संदर्भ
- हाल ही में खगोलविदों ने सूर्य के वायुमंडल में तैरने वाले विशालकाय सौर तंतुओं (Solar Filaments) के छिपे हुए भौतिक गुणों को समझने की एक नई और प्रभावी विधि विकसित की है। आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन ने सौर चुंबकीय संरचना और अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) की भविष्यवाणी की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है।
क्या हैं सौर तंतु और क्यों है इनका अध्ययन ज़रूरी ?
- सौर तंतु सूर्य के वायुमंडल (कोरोना) में निलंबित ठंडे प्लाज्मा के विशाल बादल होते हैं, जो शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा स्थिर रहते हैं।
- इन चुंबकीय क्षेत्रों की शक्ति और आकार को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यही सौर विस्फोटों के जनक होते हैं। ये विस्फोट पृथ्वी पर उपग्रहों, जीपीएस (GPS) और बिजली ग्रिडों को बाधित करने की क्षमता रखते हैं।
प्रोमिनेंस सीस्मोलॉजी
- चूंकि चुंबकीय क्षेत्रों को सीधे मापना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए वैज्ञानिक प्रोमिनेंस सीस्मोलॉजी का उपयोग करते हैं। यह तकनीक ठीक वैसी ही है जैसे भूकंपीय तरंगों के जरिए पृथ्वी के आंतरिक हिस्से का अध्ययन किया जाता है। शोधकर्ताओं ने उन दुर्लभ क्षणों का विश्लेषण किया जब सौर तंतुओं में एक साथ दो तरह के दोलन (Oscillations) देखे गए:
- देशांतरीय (Longitudinal) दोलन
- अनुप्रस्थ (Transverse) दोलन
बेयसियन विश्लेषण और शोध के मुख्य निष्कर्ष
उपासना बावेजा और वैभव पंत के नेतृत्व वाली टीम ने बेयसियन विश्लेषण (Advanced Statistical Method) का उपयोग करके अवलोकन डेटा और सैद्धांतिक मॉडलों का मिलान किया। इस शोध से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए:
- चुंबकीय क्षेत्र का सटीक अनुमान : प्लाज्मा घनत्व की सीमित जानकारी के बावजूद, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का सटीक अनुमान लगाना संभव हो पाया।
- विशाल चुंबकीय नलिकाएं : शोध में पाया गया कि तंतुओं को सहारा देने वाली चुंबकीय प्रवाह नलिकाएं (Flux Tubes) 100 से 1000 मेगामीटर तक लंबी हो सकती हैं।
- चुंबकीय स्थिरता : इन रेखाओं में घुमाव (Twists) काफी कम (आमतौर पर तीन से कम) पाए गए, जो एक अपेक्षाकृत स्थिर चुंबकीय विन्यास की ओर इशारा करते हैं।
अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में सुधार
- एस्ट्रोफिज़िक्स पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन केवल सैद्धांतिक नहीं है। बल्कि यह सौर विस्फोटों के मॉडल को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इस तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक अब सौर वायुमंडल की चुंबकीय विशेषताओं को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे, जिससे पृथ्वी पर आने वाले सौर तूफानों की सटीक और समय रहते भविष्यवाणी करना संभव हो सकेगा।
प्रोमिनेंस सीस्मोलॉजी (Prominence Seismology) के बारे में
- प्रोमिनेंस सीस्मोलॉजी (Prominence Seismology) एक वैज्ञानिक तकनीक है जिसका उपयोग सौर भौतिकविदों (solar physicists) द्वारा सौर तंतुओं (solar filaments/prominences) की आंतरिक स्थितियों, जैसे कि घनत्व, तापमान और चुंबकीय क्षेत्र का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।
- यह तकनीक पृथ्वी पर भूकंपीय तरंगों (seismic waves) का उपयोग करके पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन करने (Seismology) के समान है।
प्रोमिनेंस सीस्मोलॉजी के संबंध में प्रमुख तथ्य
- मूल सिद्धांत : वैज्ञानिक सौर तंतुओं (सूर्य की सतह के ऊपर ठंडे प्लाज्मा के लूप) में होने वाले दोलनों (oscillations) या तरंगों का विश्लेषण करते हैं।
- प्रक्रिया : जब सौर तंतुओं में हलचल होती है, तो वे कंपन करते हैं। इन कंपन की आवृत्ति (frequency) और अवमंदन (damping - समय के साथ कंपन का कम होना) के आधार पर, शोधकर्ता प्रोमिनेंस के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत और अन्य भौतिक गुणों की गणना करते हैं।
- उपयोग : यह तकनीक कोरोनल सीस्मोलॉजी (Coronal Seismology) का ही एक हिस्सा है, जो सूर्य के वायुमंडल में प्लाज्मा संरचनाओं को समझने के लिए एमडीएच (MHD) (मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक) तरंगों का उपयोग करती है।
- नवीनतम अनुसंधान : भारत और स्पेन के वैज्ञानिकों ने हाल ही में सौर तंतुओं में एक साथ होने वाले अनुदैर्ध्य (longitudinal) और अनुप्रस्थ (transverse) दोलनों का अध्ययन करने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया है, जिससे तंतुओं के चुंबकीय क्षेत्र को अधिक सटीकता से मापने में मदद मिली है।