New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 8:00 AM

प्रियदर्शिनी मट्टू मामला: जन धारणा बनाम कानूनी सिद्धांत

संदर्भ  

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1996 के चर्चित प्रियदर्शिनी मट्टू मामले में संतोष कुमार सिंह की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाया है। अदालत ने टिप्पणी की कि सेंटेंसिंग रिव्यू बोर्ड (SRB) का निर्णय कानूनी मानकों के बजाय जनमत या सार्वजनिक धारणा से प्रेरित प्रतीत होता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया में अपराध की गंभीरता और पीड़ित पक्ष की अपूरणीय क्षति सर्वोपरि है, किंतु रिहाई जैसे प्रशासनिक निर्णय केवल स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर होने चाहिए।  

मामले का घटनाक्रम 

  • 1996 : दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या।
  • 1999 : साक्ष्यों के अभाव में संतोष कुमार सिंह निचली अदालत से बरी।
  • 2006 : उच्च न्यायालय ने बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए मृत्युदंड सुनाया।
  • 2010 : सर्वोच्च न्यायालय ने सजा को आजीवन कारावास में बदला।  
  • वर्तमान स्थिति : दोषी लगभग 30 वर्ष की सजा काट चुका है और उसकी रिहाई की अर्जी एसआरबी (SRB) द्वारा दो बार खारिज की जा चुकी है। 

भारत में समयपूर्व रिहाई का वैधानिक ढांचा 

समयपूर्व रिहाई का उद्देश्य अपराधी को सुधारने और पुनः समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर देना है। यह दंड के सुधारात्मक सिद्धांत (Reformative Theory) पर आधारित है।

1. संवैधानिक एवं वैधानिक आधार 

भारत में समयपूर्व रिहाई के अधिकार दो स्तरों पर विभाजित हैं :

  • संवैधानिक शक्तियाँ : अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति और अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को सजा कम करने या क्षमादान देने का विशेषाधिकार प्राप्त है। 
  • कानूनी प्रावधान : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 473, 474 और 475 राज्य सरकार को सजा कम करने की शक्ति प्रदान करती हैं। विशेषकर धारा 475 के तहत, मृत्युदंड की श्रेणी वाले मामलों में कम से कम 14 वर्ष का वास्तविक कारावास अनिवार्य है। 

2. सेंटेंसिंग रिव्यू बोर्ड (SRB) की कार्यप्रणाली 

  • एसआरबी एक उच्च-स्तरीय समिति है जिसमें मुख्य सचिव, जेल महानिदेशक और पुलिस आयुक्त जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। यह बोर्ड कैदी के आचरण का मूल्यांकन कर अपनी सिफारिशें सरकार को भेजता है। 

निर्णय के मुख्य मानक 

  • कारावास के दौरान अनुशासित व्यवहार।
  • पैरोल या फरलो की शर्तों का ईमानदारी से पालन।
  • भविष्य में अपराध न करने की मनोवैज्ञानिक संभावना।
  • अपराधी की आयु और सामाजिक पृष्ठभूमि। 

न्यायिक सक्रियता और ऐतिहासिक संदर्भ 

सर्वोच्च न्यायालय ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम वी. श्रीहरन मामले में स्पष्ट किया था कि रिमिशन (Remission) कार्यपालिका का पूर्णतः स्वेच्छाचारी अधिकार नहीं है; इसे तर्कसंगत और न्यायिक परामर्श के अनुरूप होना चाहिए। 

प्रमुख उदाहरण: 

  • मनु शर्मा (जेसिका लाल मामला) : 2020 में सुधार और अच्छे आचरण के आधार पर दो दशक बाद रिहा।
  • सुशील शर्मा (तंदूर कांड) : 2018 में 23 साल बाद रिहा। न्यायालय ने माना कि केवल अपराध की प्रकृति रिहाई को रोकने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती।
  • निश्चित अवधि की सजा : 2025 में सह-दोषी सुखदेव यादव की रिहाई ने यह स्थापित किया कि यदि अदालत ने बिना रिमिशन के एक निश्चित अवधि (जैसे 20 वर्ष) तय की है, तो वह अवधि पूरी होने पर SRB की अनुमति अनिवार्य नहीं है। 

निष्कर्ष: संस्थागत संकोच और न्यायपालिका की भूमिका 

  • मट्टू मामला यह उजागर करता है कि अक्सर हाई-प्रोफाइल मामलों में एसआरबी अत्यधिक सतर्क या रक्षात्मक रुख अपनाता है, जिससे योग्य कैदियों की रिहाई में देरी होती है। इससे कानूनी चक्रव्यूह बन जाता है जहाँ अंततः न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ता है। 
  • न्यायालय का रुख यह संदेश देता है कि रिमिशन की प्रक्रिया को संस्थागत डर या बाहरी दबाव से मुक्त होकर शुद्ध रूप से कानूनी और सुधारवादी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रशासनिक निर्णय कानून की विधिसम्मत प्रक्रिया का उल्लंघन न करें।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR