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फेरुजिनस पोचार्ड (Ferruginous Pochard) वितरण, प्रवास, संरक्षण स्थिति

  • हाल ही में चेन्नई के अमूर झील में कॉमन पोचार्ड के झुंड के बीच एक दुर्लभ फेरुजिनस पोचार्ड देखा गया। 
  • यह पक्षी भारत में कम संख्या में दिखाई देता है, इसलिए इसका अवलोकन पक्षी-प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

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फेरुजिनस पोचार्ड (Ferruginous Pochard)

वैज्ञानिक नाम: Aythya nyroca) एक मध्यम आकार की गोताखोर बत्तख है। इसे निम्न नामों से भी जाना जाता है:

  • फेरुजिनस डक
  • कॉमन व्हाइट-आई
  • व्हाइट-आइड पोचार्ड

इसकी पहचान विशेष रूप से नर पक्षी की चमकीली सफेद आंख और गहरे लाल-भूरे (चेस्टनट) रंग के शरीर से होती है।

शारीरिक विशेषताएँ:-यह एक उत्कृष्ट डाइविंग (गोताखोर) बत्तख है, जो भोजन के लिए पानी में गोता लगाती है।

पर्यावास (Habitat)

यह उथले मीठे जल निकायों को पसंद करती है, जैसे:

  • झीलें
  • तालाब
  • दलदली क्षेत्र
  • जलाशय

इन स्थानों पर:

  • प्रचुर मात्रा में जलमग्न व तैरती वनस्पति
  • किनारों पर घनी उभरती वनस्पति

ऐसा वातावरण इसे भोजन, प्रजनन और सुरक्षा प्रदान करता है।

वितरण (Distribution)

फेरुजिनस पोचार्ड का वितरण मुख्यतः:

  • यूरोप
  • एशिया
  • उत्तरी अफ्रीका

विशेष रूप से चीन, मंगोलिया, पुर्तगाल, फ्रांस, अल्बानिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम और बोस्निया में पाया जाता है।

प्रवास (Migration)

  • सर्दियों में: भूमध्यसागरीय बेसिन और काला सागर क्षेत्र
  • कुछ झुंड: नील घाटी के रास्ते उप-सहारा अफ्रीका

भारत में यह प्रवासी रूप में सीमित संख्या में देखा जाता है।

आहार (Diet):-यह सर्वाहारी प्रवृत्ति की बत्तख है।

खतरे (Threats)

फेरुजिनस पोचार्ड मानवजनित कारणों से गंभीर खतरे का सामना कर रही है:

  • बांध निर्माण
  • जल निकासी
  • प्रदूषण
  • आर्द्रभूमि का अतिक्रमण
  • जल प्रबंधन में कुप्रबंधन

आर्द्रभूमियों के विनाश से इनके प्रजनन स्थल तेजी से घट रहे हैं।

संरक्षण स्थिति (Conservation Status)

  • IUCN रेड लिस्ट: Near Threatened (संकट के निकट)
    International Union for Conservation of Nature द्वारा सूचीबद्ध
  • इसका अर्थ है कि यदि वर्तमान खतरों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह भविष्य में संकटग्रस्त (Vulnerable) श्रेणी में जा सकती है।

भारत के संदर्भ में महत्व

भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए:

  • रामसर साइट्स का संरक्षण
  • शहरी झीलों का पुनर्जीवन
  • जल प्रदूषण नियंत्रण
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी

जैसे कदम इस प्रजाति सहित अन्य प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

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