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ईस्टर द्वीप की प्राचीन रोंगोरोंगो लिपि

एक नए अध्ययन के अनुसार, ईस्टर द्वीप की प्राचीन रोंगोरोन्गो लिपि संभवतः स्वतंत्र रूप से विकसित हुई थी और यह यूरोपियों के आने से भी पहले की हो सकती है।

ईस्टर द्वीप के बारे में

  • यह पूर्वी प्रशांत महासागर में स्थित चिली का एक द्वीप है।
  • इसे स्थानीय लोग रापा नुई कहते हैं और यह दुनिया के सबसे अलग-थलग बसे द्वीपों में से एक है।
  • 1722 में डच खोजकर्ता जैकब रोगेवीन ने इसे ईस्टर संडे के दिन खोजा, इसलिए इसका नाम “ईस्टर आइलैंड” पड़ा।
  • यहाँ उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है।
  • द्वीप पर तीन निष्क्रिय ज्वालामुखी हैं- टेरेवाका, पोइके और रानो काउ।
  • यहाँ कोई स्थायी नदी नहीं है, लेकिन तीन क्रेटर झीलें हैं-रानो अरोई, रानो राराकू और रानो काउ।
  • यह अपने प्रसिद्ध मोआई मूर्तियों के लिए जाना जाता है।
  • यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है।

मोआई मूर्तियाँ क्या हैं ?

  • ये रापा नुई लोगों द्वारा बनाई गई विशाल पत्थर की मूर्तियाँ हैं।
  • इनका आकार बड़े मानव सिर जैसा होता है और इन्हें पत्थर के मंच पर खड़ा किया जाता है।
  • कुछ मूर्तियों पर लाल पत्थर से बनी टोपी जैसी संरचना (पुकाओ) होती है।
  • माना जाता है कि ये 13वीं से 16वीं सदी के बीच बनाई गई थीं और पूर्वजों का प्रतीक हैं।

रोंगोरोन्गो क्या है ?

  • यह एक प्राचीन लिपि है, जिसमें लकड़ी की तख्तियों पर चिन्ह उकेरे गए हैं।
  • अभी तक इस लिपि को पूरी तरह पढ़ा या समझा नहीं जा सका है।
  • इसे पहली बार 1864 में यूरोपियों ने देखा था।
  • इसकी शैली यूरोपीय लेखन से अलग है, इसलिए माना जाता है कि यह स्थानीय रूप से विकसित हुई हो सकती है।

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