कावेरी नदी बेसिन के बारे में
- कावेरी नदी बेसिन दक्षिण भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र जल विज्ञान क्षेत्र है। इसे दक्षिण की गंगा के रूप में भी जाना जाता है।
भौगोलिक स्थिति और उद्गम
- उद्गम : कावेरी नदी कर्नाटक के कोडागु (Coorg) जिले में पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी पहाड़ियों में तलकावेरी से निकलती है।
- लंबाई : इसकी कुल लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है।
- विस्तार : इसका बेसिन लगभग 81,155 वर्ग किमी में फैला है, जो मुख्य रूप से तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में आता है:
- कर्नाटक : (लगभग 42%)
- तमिलनाडु : (लगभग 54%)
- केरल : (लगभग 3%)
- पुडुचेरी : (कराइकल क्षेत्र)
सहायक नदियाँ
- कावेरी बेसिन की सहायक नदियों को दो भागों में बांटा जा सकता है:
- बाएं तट की सहायक नदियाँ: हरंगी, हेमवती, अर्कवती और शिमशा।
- दाएं तट की सहायक नदियाँ: लक्ष्मण तीर्थ, काबिनी, भवानी, नोय्याल, अमरावती और सुवर्णवती।
प्रमुख बांध और झरने
- कृष्ण राज सागर (KRS) बांध : कर्नाटक में स्थित।
- मेट्टूर बांध : तमिलनाडु का प्रमुख बांध जो कावेरी के पानी को नियंत्रित करता है।
- शिवनासमुद्रम जलप्रपात : यह भारत के सबसे पुराने जलविद्युत केंद्रों में से एक के लिए प्रसिद्ध है।
कृषि और आर्थिक महत्व
- धान का कटोरा : तमिलनाडु का कावेरी डेल्टा क्षेत्र अपनी उपजाऊ मिट्टी के कारण दक्षिण भारत में चावल उत्पादन का प्रमुख केंद्र है।
- सिंचाई : यह बेसिन दक्षिण भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो लाखों किसानों को सिंचाई प्रदान करता है।
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