संदर्भ
- भारतीय वैज्ञानिकों ने भविष्य की तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के शोधकर्ताओं ने यह खोज की है कि कैसे छोटे कार्बनिक अणुओं को नियंत्रित कर उन्नत स्मार्ट सामग्रियां बनाई जा सकती हैं। यह शोध भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बायो-इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस के निर्माण में क्रांतिकारी साबित हो सकता है।
क्या है यह नई खोज ?
- डॉ. गौतम घोष के नेतृत्व में शोध टीम ने नेफथलीन डाइमाइड (NDI) नामक एक विशेष अणु का अध्ययन किया। यह एक उभयपरक (Amphiphilic) अणु है, जिसमें पानी के भीतर खुद को व्यवस्थित करने की अनूठी क्षमता होती है। इस प्रक्रिया को सुपरमॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली कहा जाता है।
- अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि इन अणुओं की संरचना को केवल तापमान के माध्यम से बदला जा सकता है, जिससे उनके भौतिक और विद्युत गुण पूरी तरह बदल जाते हैं।

इसे भी जाने
- नेफ़थलीन डायमाइड (Naphthalene diimide - NDI) एक कार्बनिक यौगिक है जो 1,4,5,8-नेफ़थलीनटेट्राकार्बोक्जिलिक डायनहाइड्राइड से प्राप्त होता है। यह अपनी अद्वितीय इलेक्ट्रॉन-कमी (electron-deficient) संरचना के कारण सामग्री विज्ञान, विशेषकर कार्बनिक सेमीकंडक्टर और सुपरमोल्युलर रसायन विज्ञान में रुचि का केंद्र है।
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संरचनात्मक परिवर्तन और प्रकाशीय गुण
अनुसंधान के मुख्य बिंदु
- नैनोडिस्क (कमरे के तापमान पर) : कमरे के तापमान पर ये अणु स्वतः ही छोटी गोलाकार संरचनाएं बनाते हैं, जिन्हें नैनोडिस्क कहा जाता है। इन नैनोडिस्क में विशेष काइरोप्टिकल गतिविधि (ध्रुवीकृत प्रकाश के साथ क्रिया करने की क्षमता) पाई गई।
- नैनोशीट (गर्म करने पर) : जैसे ही तापमान बढ़ाया जाता है, ये नैनोडिस्क अपनी संरचना बदलकर दो-आयामी (2D) नैनोशीट में परिवर्तित हो जाते हैं। इस बदलाव के साथ ही इनकी काइरोऑप्टिकल सक्रियता समाप्त हो जाती है।
विद्युत चालकता में बड़ा अंतर
- इस शोध की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि संरचना बदलने से पदार्थ की विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) पर गहरा प्रभाव पड़ा। वैज्ञानिकों ने देखा कि:
- नैनोडिस्क अवस्था में विद्युत चालकता काफी अधिक थी।
- नैनोशीट में परिवर्तित होते ही यह चालकता सात गुना तक कम हो गई।
- इसका अर्थ है कि हम केवल तापमान को नियंत्रित करके किसी पदार्थ के विद्युत व्यवहार को अपनी जरूरत के अनुसार सटीक रूप से ट्यून या समायोजित कर सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
डॉ. घोष और उनकी टीम (पीएचडी छात्र सौरव मोयरा और सहयोगी तारक नाथ दास) के अनुसार, आणविक संयोजन को नियंत्रित करने की यह सरल विधि निम्नलिखित क्षेत्रों में नए रास्ते खोलेगी:
- स्मार्ट सेंसर : जो पर्यावरणीय बदलावों के प्रति संवेदनशील हों।
- अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स: जहाँ एक ही चिप पर अलग-अलग कार्यों के लिए संरचना बदली जा सके।
- जैव-चिकित्सा उपकरण: शरीर के भीतर काम करने वाले अनुकूलनीय इंटरफेस।
निष्कर्ष
- छोटे कार्बनिक अणुओं में इस प्रकार की अनुकूलन क्षमता अत्यंत दुर्लभ है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत संस्थानों द्वारा किया गया यह शोध नैनो-इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक शक्तिशाली मार्ग प्रशस्त करता है।