरान से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्मों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाली अंडरसी केबलों के संचालकों से शुल्क वसूलने तथा “सुरक्षा भुगतान” जैसी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।
ईरान की इस टिप्पणी ने वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था की उस अदृश्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण संरचना की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिस पर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था आधारित है।
आज विश्व का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों के माध्यम से संचालित होता है। भारत सहित कई देश पश्चिम एशिया और यूरोप से जुड़ने के लिए होर्मुज क्षेत्र से गुजरने वाली इन केबलों पर निर्भर हैं।
ऐसे में यदि किसी भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध, साइबर हमले या रणनीतिक अवरोध के कारण इन केबलों में व्यवधान आता है, तो इसका प्रभाव केवल इंटरनेट सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्लाउड प्लेटफॉर्म, बैंकिंग नेटवर्क, शेयर बाजार, रक्षा संचार और वैश्विक व्यापार भी प्रभावित हो सकते हैं।

अंडरसी (Submarine) केबल क्या हैं ?
- अंडरसी या समुद्रतल केबल महासागरों की तलहटी में बिछाई गई फाइबर-ऑप्टिक लाइनें होती हैं, जो वैश्विक डिजिटल संचार की रीढ़ मानी जाती हैं।
- इन्हें आधुनिक दुनिया की “अदृश्य डिजिटल राजमार्ग” (Invisible Digital Highways) कहा जाता है क्योंकि इंटरनेट, वीडियो कॉल, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रांसफर का अधिकांश भाग इन्हीं के माध्यम से संचालित होता है।
- इन केबलों को विशेष केबल बिछाने वाले जहाजों द्वारा समुद्र की सतह से सैकड़ों मीटर नीचे स्थापित किया जाता है। इनके भीतर अत्यंत पतले फाइबर-ऑप्टिक तंतु होते हैं, जो प्रकाश संकेतों के माध्यम से डेटा को अत्यधिक तेज गति से एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचाते हैं।
- इन तंतुओं को गहरे समुद्र के दबाव, समुद्री गतिविधियों, जहाजों के लंगर तथा संभावित क्षति से बचाने के लिए प्लास्टिक, स्टील और तांबे की सुरक्षात्मक परतों से ढका जाता है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने वर्ष 2010 में इन केबलों को “Critical Communication Infrastructure” अर्थात वैश्विक संचार की अत्यंत महत्वपूर्ण अवसंरचना बताया था। वर्तमान समय में वैश्विक अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक का लगभग 95–99 प्रतिशत भाग इन्हीं समुद्रतल केबलों के माध्यम से संचालित होता है, जबकि उपग्रह आधारित संचार की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित है।
वैश्विक इंटरनेट और डेटा प्रणाली में अंडरसी केबलों की भूमिका
- आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था का लगभग पूरा ढांचा अंडरसी केबलों पर आधारित है। जब कोई व्यक्ति भारत में बैठकर यूरोप या अमेरिका के सर्वर से जुड़ी वेबसाइट खोलता है, वीडियो कॉल करता है, क्लाउड डेटा एक्सेस करता है या अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग लेन-देन करता है, तो यह डेटा समुद्रतल केबलों के माध्यम से ही संचालित होता है।
- उपग्रह इंटरनेट तकनीक की तुलना में अंडरसी केबल अधिक तेज गति, कम विलंबता (Low Latency) और विशाल बैंडविड्थ प्रदान करती हैं।
- यही कारण है कि वैश्विक वित्तीय बाजार, डिजिटल भुगतान प्रणालियां, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, क्लाउड सेवाएं और ई-कॉमर्स नेटवर्क इन पर अत्यधिक निर्भर हैं।
- यदि किसी प्रमुख केबल नेटवर्क में व्यवधान उत्पन्न होता है, तो इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाता है, लेकिन इससे नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप इंटरनेट गति धीमी हो सकती है, वीडियो स्ट्रीमिंग प्रभावित हो सकती है और क्लाउड आधारित सेवाओं में देरी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए समुद्रतल केबल केवल तकनीकी अवसंरचना नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्थिरता की आधारशिला बन चुकी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है ?
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) विश्व का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक एवं आर्थिक मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
- यह क्षेत्र केवल तेल और गैस आपूर्ति के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।
- भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच इंटरनेट डेटा ले जाने वाली कई महत्वपूर्ण समुद्रतल केबलें इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। इनमें Tata Communications की FALCON केबल, Tata-TGN Gulf तथा Gulf Bridge International (GBI) जैसी प्रणालियां शामिल हैं।
- ये केबल India को United Arab Emirates, Qatar, Saudi Arabia और यूरोपीय नेटवर्क से जोड़ती हैं।
- इसी कारण होर्मुज क्षेत्र को “डिजिटल चोकपॉइंट” कहा जाता है। यदि इस क्षेत्र में किसी प्रकार का संघर्ष, सैन्य तनाव या रणनीतिक अवरोध उत्पन्न होता है, तो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। यह स्थिति केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं रहेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, संचार और वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित करेगी।
अंडरसी केबल नेटवर्क के समक्ष बढ़ते खतरे
1. भू-राजनीतिक हस्तक्षेप और रणनीतिक दबाव
- ईरान की हालिया टिप्पणी यह दर्शाती है कि अंडरसी केबल अब केवल तकनीकी अवसंरचना नहीं रह गई हैं, बल्कि वे भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन का हिस्सा बन चुकी हैं।
- यदि किसी देश द्वारा समुद्री मार्गों और डिजिटल नेटवर्क पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जाता है, तो यह वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
- रिपोर्टों के अनुसार ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से जुड़े विचारों में बड़ी तकनीकी कंपनियों से “लाइसेंस शुल्क” और “सुरक्षा भुगतान” लेने की बात सामने आई। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में डिजिटल अवसंरचना को आर्थिक और रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
2. हाइब्रिड युद्ध और ग्रे-ज़ोन संघर्ष
- वर्तमान समय में युद्ध केवल पारंपरिक सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रह गया है। अब डिजिटल अवसंरचना, साइबर नेटवर्क और संचार प्रणालियां भी संघर्ष का हिस्सा बन चुकी हैं। इसे “Gray-zone Warfare” या हाइब्रिड युद्ध कहा जाता है।
- यदि किसी देश की अंडरसी केबलों को क्षति पहुंचाई जाती है, तो बिना प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई के उसकी अर्थव्यवस्था, संचार और वित्तीय व्यवस्था को बाधित किया जा सकता है। इस प्रकार समुद्रतल केबलें आधुनिक भू-राजनीतिक संघर्षों का संवेदनशील लक्ष्य बन गई हैं।
3. साइबर हमले और जासूसी का खतरा
- अंडरसी केबल नेटवर्क जासूसी और साइबर हमलों के लिए भी संवेदनशील हैं। कई देशों पर अतीत में डेटा इंटरसेप्शन, केबल टैपिंग और निगरानी गतिविधियों के आरोप लग चुके हैं।
- यदि किसी देश को इन केबलों के माध्यम से बहने वाले डेटा तक पहुंच मिल जाती है, तो वह वित्तीय लेन-देन, सरकारी संचार, रक्षा सूचनाओं और व्यापारिक डेटा की निगरानी कर सकता है। इसके अतिरिक्त नेटवर्क प्रबंधन प्रणालियों पर साइबर हमले वैश्विक इंटरनेट सेवाओं को बाधित कर सकते हैं।
भारत पर संभावित प्रभाव
1. इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की गति प्रभावित होना
- भारत की अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से होकर गुजरने वाली समुद्रतल केबलों पर निर्भर करता है। यदि इन मार्गों में व्यवधान आता है, तो इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर भेजना पड़ेगा।
- हालांकि इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं होगा, लेकिन नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव बढ़ने से इंटरनेट गति धीमी हो सकती है। वीडियो स्ट्रीमिंग में बफरिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में रुकावट, ऑनलाइन गेमिंग में लैग तथा क्लाउड आधारित एप्लिकेशन में देरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- यह प्रभाव विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक दिखाई देगा जो अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रांसफर पर निर्भर हैं।
2. क्लाउड सेवाओं और डेटा सेंटरों पर प्रभाव
- आज भारत की बड़ी कंपनियां, स्टार्टअप, बैंकिंग नेटवर्क और सरकारी संस्थान क्लाउड प्लेटफॉर्मों पर निर्भर हैं।
- Amazon Web Services (AWS)
- Microsoft Azure
- Google Cloud
- जैसी सेवाओं का संचालन वैश्विक डेटा नेटवर्क के माध्यम से होता है। यदि अंडरसी केबलों में व्यवधान आता है, तो क्लाउड डेटा एक्सेस धीमा हो सकता है, सर्वर प्रतिक्रिया समय बढ़ सकता है और कई ऑनलाइन सेवाओं में अस्थायी बाधा उत्पन्न हो सकती है।
- यह स्थिति ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, वीडियो प्लेटफॉर्म और आईटी सेवाओं को प्रभावित कर सकती है।
3. वित्तीय प्रणाली और शेयर बाजार पर असर
- भारत की वित्तीय प्रणाली अत्यधिक तेज डेटा संचार पर आधारित है। शेयर बाजार, एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग, बैंकिंग लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क लगातार वैश्विक डेटा प्रवाह पर निर्भर रहते हैं।
- यदि इंटरनेट नेटवर्क में देरी या अस्थिरता आती है, तो शेयर बाजारों में ट्रेडिंग प्रभावित हो सकती है। बैंकिंग सेवाओं में लेन-देन की गति धीमी पड़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय भुगतान प्रणालियों में रुकावट उत्पन्न हो सकती है। ऐसी स्थिति में आर्थिक गतिविधियों पर त्वरित प्रभाव दिखाई दे सकता है।
4. भारत के आईटी और आउटसोर्सिंग उद्योग पर प्रभाव
- भारत का IT-BPM और आउटसोर्सिंग उद्योग वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है। यह उद्योग निरंतर और उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर है।
- यदि समुद्रतल केबल नेटवर्क बाधित होता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों को डेटा एक्सेस, क्लाइंट सर्वर कनेक्टिविटी और रीयल-टाइम संचार में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- इससे सेवा वितरण प्रभावित हो सकता है तथा भारत की डिजिटल सेवा अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
5. राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक संचार जोखिम
- डिजिटल नेटवर्क अब राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। रक्षा संचार, खुफिया जानकारी साझा करना और रणनीतिक डेटा नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर निर्भर रहते हैं।
- यदि किसी संघर्ष या साइबर हमले के दौरान अंडरसी केबल बाधित होती हैं, तो इससे सैन्य समन्वय, निगरानी नेटवर्क और रणनीतिक संचार प्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसलिए समुद्रतल केबलों की सुरक्षा अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय बन गई है।
डिजिटल चोकपॉइंट क्यों बन रहे हैं भू-राजनीतिक जोखिम ?
- आज वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं और डिजिटल अर्थव्यवस्था कुछ सीमित समुद्री मार्गों और डेटा नेटवर्कों पर अत्यधिक निर्भर हो गई है। रेड सी, होर्मुज जलडमरूमध्य और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्र ऐसे “डिजिटल चोकपॉइंट” बन चुके हैं जहां बड़ी संख्या में समुद्रतल केबलें एकत्रित होती हैं।
- यदि इन क्षेत्रों में किसी प्रकार का संघर्ष, आतंकवादी गतिविधि, समुद्री दुर्घटना या साइबर हमला होता है, तो वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि अब डिजिटल अवसंरचना को राष्ट्रीय शक्ति और रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है।