New
Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 4th May 2026, 5:30PM Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 4th May 2026, 5:30PM

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) वार्षिक रिपोर्ट, 2025

संदर्भ  

  • हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025 की वार्षिक रिपोर्ट देश के श्रम बाजार में स्थिरता और क्रमिक सुधार का संकेत देती है। रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार, बेरोजगारी, आय और श्रम भागीदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। यद्यपि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से यह भी ज्ञात हुआ है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए वेतन वृद्धि अधिक है, लेकिन लैंगिक वेतन असमानता बनी हुई है। 

रिपोर्ट से संबंधित प्रमुख बिंदु 

श्रम बल सहभागिता और रोजगार की स्थिति  

  • रिपोर्ट के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए श्रम बल सहभागिता दर (LFPR) 2025 में 59.3% पर स्थिर रही, जो 2024 के स्तर के लगभग समान है। इसमें पुरुषों की भागीदारी 79.1% और महिलाओं की 40.0% दर्ज की गई। 
  • इसी तरह, कामगार जनसंख्या अनुपात (WPR) भी 57.4% पर स्थिर रहा। पुरुषों के लिए यह 76.6% और महिलाओं के लिए 38.8% रहा, जिससे संकेत मिलता है कि रोजगार के अवसरों में निरंतरता बनी हुई है। 

बेरोजगारी दर में गिरावट 

  • रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य स्थिति (PS+SS) के आधार पर बेरोजगारी दर 2025 में 3.1% रही। पुरुषों में यह 2024 के 3.3% से घटकर 3.1% हो गई, जबकि महिलाओं में यह दर स्थिर रही। 
  • शिक्षित वर्ग (माध्यमिक और उससे ऊपर) में बेरोजगारी दर 7.0% से घटकर 6.5% हो गई। वहीं शहरी महिलाओं की बेरोजगारी दर 6.7% से घटकर 6.4% हो गई।
  • युवाओं (15–29 वर्ष) में बेरोजगारी दर 10.3% से घटकर 9.9% हो गई। ग्रामीण युवाओं में यह 8.7% से 8.3% और शहरी युवाओं में 14.3% से 13.6% तक कम हुई। 

रोजगार संरचना में बदलाव 

  • रोजगार के स्वरूप में भी बदलाव दर्ज किया गया है। स्वरोजगार का हिस्सा 2023 के 58.2% से घटकर 2025 में 56.2% हो गया। इसके विपरीत, नियमित वेतनभोगी रोजगार में वृद्धि हुई है, जो 2024 के 22.4% से बढ़कर 2025 में 23.6% हो गया।
  • आकस्मिक श्रम का हिस्सा लगभग स्थिर (करीब 20%) बना रहा। यह दर्शाता है कि रोजगार अधिक संगठित और स्थिर स्वरूप की ओर बढ़ रहा है। 

क्षेत्रवार रोजगार रुझान 

  • रिपोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों के बीच श्रम वितरण में भी परिवर्तन देखने को मिला। कृषि क्षेत्र में रोजगार का हिस्सा 44.8% से घटकर 43.0% हो गया, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में यह 11.6% से बढ़कर 12.1% हो गया। 
  • सेवा क्षेत्र में भी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे विविध क्षेत्रों में संतुलन बना रही है। 

आय में सुधार, विशेषकर महिलाओं के लिए 

  • रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से 2025 के बीच महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
    • स्वरोजगार में महिलाओं की आय में 8.8% की वृद्धि 
    • नियमित वेतनभोगी रोजगार में 7.2% की वृद्धि 
    • आकस्मिक श्रम में 5.4% की वृद्धि  
  • पुरुषों की आय में भी वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन महिलाओं की तुलना में यह कुछ कम रही। इससे लैंगिक आय अंतर में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिलते हैं। 

कार्य के घंटे और सामाजिक पहलू 

  • रिपोर्ट बताती है कि शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार करने वाले पुरुष महिलाओं की तुलना में औसतन 17.5 घंटे अधिक काम करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर 12.3 घंटे है।
  • महिलाओं के श्रम बल में कम भागीदारी का मुख्य कारण घरेलू जिम्मेदारियाँ (44.4%) हैं, जबकि पुरुषों में पढ़ाई जारी रखना (69.8%) प्रमुख कारण है। 

शिक्षा और कौशल का स्तर 

  • 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए औपचारिक शिक्षा में बिताए गए औसत वर्ष 10.0 रहे। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है।
  • लगभग 67.8% लोगों के पास कम से कम माध्यमिक शिक्षा है। हालांकि, केवल 4.2% लोगों ने औपचारिक व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जो कौशल विकास की आवश्यकता को दर्शाता है। 

श्रम बाजार की व्यापक तस्वीर 

  • रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 61.6 करोड़ लोग कार्यरत थे, जिनमें 41.6 करोड़ पुरुष और 20.0 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। 
  • इसके अलावा, 15–24 आयु वर्ग के 21% और 15–29 आयु वर्ग के 25% युवा न तो रोजगार में हैं, न शिक्षा या प्रशिक्षण में जो एक महत्वपूर्ण नीति चुनौती को दर्शाता है। 

भारत में लिंग आधारित वेतन अंतर 

  • लिंग आधारित वेतन अंतर (Gender Wage Gap) उस अंतर को दर्शाता है जो पुरुषों और महिलाओं की कमाई में होता है, चाहे वे समान कार्य कर रहे हों या अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत हों। भारत में यह अंतर रोजगार के अवसरों, कौशल तक पहुँच और श्रम बाजार में भागीदारी में मौजूद संरचनात्मक असमानताओं को उजागर करता है। 

वेतन अंतर की स्थिति 

  • अधिकांश नौकरी श्रेणियों में महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम कमाती हैं। 
  • यह अंतर रोज़गार के प्रकार के अनुसार बदलता रहता है, जैसे नियमित वेतनभोगी नौकरी, आकस्मिक श्रम या स्वरोजगार। 
  • अनौपचारिक क्षेत्र में अधिक रोजगार और पेशा आधारित विभाजन इस असमानता को और बढ़ाते हैं। 

वेतन असमानता के मुख्य कारण 

  • महिलाओं की न्यूनतम श्रम बल भागीदारी। 
  • महिलाएं अक्सर कम वेतन वाली और अनौपचारिक नौकरियों में अधिक केंद्रित रहती हैं। 
  • शिक्षा, कौशल और पूंजी तक सीमित पहुँच। 
  • सामाजिक परंपराएँ और बिना वेतन वाले देखभाल कार्यों की जिम्मेदारियाँ। 

निष्कर्ष  

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025 की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भारत का श्रम बाजार स्थिरता के साथ धीरे-धीरे सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बेरोजगारी में कमी, नियमित रोजगार में वृद्धि और महिलाओं की आय में सुधार जैसे संकेत सकारात्मक हैं। हालांकि, महिलाओं की श्रम भागीदारी, कौशल विकास और युवाओं के रोजगार जैसे क्षेत्रों में अभी भी सुधार की पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR