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मेमरिस्टर (Memristor)

चर्चा में क्यों ? 

  • हाल ही में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की दुनिया में एक युगांतरकारी सफलता हासिल की है। उन्होंने हाफनियम ऑक्साइड पर आधारित एक ऐसा मेमरिस्टर (Memristor) विकसित किया है, जो ठीक उसी तरह कार्य करता है जैसे मानव मस्तिष्क के सिनेप्स (Synapses) सूचनाओं को संकलित और विश्लेषित करते हैं। वस्तुतः यह नवाचार भविष्य के कंप्यूटरों को वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली और ऊर्जा-कुशल बनाने का सामर्थ्य रखता है। 

मेमरिस्टर (Memristor) के बारे में  

  • इलेक्ट्रॉनिक्स में अब तक रजिस्टर, कैपेसिटर और इंडक्टर को ही बुनियादी घटक माना जाता था, लेकिन मेमरिस्टर (मेमोरी + रजिस्टर) अब चौथे मौलिक तत्व के रूप में उभर कर सामने आया है। 
  • अनूठा कार्य सिद्धांत : जहाँ साधारण रजिस्टर का प्रतिरोध स्थिर रहता है, वहीं मेमरिस्टर का प्रतिरोध उसमें प्रवाहित होने वाले आवेश (Charge) की मात्रा के अनुसार बदलता है। 
  • स्मरण शक्ति (Memory Effect) : इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्युत आपूर्ति बंद होने के बाद भी यह अपनी अंतिम अवस्था को याद रखता है। इसी कारण इसे नॉन-वोलेटाइल मेमोरी की श्रेणी में रखा जाता है।  

कैम्ब्रिज का तकनीकी नवाचार: P-N जंक्शन आधारित स्थिरता 

पारंपरिक मेमरिस्टर अक्सर फिलामेंट (Filament) तकनीक पर आधारित होते हैं, जो काफी अनिश्चित और अस्थिर होते हैं। कैम्ब्रिज की टीम ने इस चुनौती का समाधान p-n जंक्शन इंटरफेस का उपयोग करके निकाला है: 

  • सटीक नियंत्रण : कम वोल्टेज वाली तरंगों (Pulses) के माध्यम से आयनों के प्रवाह को नियंत्रित कर इलेक्ट्रॉनों के लिए ऊर्जा की बाधा (Energy Barrier) को सुचारू रूप से घटाया या बढ़ाया जा सकता है।
  • पूर्वानुमान : यह तकनीक मेमरिस्टर के व्यवहार को अधिक स्थिर, सटीक और ऊर्जा-कुशल बनाती है। 

प्रमुख विशेषताएं 

  • मस्तिष्क जैसी संरचना (Neuromorphic) : यह डिवाइस एक ही बिंदु पर डेटा को प्रोसेस और स्टोर करता है। यह मस्तिष्क की उस कार्यप्रणाली की नकल है जहाँ मेमोरी और कंप्यूटेशन अलग-अलग न होकर एक साथ घटित होते हैं। 
  • न्यूनतम ऊर्जा खपत : इसे संचालित करने के लिए पारंपरिक ऑक्साइड मेमरिस्टर की तुलना में दस लाख गुना कम करंट की आवश्यकता होती है, जिससे कुल ऊर्जा खपत में 70% तक की बचत होती है। 
  • औद्योगिक स्केलेबिलिटी : चूँकि यह हाफनियम ऑक्साइड से बना है (जो पहले से ही सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होता है), इसे वर्तमान चिप उत्पादन प्रणालियों में आसानी से अपनाया जा सकता है।
  • रेखीय प्लास्टिसिटी : न्यूरॉन्स की तरह, यह संकेतों की समय अवधि और तीव्रता के आधार पर कनेक्शन को मजबूत या कमजोर करने की क्षमता रखता है। 

भविष्य के संभावित अनुप्रयोग 

  • सशक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) : जटिल न्यूरल नेटवर्क को न्यूनतम ऊर्जा लागत पर संचालित करना संभव होगा। 
  • एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) : स्मार्टफोन और छोटे सेंसर जैसे उपकरणों पर क्लाउड की मदद के बिना ही भारी एआई प्रोसेसिंग की जा सकेगी। 
  • ब्रेन-ऑन-ए-चिप : ऐसे सिस्टम का विकास हो सकेगा जो मानव मस्तिष्क की तरह स्थानीय स्तर पर सीखने और पैटर्न पहचानने में सक्षम होंगे। 
  • उन्नत स्टोरेज : यह वर्तमान फ्लैश मेमोरी और Dynamic Random Access Memory (डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी) के मुकाबले कहीं अधिक तेज और सघन डेटा स्टोरेज का विकल्प पेश करेगा।
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