हाल ही में, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (National Productivity Council: NPC) ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के साथ एक समझौता किया है जिसके अंतर्गत उसे ‘पर्यावरण अंकेक्षण नामित अभिकरण’ (Environment Audit Designated Agency: EADA) के रूप में नामित किया गया है।
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) के बारे में
- राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की स्थापना 1958 में एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी।
- यह उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) के अधीन कार्यरत है जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का हिस्सा है।
- यह एक बहु-हितधारक (Multipartite) और गैर-लाभकारी संस्था है जिसमें सरकार, नियोक्ताओं एवं श्रमिक संगठनों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।
- इसके अतिरिक्त, तकनीकी एवं पेशेवर संस्थानों सहित अन्य वर्गों की भी भागीदारी इसमें शामिल है।
- इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
- यह टोक्यो आधारित एशियाई उत्पादकता संगठन (Asian Productivity Organization: APO) का एक घटक सदस्य है जिसमें भारत संस्थापक सदस्यों में से एक है।
- यह संस्था विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सहायता से परामर्श सेवाएँ, क्षमता निर्माण कार्यक्रम तथा परियोजना निगरानी इकाई (PMU) से जुड़ी सेवाएँ प्रदान करती है जिनका लाभ केंद्र व राज्य सरकारों सहित अनेक संगठनों को मिलता है।
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के उद्देश्य
- उत्पादकता से जुड़े सिद्धांतों और तकनीकों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना
- आर्थिक विकास की सूक्ष्म आधार संरचना को सुदृढ़ करना
- सरकार के लिए एक विचार मंच (थिंक टैंक) के रूप में भूमिका निभाना
- गुणवत्तापूर्ण परामर्श एवं प्रशिक्षण सेवाएँ प्रदान करना
- उत्पादकता उन्मुख दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के प्रमुख कार्य
- संस्थानों को उत्पादकता बढ़ाने हेतु परामर्श उपलब्ध कराना
- विभिन्न स्तरों के कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना
- सेमिनार, कार्यशाला एवं सम्मेलनों के माध्यम से जानकारी का प्रसार करना
- उत्पादकता संबंधी अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देना और डाटाबेस तैयार करना
- प्रकाशनों के जरिए उत्पादकता से संबंधित ज्ञान का प्रसार करना