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ट्राइबएक्स (TribeX)

चर्चा में क्यों ? 

हाल ही में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय शिक्षा को डिजिटल रूप देने और भारत की समृद्ध पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने की एक अहम पहल के तहत ट्राइबएक्स का शुभारंभ किया है। 

ट्राइबएक्स (TribeX) पहल के बारे में 

  • जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और कौशल विकास के प्रति समर्पित यह अपनी तरह का पहला डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है।
  • एक व्यापक डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम के तौर पर तैयार, ट्राइबएक्स जनजातीय भाषाओं, कलाओं, शिल्प और पारंपरिक ज्ञान में मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स और यूजीसी-मान्यता प्राप्त पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम के जरिए सीखने के व्यवस्थित अवसर प्रदान करता है। 

प्लेटफार्म पर उपलब्ध सुविधाएँ: 

  • यह प्लेटफॉर्म दुनिया भर के सीखने वालों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों एवं उत्साही लोगों को जनजातीय ज्ञान के विशेषज्ञों तथा कुशल कारीगरों से सीधे सीखने व भारत की विविध जनजातीय परंपराओं की सही जानकारी हासिल करने का अवसर देता है। 

शिक्षा के अतिरिक्त:

  • ट्राइबएक्स शिक्षा के अतिरिक्त, जनजातीय भाषाओं, मौखिक परंपराओं, प्रदर्शन कलाओं, सांस्कृतिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए दर्ज करने, संरक्षित  करने और बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल भंडार के तौर पर भी काम करता है। 
  • यह प्लेटफॉर्म अभी चित्रकला, हस्तशिल्प, हथकरघा, कलाकृतियां और पारंपरिक वाद्ययंत्र सहित  जनजातीय कला के विभिन्न रूपों पर आधारित 20 मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध कराएगा, और इसे 100 से अधिक मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स तक बढ़ाने की योजना है। 

एक-वर्षीय हाइब्रिड डिप्लोमा कार्यक्रम:

  • भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय और वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच पीजी डिप्लोमा कोर्स के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। ट्राइबएक्स पांच यूजीसी-मान्यता प्राप्त एक-वर्षीय हाइब्रिड डिप्लोमा कार्यक्रम उपलब्ध कराएगा, जो इस प्रकार हैं:
    • जनजातीय भाषा: संथाली (ओल चिकी)
    • सतत जनजातीय संस्कृति पर आधारित आजीविका के तरीके
    • म्यूजियोलॉजी और जनजातीय संग्रहालय प्रबंधन
    • भारत की जनजातीय कला और शिल्प
    • जनजातीय वस्त्र (टेक्सटाइल) 
  • ये कार्यक्रम विशेषज्ञों के व्याख्यानों, इंटर्नशिप और शोध-प्रबंध लिखने की प्रक्रिया को मिलाकर जनजातीय परंपराओं की गहरी जानकारी देंगे, ताकि नौकरी के अवसर मिल सकें।

लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) और रिपॉज़िटरी मैनेजमेंट सिस्टम: 

  • इस प्लेटफॉर्म में एक मजबूत लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) और रिपॉज़िटरी मैनेजमेंट सिस्टम भी शामिल है, जो सीखने, ज्ञान के प्रबंधन और प्रगति पर नजर रखने के लिए एक सुरक्षित और आसान डिजिटल इकोसिस्टम प्रदान करेगा। 
  • हेरिटेज आर्काइव में 5,000 से अधिक (और भविष्य में बढ़ाकर 10,000 तक) मल्टीमीडिया रिसोर्स मौजूद हैं। इनमें पूरे भारत के जनजातीय त्योहारों, सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों और मौखिक परंपराओं को दर्शाने वाले ऑडियो, वीडियो और साहित्य शामिल हैं।

महत्त्व:

  • ट्राइबएक्स का शुभारंभ, जनजातीय सशक्तिकरण हेतु डिजिटल नवाचार का उपयोग करने की जनजातीय कार्य मंत्रालय की लगातार कोशिशों की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। 
  • जनजातीय ज्ञान को सीखने, उसका दस्तावेजीकरण करने और उसे संरक्षित करने से संबंधित एक वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर ट्राइबएक्स भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत के लिए एक ग्लोबल गेटवे बनने को तैयार है। 
  • वस्तुतः यह आने वाली पीढ़ियों को देश के जनजातीय समुदायों की अनमोल समझ से सीखने, उसका उत्सव मनाने और उसे आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
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