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हैदराबाद के चार कमान का होगा जीर्णोद्धार: जानिए इतिहास, महत्व और पुनर्स्थापन योजना

प्रारंभिक परीक्षा

GS Paper-I :  इतिहास , कला एवं संस्कृति (Art & Culture)

मुख्य परीक्षा  

GS Paper -I : भारतीय संस्कृति के अंतर्गत प्राचीन से आधुनिक काल तक की कला-शैलियों, साहित्य एवं वास्तुकला के प्रमुख पहलुओं का अध्ययन।

 चर्चा में क्यों ?

तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद के ऐतिहासिक चार कमान (Char Kaman) के जीर्णोद्धार (Restoration) की घोषणा की है। सरकार ने इस परियोजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है और जल्द ही टेंडर जारी कर विशेषज्ञ सलाहकार की नियुक्ति की जाएगी। इसका उद्देश्य इन ऐतिहासिक द्वारों की संरचना को सुरक्षित रखते हुए उनकी मूल वास्तुकला को संरक्षित करना है।

चार कमान क्या है ?

  • चार कमान हैदराबाद के प्रसिद्ध चारमीनार के आसपास स्थित चार भव्य सजावटी प्रवेश द्वारों का समूह है। इनका निर्माण कुतुबशाही काल में पुराने हैदराबाद शहर के प्रवेश द्वारों के रूप में किया गया था।
  • चारमीनार के उत्तर में स्थित कुतुबशाही महल परिसर के प्रवेश पर एक विशाल चौक और उद्यान बनाया गया था, जिसे चार कमान कहा जाता था। इसके मध्य में गुलजार हौज़ (Char-Su-Ka-Houz) नामक एक सुंदर जल फव्वारा स्थित था।

चार कमान के चार द्वार

  • चारों द्वार गुलजार हौज़ के चारों दिशाओं में स्थित हैं-
    • उत्तर: मछली कमान (Machli Kaman)
    • दक्षिण: चारमीनार कमान (Charminar Kaman)
    • पूर्व: काली कमान (Kali Kaman)
    • पश्चिम: शेर-ए-बातिल कमान (Sher-e-Batil ki Kaman)
  • प्रत्येक कमान के दोनों ओर तीन-तीन मंजिलें बनाई गई थीं, जिनका उपयोग शाही सैनिकों और सुरक्षा कर्मियों के कक्षों के रूप में किया जाता था।

चार कमान का इतिहास

  • चारमीनार का निर्माण कुतुबशाही वंश के पाँचवें शासक मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने वर्ष 1589–1591 के बीच कराया था।
  • इतिहासकारों के अनुसार चार कमान का निर्माण लगभग 1594 में चारमीनार के निर्माण के कुछ वर्ष बाद कराया गया।
  • इसका उद्देश्य शाही महल परिसर के प्रवेश को भव्य बनाना तथा प्रशासनिक गतिविधियों के लिए एक विशाल सार्वजनिक चौक तैयार करना था।

चार कमान के मूल नाम

  • निर्माण के समय इन द्वारों के नाम आज के नामों से अलग थे।

दिशा

मूल नाम

अर्थ

पश्चिम

दौलत खाना-ए-अली

शाही महल का प्रवेश द्वार

पूर्व

नक्कार खाना

शाही नगाड़ों का द्वार

मध्य क्षेत्र

जिलाऊ खाना

शाही प्रांगण (Royal Vestibule)

वर्तमान नाम कैसे पड़े ?

  • समय के साथ इन द्वारों के नाम बदल गए और आज इन्हें निम्न नामों से जाना जाता है-
  • मछली कमान (उत्तर): यहाँ चंद्र नववर्ष के अवसर पर बाँस और कागज़ से बनी विशाल मछली लटकाई जाती थी।
  • चारमीनार कमान (दक्षिण): चारमीनार की ओर स्थित होने के कारण यह नाम पड़ा।
  • काली कमान (पूर्व): इसे शंभू प्रसाद की कमान भी कहा जाता है।
  • शेर-ए-बातिल कमान (पश्चिम): इसका अर्थ "शेरदिलों का द्वार" या "बुराई का नाश करने वाला द्वार" माना जाता है।

चार कमान का ऐतिहासिक महत्व

  • कुतुबशाही शासनकाल में चार कमान केवल प्रवेश द्वार नहीं थे, बल्कि प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी थे।
  • शाही अधिकारियों और अमीरों का यहाँ प्रतिदिन आगमन होता था।
  • चारों द्वारों के मध्य स्थित शाही प्रांगण में अधिकारी अपने सहायकों को छोड़कर अकेले राजा से मिलने जाते थे।
  • यह क्षेत्र शाही महल परिसर का मुख्य प्रवेश क्षेत्र था।

पुनर्स्थापन (Restoration) योजना में क्या होगा ?

  • सरकार द्वारा प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत-
  • ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत की जाएगी।
  • क्षतिग्रस्त हिस्सों का संरक्षण किया जाएगा।
  • मूल वास्तुकला और विरासत विशेषताओं को सुरक्षित रखा जाएगा।
  • प्रदूषण एवं शहरीकरण से हुए नुकसान की भरपाई का प्रयास किया जाएगा।

चार कमान का महत्व

  • कुतुबशाही वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण।
  • चारमीनार परिसर की ऐतिहासिक पहचान।
  • हैदराबाद की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा।
  • भारत की मध्यकालीन शहरी योजना और स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना।
  • पर्यटन एवं विरासत संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्मारक।

निष्कर्ष

चार कमान केवल चार प्रवेश द्वार नहीं हैं, बल्कि हैदराबाद के गौरवशाली इतिहास, कुतुबशाही स्थापत्य कला और शहरी नियोजन की अनमोल धरोहर हैं। तेलंगाना सरकार की पुनर्स्थापन योजना से इन ऐतिहासिक स्मारकों को संरक्षित करने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रश्न: हैदराबाद के ऐतिहासिक चार कमान (Char Kaman) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-

  1. चार कमान का निर्माण कुतुबशाही वंश के शासक मोहम्मद कुली कुतुब शाह के काल में किया गया था।

  2. चार कमान चारमीनार के चारों ओर स्थित चार सजावटी प्रवेश द्वारों का समूह है।

  3. चारों कमानों के मध्य स्थित गुलजार हौज़ (Char-Su-Ka-Houz) ऐतिहासिक जल फव्वारा है।

  4. चार कमान का निर्माण निजाम शासन के दौरान किया गया था।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. केवल 1, 2 और 3

  2. केवल 2 और 4

  3. केवल 1 और 4

  4. 1, 2, 3 और 4

मुख्य परीक्षा प्रश्न

"चार कमान (Char Kaman) हैदराबाद की कुतुबशाही स्थापत्य कला एवं मध्यकालीन शहरी नियोजन का महत्वपूर्ण उदाहरण है।" इस कथन के संदर्भ में चार कमान के ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य विशेषताओं तथा इसके संरक्षण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

FAQs (Frequently Asked Questions)

1. चार कमान (Char Kaman) क्या है ?

उत्तर: चार कमान हैदराबाद के चारमीनार के आसपास स्थित चार ऐतिहासिक सजावटी प्रवेश द्वारों का समूह है, जिनका निर्माण कुतुबशाही काल में किया गया था।

2. चार कमान का निर्माण किसने कराया था?

उत्तर: चार कमान का निर्माण कुतुबशाही वंश के पाँचवें शासक मोहम्मद कुली कुतुब शाह के शासनकाल में लगभग 1594 ई. में कराया गया था।

3. चार कमान के चार द्वार कौन-कौन से हैं?

उत्तर : चार कमान के चार द्वार हैं-

  • मछली कमान (Machli Kaman)
  • चारमीनार कमान (Charminar Kaman)
  • काली कमान (Kali Kaman)
  • शेर-ए-बातिल कमान (Sher-e-Batil Kaman)

4. चार कमान का ऐतिहासिक महत्व क्या है ?

उत्तर : चार कमान कुतुबशाही स्थापत्य कला, मध्यकालीन शहरी नियोजन तथा हैदराबाद के शाही महल परिसर के प्रमुख प्रवेश द्वारों का प्रतिनिधित्व करता है। यह प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र था।

5. चार कमान के पुनर्स्थापन (Restoration) का उद्देश्य क्या है ?

उत्तर: पुनर्स्थापन का उद्देश्य इन ऐतिहासिक द्वारों की संरचनात्मक मरम्मत, मूल वास्तुकला का संरक्षण तथा शहरीकरण और प्रदूषण से हुए नुकसान की भरपाई करते हुए उनकी विरासत को सुरक्षित रखना है।

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