भारत में मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS) और नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS-TIFR) के सहयोग से स्थापित रोहिणी नीलेकानी सेंटर फॉर ब्रेन एंड माइंड ने एक अनूठा डिजिटल भंडार CALM-Brain विकसित किया है। यह भारत में अपनी तरह का पहला प्लेटफ़ॉर्म है, जो विभिन्न मानसिक विकारों से जुड़े मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली से संबंधित व्यापक डेटा उपलब्ध कराता है।
ओपन-सोर्स डेटा से अनुसंधान को बढ़ावा
शोधकर्ताओं के अनुसार, भारतीय रोगियों के आंकड़ों पर आधारित यह डेटाबेस ओपन-सोर्स बनाया जाएगा, ताकि चिकित्सक और वैज्ञानिक इसे आसानी से उपयोग कर सकें।
इसका उद्देश्य न्यूरोसाइकियाट्रिक विकारों की उत्पत्ति, प्रगति और उनसे जुड़े जैविक परिवर्तनों को बेहतर तरीके से समझना है। वस्तुतः यह पहल भविष्य में अधिक सटीक निदान और व्यक्तिगत उपचार (personalized treatment) की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।
इसे भी जाने
CALM-Brain, विभिन्न मनोरोगों से संबंधित मस्तिष्क संरचना और कार्यप्रणाली पर डेटा का एक डिजिटल भंडार है। न्यूरोसाइकियाट्रिक विकारों का अध्ययन करने वाले चिकित्सक और शोधकर्ता इस बहुआयामी डेटासेट का उपयोग और विश्लेषण करके रोग की शुरुआत, प्रगति और रोग के लक्षणों को जन्म देने वाले अंतर्निहित जैविक परिवर्तनों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
पांच प्रमुख मानसिक विकारों पर फोकस
CALM-Brain में निम्नलिखित पांच मानसिक विकारों से संबंधित डेटा एकत्र किया गया है :
व्यसन (Addiction)
द्विध्रुवी विकार (Bipolar Disorder)
मनोभ्रंश (Dementia)
जुनूनी बाध्यकारी विकार (OCD)
सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia)
इस डेटासेट में क्लिनिकल, न्यूरो-इमेजिंग, व्यवहारिक और आनुवंशिक जानकारी शामिल है, जो शोध को अधिक गहराई प्रदान करती है।
स्टेम सेल और पारिवारिक अध्ययन की भूमिका
यह भंडार एक बायोरेपोसिटरी से भी जुड़ा है, जिसमें स्टेम कोशिकाओं का उपयोग कर मानसिक बीमारियों के जैविक आधार का अध्ययन किया जाता है।
यह पहल त्वरक कार्यक्रम (ADBS परियोजना) के अंतर्गत 2016 में शुरू हुई थी, जिसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग और प्रतीक्षा ट्रस्ट द्वारा वित्त पोषित किया गया है।
इस परियोजना में 900 परिवारों के 2,000 से अधिक प्रतिभागियों का डेटा शामिल है। खास बात यह है कि इन परिवारों में प्रभावित और अप्रभावित दोनों प्रकार के सदस्य शामिल हैं, जिससे वैज्ञानिकों को तुलनात्मक अध्ययन करने में मदद मिलती है।
बायोमार्कर की पहचान और भविष्य की संभावनाएँ
इस व्यापक डेटा के माध्यम से वैज्ञानिक न्यूरोकॉग्निटिव बायोमार्करों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे मानसिक विकारों का प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगाया जा सकेगा, जब उपचार अधिक प्रभावी होता है।
इसके अलावा, यह शोध लक्षित (targeted) और अधिक प्रभावी उपचार विकसित करने में भी सहायक हो सकता है।
निष्कर्ष
CALM-Brain न केवल भारत में मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी न्यूरोसाइंस के अध्ययन को नई दिशा दे सकता है। यह पहल भविष्य में मानसिक बीमारियों की बेहतर समझ, समय पर निदान और अधिक प्रभावी उपचार की संभावनाओं को मजबूत करती है।