संदर्भ
- हाल ही में, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों से तनावपूर्ण रहे द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए। भारत के प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत में रणनीतिक भरोसे की पुनर्स्थापना, आर्थिक सहयोग के विस्तार तथा ऊर्जा व सुरक्षा क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
- यह दौरा 2018 में जस्टिन ट्रूडो की भारत यात्रा के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली औपचारिक द्विपक्षीय यात्रा है। यह ऐसे समय में हुआ है जब 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े कूटनीतिक विवाद के कारण दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव आ गया था। बैठक के दौरान नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावपूर्ण हालात पर भी विचार-विमर्श किया। भारत ने इस मुद्दे पर शांति, स्थिरता व संवाद आधारित समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, हालांकि इस विषय पर कोई साझा बयान जारी नहीं किया गया।
यात्रा से जुड़े प्रमुख परिणाम
दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता
- भारत एवं कनाडा के बीच 1.9 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता किया गया है। इसके तहत वर्ष 2027 से 2035 के बीच लगभग 10,000 टन यूरेनियम भारत को उपलब्ध कराया जाएगा।
- कनाडा की कंपनी Cameco भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को यह यूरेनियम उपलब्ध कराएगी।
- यह व्यवस्था भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण को तेज करने में सहायक होगी। साथ ही, परमाणु ऊर्जा के माध्यम से स्थिर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
महत्त्व
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना
- नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाना
- जलवायु लक्ष्यों और नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में सहायता
- यह समझौता 2015–2020 के पूर्ववर्ती यूरेनियम समझौते की निरंतरता को दर्शाता है
व्यापक आर्थिक सादाझेरी समझौता (CEPA)
व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
CEPA वार्ता के लिए संदर्भ शर्तें (Terms of Reference) तय कर दिए गए हैं। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक भारत–कनाडा द्विपक्षीय व्यापार को 8.66 अरब डॉलर (2024–25) से बढ़ाकर लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुँचाना है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- स्वच्छ ऊर्जा
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
- कृषि मूल्य श्रृंखला
- उन्नत विनिर्माण
- प्रौद्योगिकी सहयोग
महत्त्व
- अमेरिका पर व्यापारिक निर्भरता को कम करना
- वैश्विक आर्थिक साझेदारियों में विविधता लाना
- रुकी हुई व्यापार वार्ताओं को फिर से गति देना
रणनीतिक ऊर्जा सहयोग
- भारत एवं कनाडा ने कई ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जिनमें शामिल हैं-
- यूरेनियम आपूर्ति
- नवीकरणीय ऊर्जा
- एल.पी.जी. क्षेत्र
- परमाणु प्रौद्योगिकी
- स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs)
- उन्नत परमाणु रिएक्टर तकनीक
- यह सहयोग दोनों देशों के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण एवं टिकाऊ ऊर्जा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
कनाडा ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) तथा ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस में शामिल होने की सहमति दी।
महत्त्व
- भारत की जलवायु कूटनीति को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी
- नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा
सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग
- दोनों देशों ने निम्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया-
- आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई
- हिंसक उग्रवाद से मुकाबला
- संगठित अपराध पर नियंत्रण
- खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान
- इसके अतिरिक्त, काउंटर टेररिज्म पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक आयोजित करने पर भी सहमति बनी।
मुख्य फोकस
- खालिस्तानी उग्रवाद से जुड़ी चिंताओं का समाधान
- विदेशी हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय दमन से निपटना
भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व
- महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों, ऊर्जा स्रोतों और उन्नत तकनीकों तक पहुँच बढ़ेगी।
- परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विस्तार के लिए स्थिर और भरोसेमंद यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा सहयोग से निम्न-कार्बन विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- G 7 के एक महत्वपूर्ण साझेदार के साथ संबंध मजबूत होंगे।
भारत–कनाडा संबंधों का परिप्रेक्ष्य
- भारत व कनाडा में 75 वर्षों से अधिक पुराने कूटनीतिक संबंध हैं। वर्ष 2018 में इन संबंधों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया था।
- कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 18 लाख से अधिक है जिनमें 4.25 लाख से अधिक भारतीय छात्र भी शामिल हैं। यह संख्या कनाडा की कुल आबादी का लगभग 4% है और वहाँ की अर्थव्यवस्था, संस्कृति एवं राजनीति पर उल्लेखनीय प्रभाव रखती है।
भारत के प्रमुख निर्यात (4.22 अरब डॉलर)
- दवाइयाँ और फार्मास्यूटिकल उत्पाद
- लोहा और इस्पात
- समुद्री खाद्य पदार्थ
- सूती परिधान
- इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ
- रसायन
भारत के प्रमुख आयात (4.44 अरब डॉलर)
- दालें
- मोती और अर्ध-कीमती पत्थर
- कोयला
- उर्वरक
- कागज
- कच्चा पेट्रोलियम
भारत–कनाडा संबंधों की प्रमुख चुनौतियाँ
विश्वास का संकट
- वर्ष 2023 के निज्जर हत्या विवाद के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया। कनाडाई एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस घटना में भारतीय राजनयिक अधिकारियों की भूमिका हो सकती है जबकि भारत ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया।
- इस विवाद के परिणामस्वरूप:
- राजनयिकों का निष्कासन हुआ
- व्यापार वार्ताएँ रोक दी गईं
- रणनीतिक अविश्वास बढ़ गया
- यह स्थिति अभी भी संबंधों में विश्वास बहाली के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
खालिस्तान से जुड़ा मुद्दा
भारत को कनाडा में अलगाववादी संगठनों की गतिविधियों को लेकर चिंता है। वहीं कनाडा की ओर से सीमा-पार दमन (Transnational Repression) के मुद्दे पर चिंता व्यक्त की जाती रही है।
व्यापारिक अवरोध
नियामकीय अंतर और नीतिगत मतभेदों के कारण CEPA वार्ता लंबे समय से अटकी हुई है।
क्रियान्वयन संबंधी जोखिम
पहले हुए यूरेनियम समझौतों से अपेक्षित परिणाम पूरी तरह प्राप्त नहीं हो पाए थे, इसलिए इस बार विश्वसनीय एवं स्थायी आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
आगे की दिशा
- संस्थागत संवाद को मजबूत करना: नियमित राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना तथा आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करना
- CEPA वार्ता को गति देना: नियामकीय बाधाओं को दूर कर समझौते को जल्द अंतिम रूप देना
- विश्वास बहाली के उपाय: पारदर्शी जांच तंत्र और खुफिया सहयोग को बढ़ाना
- ऊर्जा सहयोग का विस्तार: यूरेनियम आपूर्ति को स्थिर बनाना, SMR तकनीक का विकास और नवीकरणीय ऊर्जा में साझेदारी
- प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका: उग्रवाद से जुड़ी चिंताओं का समाधान करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं का सम्मान बनाए रखना
निष्कर्ष
- वर्ष 2026 में हुए भारत–कनाडा समझौते कई वर्षों से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बाद रणनीतिक विश्वास को पुनः स्थापित करने का एक सावधानीपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास हैं।
- ये समझौते आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को प्राथमिकता देने वाले व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। हालाँकि, निज्जर विवाद और सुरक्षा से जुड़ी परस्पर चिंताएँ अभी भी संबंधों के सामने चुनौती बनी हुई हैं। यद्यपि आगे चलकर निरंतर संवाद, सहयोगी संस्थागत ढाँचा और आपसी विश्वास ही इन संबंधों को स्थिर और मजबूत रणनीतिक साझेदारी में बदलने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।