- केंद्रीय बजट 2026-27 में कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
- सरकार ने कैंसर से संबंधित 17 दवाओं और औषधियों पर मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty – BCD) से पूर्ण छूट देने का प्रस्ताव किया है।
- यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में लागत कम करने और जीवनरक्षक दवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- इस निर्णय को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि मूल सीमा शुल्क (BCD) क्या है और यह कैसे काम करता है।

मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty – BCD) क्या है ?
- मूल सीमा शुल्क (BCD) भारत में आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला प्रमुख सीमा शुल्क है।
- यह देश की आयात नीति और व्यापार नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण साधन है।
कानूनी आधार:
- BCD सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत लगाया जाता है।
- इसकी दरें सीमा शुल्क शुल्क अधिनियम, 1975 की पहली अनुसूची के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।
BCD का उद्देश्य:
मूल सीमा शुल्क के मुख्य उद्देश्य हैं:
- घरेलू उद्योगों की सुरक्षा:-आयातित वस्तुओं को महंगा बनाकर घरेलू उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना।
- व्यापार विनियमन:-सरकार आयात को नियंत्रित करने के लिए BCD की दरों में बदलाव कर सकती है।
- राजस्व अर्जन:-यह सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कर स्रोत है।
BCD की गणना कैसे होती है ?
BCD की गणना आयातित वस्तुओं के मूल्य के प्रतिशत के रूप में की जाती है। इसे निर्धारित करने के तीन मुख्य चरण होते हैं:
1. वस्तुओं का वर्गीकरण (Classification of Goods)
आयातित वस्तुओं को हार्मोनाइज्ड सिस्टम (HS) कोड के तहत वर्गीकृत किया जाता है। इसी कोड के आधार पर लागू शुल्क दर तय होती है।
2. मूल्य निर्धारण (Valuation of Goods)
माल का मूल्य CIF (Cost, Insurance, Freight) के आधार पर तय किया जाता है, अर्थात:
- वस्तु की कीमत
- बीमा लागत
- परिवहन लागत
3. शुल्क दर का अनुप्रयोग (Application of Duty Rate)
निर्धारित मूल्य पर लागू BCD दर लगाई जाती है, जिससे कुल देय शुल्क तय होता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: केंद्र सरकार के पास यह अधिकार है कि वह विशिष्ट वस्तुओं को BCD से छूट दे सकती है - जैसा कि कैंसर की 17 दवाओं के मामले में किया गया है।
अन्य प्रकार के सीमा शुल्क (Other Types of Customs Duties)
मूल सीमा शुल्क के अलावा भारत में कई अन्य प्रकार के सीमा शुल्क भी लगाए जाते हैं:
1. अतिरिक्त सीमा शुल्क (Additional Customs Duty / Special Countervailing Duty)
- यह शुल्क उन देशों के खिलाफ लगाया जाता है जो अपने निर्यातकों को सब्सिडी देते हैं। इसका उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।
2. प्रतिपूरक शुल्क (Countervailing Duty – CVD)
- यह शुल्क विदेशी सरकारों द्वारा दी गई सब्सिडी का प्रतिकार करने के लिए लगाया जाता है।
- यदि कोई देश अपने उत्पादकों को सब्सिडी देता है और वे कम कीमत पर भारत में माल बेचते हैं, तो CVD लगाकर उस अनुचित लाभ को निष्प्रभावी किया जाता है।
3. विशेष अतिरिक्त शुल्क (Special Additional Duty – SAD)
- यह शुल्क केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत लगाया जाता है।
- यह BCD + CVD के कुल मूल्य पर लगाया जाता है।
- इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को सस्ते आयात से बचाना है।
4. डंपिंग-रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty)
- जब कोई देश अपने उत्पादों को अपने घरेलू बाजार से भी कम कीमत पर भारत में बेचता है, तो उसे डंपिंग कहा जाता है।
- इससे भारतीय उद्योगों को नुकसान होता है, इसलिए सरकार एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाती है।
5. सुरक्षात्मक शुल्क (Protective Duty)
- यह शुल्क स्थानीय उद्योगों को सस्ते आयात से बचाने के लिए लगाया जाता है। आयात महंगा होने से उपभोक्ता स्थानीय उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित होते हैं।
6. सुरक्षा शुल्क (Safeguard Duty)
- यह सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम की धारा 8B के तहत लगाया जाता है।
- यह अस्थायी उपाय होता है।
- इसका उद्देश्य अचानक बढ़े हुए आयात से घरेलू उद्योगों को बचाना है ताकि वे प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
7. राष्ट्रीय आपदा दलीय कर्तव्य (National Calamity Contingent Duty – NCCD)
- यह शुल्क प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान संसाधन जुटाने के लिए लगाया जाता है।
- इसकी दर वस्तु के अनुसार अलग-अलग होती है।