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मरीन स्पैटियल प्लानिंग (MSP)

संदर्भ 

  • ओडिशा सरकार ने अपने समुद्री और तटीय क्षेत्रों के एकीकृत प्रबंधन हेतु पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR) के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है। 
  • वस्तुतः भारत में स्थायी समुद्री नियोजन की नींव 2019 में नॉर्वे के साथ हुई साझेदारी से पड़ी थी, जिसके शुरुआती चरण में पुडुचेरी और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेशों को चुना गया था। अब इस पहल के दूसरे चरण में, ओडिशा मरीन स्पैटियल प्लानिंग को अपनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। 

राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR) के बारे में 

  • राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR) की स्थापना 1998 में चेन्नई में हुई थी। 
  • यह संस्थान तटीय पर्यावरण के वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी के लिए समर्पित है। पूर्व में इसे इंटीग्रेटेड कोस्टल एंड मरीन एरिया मैनेजमेंट प्रोजेक्ट डायरेक्टोरेट (ICMAM-PD) कहा जाता था।

एनसीसीआर (NCCR) के मुख्य उत्तरदायित्व

  • तटरेखा की निगरानी : सैटेलाइट डेटा के माध्यम से समुद्री कटाव का विश्लेषण और तटीय मानचित्र तैयार करना।
  • प्रदूषण नियंत्रण : समुद्री जल की गुणवत्ता की जाँच करना और माइक्रोप्लास्टिक जैसे हानिकारक तत्वों का अध्ययन करना।
  • आपदा प्रबंधन : सुनामी और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करना।
  • पारिस्थितिकी संरक्षण : समुद्री संसाधनों के सतत दोहन हेतु वैज्ञानिक शोध करना। 

मरीन स्पैटियल प्लानिंग (MSP) क्या है ? 

  • एमएसपी एक ऐसा रणनीतिक ढांचा है जो समुद्री संसाधनों के योजनाबद्ध और स्थायी उपयोग को सुनिश्चित करता है। 
  • इसका मुख्य उद्देश्य ब्लू इकोनॉमी को गति देना और जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करना है। 
  • इस प्रणाली के माध्यम से समुद्र के विभिन्न हिस्सों को विशिष्ट कार्यों के लिए चिन्हित (Zoning) किया जाता है, जैसे:
    • अक्षय ऊर्जा उत्पादन (पवन ऊर्जा आदि)
    • मत्स्य पालन और जलीय कृषि (Aquaculture)
    • पर्यटन और समुद्री उद्योग
    • पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण 

ओडिशा के लिए एमएसपी की प्रासंगिकता और लाभ  

ओडिशा की 550 किमी लंबी तटरेखा मैंग्रोव, लैगून और मुहानों से समृद्ध है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था और आजीविका की रीढ़ हैं।

1. वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित नियोजन  

  • एनसीसीआर (NCCR) के साथ मिलकर राज्य सरकार समुद्र की गहराई (बेंथिक मैपिंग), जल के तापमान और लवणता का विस्तृत अध्ययन करेगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए और कहाँ समुद्री घास या शैवाल की खेती की जाए।  

2. आजीविका और आर्थिक समृद्धि 

  • एमएसपी के कार्यान्वयन से मत्स्य पालन, बंदरगाह विकास और पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे, जिससे तटीय समुदायों की आय में वृद्धि होगी।

3. विकास और संरक्षण में संतुलन 

  • बढ़ते औद्योगिक दबाव के बीच, एमएसपी यह सुनिश्चित करेगा कि आर्थिक प्रगति और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के बीच एक आदर्श तालमेल बना रहे।

ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी कॉरिडोर (OMBRIC) के बारे में  

  • अगस्त 2025 में शुरू किया गया ओएमबीआरआईसी प्रोजेक्ट, एमएसपी की सफलता में तकनीकी पूरक की भूमिका निभाएगा। 
  • इसका लक्ष्य समुद्री जैव प्रौद्योगिकी (Marine Biotechnology) के माध्यम से नवाचार लाना है।

ओएमबीआरआईसी के प्रमुख लक्ष्य:  

  • समुद्री क्षेत्र में स्टार्टअप्स और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।
  • वैज्ञानिक पर्यटन (Scientific Tourism) का विकास करना।
  • पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना।
  • यह पहल वैज्ञानिक नवाचार और तटीय प्रबंधन को एक सूत्र में पिरोती है, जिससे ओडिशा का भविष्य न केवल समृद्ध बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी बनेगा।
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