हाल ही में, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) को अपने प्रोबा-3 मिशन के एक उपग्रह कोरोनाग्राफ से संपर्क खोने की समस्या का सामना करना पड़ा है। एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण अंतरिक्ष यान की विद्युत् आपूर्ति बाधित हो गई, जिसके परिणामस्वरूप यह उपग्रह साइलेंट सर्वाइवल मोड में चला गया। गौरतलब है कि कोरोनाग्राफ प्रोबा-3 मिशन के दो प्रमुख उपग्रहों में से एक है जो इस मिशन के वैज्ञानिक अवलोकनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रोबा-3 मिशन के बारे में
- प्रोबा-3 एक अत्याधुनिक अंतरिक्ष मिशन है जिसे दुनिया का पहला उच्च-सटीकता वाला फॉर्मेशन-फ्लाइंग मिशन माना जाता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य सूर्य के बाहरी वायुमंडल का पहले से कहीं अधिक स्पष्ट एवं विस्तृत अध्ययन करना है।
- यह मिशन दिसंबर 2024 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा इसरो के PSLV-C59 प्रक्षेपण यान की सहायता से अंतरिक्ष में भेजा गया था।
- इस परियोजना का प्रमुख लक्ष्य अंतरिक्ष में कृत्रिम सूर्य ग्रहण की स्थिति उत्पन्न करना है जिससे सूर्य के बाहरी भाग कोरोना का गहन अवलोकन किया जा सके। सामान्यतः सूर्य की तीव्र चमक के कारण इस क्षेत्र का अध्ययन करना कठिन होता है।
मिशन की प्रमुख विशेषताएँ
द्वि-उपग्रह संरचना
- प्रोबा-3 मिशन दो स्वतंत्र किंतु समन्वित उपग्रहों पर आधारित है।
- कोरोनाग्राफ– इसमें वैज्ञानिक कैमरा और अवलोकन उपकरण लगाए गए हैं।
- ऑकल्टर– यह एक डिस्क के रूप में कार्य करता है जो सूर्य की तीव्र रोशनी को अवरुद्ध करता है।
- दोनों उपग्रह मिलकर सूर्य के अध्ययन के लिए एक संयुक्त प्रणाली का निर्माण करते हैं।
सटीक फॉर्मेशन-फ्लाइंग तकनीक
इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि दोनों उपग्रहों को लगभग 150 मीटर की दूरी पर एक-दूसरे के साथ बनाए रखना होता है। यह दूरी मिलीमीटर स्तर की सटीकता के साथ नियंत्रित की जाती है जिससे वे एक विशाल वर्चुअल वैज्ञानिक उपकरण के रूप में कार्य कर सकें।
अंतरिक्ष में कृत्रिम सूर्य ग्रहण
ऑकल्टर उपग्रह सूर्य की चमकीली सतह को ढक देता है और उसकी छाया कोरोनाग्राफ के कैमरे पर पड़ती है। इस प्रक्रिया से अंतरिक्ष में पूर्ण सूर्य ग्रहण जैसी स्थिति बनती है जिससे सूर्य के कोरोना का अध्ययन करना संभव हो जाता है।
स्वायत्त संचालन प्रणाली
दोनों उपग्रहों को लगातार पृथ्वी से निर्देश देने की आवश्यकता नहीं होती है। वे लेज़र आधारित सेंसर, कैमरा सिस्टम एवं कोल्ड-गैस थ्रस्टर की मदद से अपनी स्थिति स्वयं नियंत्रित कर सकते हैं और आपसी दूरी बनाए रखते हैं।
निरंतर डेटा संग्रह की क्षमता
तकनीकी समस्या आने से पहले यह मिशन 60 से अधिक कक्षाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका था और कई घंटों तक लगातार सौर डेटा एकत्र कर चुका था। यह विशेषता महत्वपूर्ण है क्योंकि पृथ्वी से दिखाई देने वाले प्राकृतिक सूर्य ग्रहण बहुत कम समय के लिए ही होते हैं।
मिशन का महत्व
- सूर्य के कोरोना का अध्ययन वैज्ञानिकों को सौर पवन और कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) जैसी घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है।
- ये सौर घटनाएँ पृथ्वी के तकनीकी तंत्र, जैसे- संचार उपग्रह, जी.पी.एस. नेटवर्क और बिजली वितरण प्रणालियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इनका अध्ययन अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यदि प्रोबा-3 मिशन अपनी तकनीकी क्षमताओं को सफलतापूर्वक सिद्ध करता है तो इससे भविष्य में फॉर्मेशन-फ्लाइंग आधारित विशाल अंतरिक्ष दूरबीनों के निर्माण का मार्ग खुलेगा। ऐसी दूरबीनों को अलग-अलग हिस्सों में लॉन्च करके अंतरिक्ष में एक साथ कार्य करने के लिए संयोजित किया जा सकेगा, जो पारंपरिक एकल-उपग्रह प्रणाली से संभव नहीं है।