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मोर्चेला (Morchella) मशरूम

चर्चा में क्यों ? 

  • हाल ही में श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पहली बार नियंत्रित परिस्थितियों में मोर्चेला (Morel) मशरूम की सफल खेती करने में सफलता प्राप्त की है। यह खोज भविष्य में इस दुर्लभ मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन की नवीन संभावनाओं को जन्म दे सकती है।  

मोर्चेला (Morchella) मशरूम के बारे में  

  • मोर्चेला, जिसे आम भाषा में मोरल और स्थानीय स्तर पर गुच्छी या कांगच के नाम से जाना जाता है। 
  • यह एस्कोमाइकोटा (Ascomycota) समूह का एक खाद्य मशरूम है। साथ ही यह वानस्पतिक रूप से मोर्चेलेसी (Morchellaceae) परिवार से संबंधित है। 

प्राकृतिक आवास और विकास की प्रकृति 

  • यह मुख्य रूप से समशीतोष्ण (Temperate) क्षेत्रों के शंकुधारी वनों में पाया जाता है। भारत में यह मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊँचे पहाड़ी इलाकों तक सीमित है।  
  • यह प्राकृतिक रूप से सड़ी हुई लकड़ी, गिरी हुई पत्तियों या ह्यूमस युक्त मिट्टी पर गुच्छों में उगता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह प्रत्येक वर्ष एक ही स्थान पर नहीं उगता, जिससे इसका संग्रह (Collection) अत्यंत कठिन हो जाता है।   

विकास के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ 

  • गुच्छी मशरूम के सफल विकास के लिए विशिष्ट जलवायु की आवश्यकता होती है, जिसे अब प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से निर्मित किया गया है। 
  • इसके विकास के लिए दिन का तापमान 15°C से 20°C और रात का तापमान 5°C से 9°C के बीच होना अनिवार्य है। 
  • यह केवल सीमित वर्षा ऋतु के दौरान ही प्राकृतिक रूप से विकसित होता है। 

आर्थिक और पोषण संबंधी महत्व 

  • मोर्चेला को दुनिया के सबसे महंगे और मूल्यवान गौर्मे (Gourmet) मशरूमों में गिना जाता है। इसके महंगे होने के पीछे कई कारण हैं : 
    • इसमें उच्च पोषण मूल्य के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण औषधीय गुण पाए जाते हैं। 
    • इसका विशिष्ट और गहरा स्वाद इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंजनों (Cuisines) की पहली पसंद बनाता है। 
    • अब तक इसे केवल वनों से ही एकत्रित किया जाता था, जिसके कारण इसकी आपूर्ति सीमित और कीमतें अत्यधिक (हजारों रुपये प्रति किलो) रहती हैं। 

निष्कर्ष 

  • शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा नियंत्रित वातावरण में मोर्चेला की खेती की सफलता न केवल कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी जीत है, बल्कि यह किसानों की आय में भारी वृद्धि का भी एक सशक्त माध्यम बन सकती है। नियंत्रित उत्पादन से इसकी बाजार कीमतों में स्थिरता आएगी और इस हिमालयी सोने तक आम उपभोक्ताओं की पहुँच भी सुलभ हो सकेगी।
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