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नवीन रेल परियोजनाएं

संदर्भ 

  • हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और लॉजिस्टिक क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से दो प्रमुख रेल परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। लगभग 24,815 करोड़ की कुल लागत वाली ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की जाएंगी, जो उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के 15 जिलों में रेल नेटवर्क का विस्तार करेंगी। 
  • ये परियोजनाएं न केवल आवागमन को सुगम बनाएंगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती कर भारत के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मील का पत्थर साबित होंगी। 

योजनाओं के संदर्भ में प्रमुख बिंदु  

1. गाजियाबाद – सीतापुर: तीसरी और चौथी रेलवे लाइन (403 किमी) 

यह परियोजना दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में इस मार्ग की क्षमता का 168% उपयोग हो रहा है, जिसे कम करने के लिए यह विस्तार अत्यंत आवश्यक है।  

  • अनुमानित लागत : 14,926 करोड़।
  • परियोजना के अंतर्गत शामिल जिले : गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर। 
  • औद्योगिक एवं धार्मिक लाभ : यह मार्ग मुरादाबाद (पीतल उद्योग), बरेली (फर्नीचर और वस्त्र) और शाहजहांपुर (सीमेंट) जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेगा। साथ ही, नैमिषारण्य और गढ़मुक्तेश्वर जैसे तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
  • नवाचार : भीड़भाड़ वाले स्टेशनों से बचने के लिए बाईपास बनाए गए हैं और 6 नए स्टेशन प्रस्तावित हैं। 

2. राजमुंदरी – विशाखापत्तनम: तीसरी और चौथी रेलवे लाइन (198 किमी) 

हावड़ा-चेन्नई मार्ग पर स्थित यह खंड दक्षिण भारत के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में से एक है। इसकी क्षमता का उपयोग 130 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। 

  • अनुमानित लागत : 9,889 करोड़।  
  • प्रमुख संपर्क : यह विशाखापत्तनम, गंगावरम और काकीनाडा जैसे प्रमुख बंदरगाहों को जोड़ेगा।
  • तकनीकी विशेषता : गोदावरी नदी पर 4.3 किमी लंबा रेल पुल और एक विशाल वायडक्ट का निर्माण किया जाएगा। नया मार्ग मौजूदा मार्ग से 8 किमी छोटा होगा। 
  • पर्यटन : अन्नवरम और अंतर्वेदी जैसे धार्मिक स्थलों के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा। 

परियोजनाओं के प्रमुख प्रभाव और लाभ 

इन परियोजनाओं को केवल रेलवे के विस्तार के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास के इंजन के रूप में देखा जा रहा है :

आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण 

  • रोजगार सृजन : दोनों परियोजनाओं से कुल 409 लाख मानव दिवस (274 लाख यूपी और 135 लाख आंध्र प्रदेश) के बराबर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 
  • आकांक्षी जिला विकास : विशाखापत्तनम जैसे आकांक्षी जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से वहां स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार होगा। 

पर्यावरण और लॉजिस्टिक लाभ 

रेलवे एक ऊर्जा कुशल साधन है, और इन नई लाइनों के शुरू होने से सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी :  

  • कार्बन उत्सर्जन में कमी : लगभग 180.31 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होगा, जो 7.33 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
  • लागत में बचत : सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष लगभग 4,000 करोड़ से अधिक की लॉजिस्टिक लागत बचेगी। 

माल ढुलाई में क्रांति 

  • ये गलियारे कोयला, अनाज, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसे आवश्यक सामानों के सुचारू परिवहन के लिए लाइफलाइन साबित होंगे। अनुमान है कि इनसे सालाना 64.76 मीट्रिक टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी। 

निष्कर्ष   

  • ये मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं नए भारत की उस दृष्टि को साकार करती हैं जहाँ निर्बाध कनेक्टिविटी, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलते हैं। वस्तुतः प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि विकास न केवल तेज हो, बल्कि एकीकृत और समावेशी भी हो।
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