हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 में वित्त मंत्री ने महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल (MGGSI) की शुरुआत की घोषणा की, जिसका उद्देश्य खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को सशक्त बनाना है।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल: मुख्य विशेषताएँ
- यह पहल भारत के परंपरागत शिल्प और ग्राम-आधारित उद्योगों को सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषित की गई है।
- इसका प्रमुख लक्ष्य खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना, उनकी ब्रांड पहचान को मजबूत करना तथा विपणन नेटवर्क का विस्तार करना है।
- इस कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक ग्रामीण उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ कारीगरों और बुनकरों के लिए स्थायी और सुरक्षित आजीविका सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
लक्षित समूह और प्रमुख चुनौतियाँ
- महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल मुख्य रूप से बुनकरों, ग्राम उद्योगों, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के लाभार्थियों तथा ग्रामीण युवाओं को केंद्र में रखती है।
- इसका उद्देश्य उन संरचनात्मक समस्याओं का समाधान करना है, जो लंबे समय से इन क्षेत्रों को प्रभावित करती रही हैं, जैसे बिखरी हुई आपूर्ति श्रृंखलाएँ, गुणवत्ता मानकों में असमानता और बाजार तक सीमित पहुँच।
रणनीति और कार्यप्रणाली
- इस पहल के अंतर्गत कारीगरों को आधुनिक और दक्ष उत्पादन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जबकि पारंपरिक शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा जाएगा।
- साथ ही, बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के माध्यम से बाजार तक पहुँच को आसान बनाया जाएगा, जिससे कारीगर संगठित खुदरा क्षेत्र, निर्यात बाजारों और डिजिटल/ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ सकें।
व्यापक नीति दृष्टिकोण से सामंजस्य
- महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल ‘लोकल के लिए वोकल’ के विचार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सशक्त बनाने के सरकारी प्रयासों के अनुरूप है।
- पारंपरिक उद्योगों को मजबूत करके यह योजना रोजगार के अवसरों का सृजन करने, ग्रामीण संकट को कम करने और स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करेगी।
- इस प्रकार, यह पहल आत्मनिर्भर भारत की व्यापक परिकल्पना के साथ स्पष्ट रूप से जुड़ी हुई है।