संदर्भ
- भारत दुनिया की सबसे समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प परंपराओं में से एक है। यह क्षेत्र न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि समावेशी आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है।
- भारत में वर्तमान में अनुमानित 64.66 लाख हथकरघा और हस्तशिल्प कारीगर हैं। इस कार्यबल में महिलाओं की काफी भागीदारी है। अगस्त 2025 के आंकड़ों के अनुसार महिलाएं हथकरघा बुनकरों में 71 प्रतिशत और कुल कारीगरों का 64 प्रतिशत हैं। यह मजबूत भागीदारी विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों में रोजगार और सशक्तिकरण का समर्थन करने में इस क्षेत्र की भूमिका को दर्शाती है।
- वस्तुतः बड़ी संख्या में कारीगरों और बुनकरों के बल पर यह क्षेत्र भारत के उभरते बाजार में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जैसे-जैसे वाणिज्य तेजी से डिजिटल होता जा रहा है, ऑनलाइन पहुँच इन शिल्प समुदायों को बाजार में भागीदारी बढ़ाने में मदद कर रही है। डिजिटल इंडिया पहल के माध्यम से, पारंपरिक आजीविका तेजी से डिजिटल व्यापार के अवसरों तक पहुँच प्राप्त कर रही है।
इंडिया हैंडमेड के बारे में
- इंडिया हैंडमेड को 2023 में लॉन्च किया गया। वस्त्र मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित, यह प्लेटफॉर्म हस्तनिर्मित उत्पादों की मौजूदगी को बढ़ाता है और विक्रेताओं के लिए बाजार के व्यापक अवसर के द्वार खोलता है।
- इंडिया हैंडमेड एक समर्पित डिजिटल मार्केटप्लेस है जो भारत की हथकरघा और हस्तशिल्प परंपराओं को ऑनलाइन अर्थव्यवस्था में लाता है।
- यह मंच कारीगरों और बुनकरों को सीधे खरीदारों से जोड़ता है, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण का समर्थन करते हुए बाजार तक पहुँच का विस्तार करता है।
- यह जीआई-टैग और ओडीओपी वस्तुओं सहित विविध हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित करता है, जिससे क्षेत्रीय शिल्प उत्पादों की विभिन्न स्थानों पर मौजूदगी बढ़ती है।
इंडिया हैंडमेड प्लेटफॉर्म की मुख्य विशेषताएं:
इंडियाहैंडमेड विक्रेताओं, खरीदारों और शिल्प विरासत का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन की गई सुविधाओं के एक सेट के माध्यम से परंपराओं को ऑनलाइन बाजार में लाता है:
- विशेष ऑनलाइन मार्केटप्लेस: यह बुनकरों और कारीगरों को अपने हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को ऑनलाइन बेचने में सक्षम बनाता है।
- खरीदारों की सीधी पहुँच: कारीगर और बुनकर सीधे खरीदारों से जुड़े हुए हैं, जिससे बिचौलियों को कम करने और उचित मुआवजे का समर्थन करने में मदद मिलती है।
- अधिक मौजूदगी: यह प्लेटफ़ॉर्म उत्पादों को व्यापक ग्राहक आधार पर प्रदर्शित करता है, जिससे विक्रेताओं के लिए बाजार के अवसर बढ़ते हैं।
- डिजिटल सशक्तिकरण: कारीगरों और बुनकरों को ऑनलाइन व्यापार में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने के लिए डिजिटल उपकरण और मौजूदगी प्रदान की जाती है।
- वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण: व्यापक बाजार पहुँच आजीविका को मजबूत करती है और आय के अवसरों का समर्थन करती है।
- सांस्कृतिक संरक्षण: शिल्प-आधारित उत्पादों की एक विविध श्रृंखला भारत की हस्तनिर्मित विरासत को दृश्यमान रखती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पारंपरिक कौशल को संरक्षित करने में मदद करती है।
इंडिया हैंडमेड प्लेटफॉर्म सबसे अलग:
- यह प्लेटफॉर्म रोजमर्रा के हस्तनिर्मित उत्पादों और मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय शिल्प के लिए एक क्यूरेटेड डिजिटल स्पेस प्रदान करता है। यह परिधान, घर की सजावट, साज-सज्जा, पेंटिंग, फर्नीचर, धार्मिक वस्तुओं, स्टेशनरी, संगीत वाद्ययंत्र, आभूषण, बैग और जूते सहित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।
- यह जीआई-टैग और ओडीओपी उत्पादों जैसी विशेष उत्पाद श्रेणियों पर भी प्रकाश डालता है। यह मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय शिल्प को अधिक मौजूदगी और एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
विश्वास बनाना और विक्रेता की भागीदारी को आसान बनाना:
- बेहतर पहुँच और आश्वासन: खरीदारों को मुफ्त शिपिंग, खरीद सुरक्षा, सुरक्षित भुगतान और खरीदार समर्थन प्रणाली के माध्यम से अधिक विश्वसनीय खरीदारी अनुभव से लाभ होता है। यह प्रतिस्पर्धी कीमतों पर दस्तकारी उत्पादों की पेशकश करके विश्वास को भी मजबूत करता है।
- विक्रेताओं के लिए सरल ऑनबोर्डिंग: यह मंच कारीगरों, बुनकरों और उत्पादक संगठनों को बाज़ार तक पहुँचने के लिए एक निर्देशित ऑनबोर्डिंग मार्ग प्रदान करता है।
भारत की विरासत का डिजिटलीकरण
- इंडिया हैंडमेड डिजिटल इंडिया की भावना को दर्शाता है, शिल्प को आजीविका के स्रोत और भारत की सांस्कृतिक पहचान के प्रतिबिंब दोनों के रूप में मान्यता देता है।
- लगभग 60 लाख से अधिक कारीगरों को शामिल करने की योजना के साथ, यह मंच आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करता है। यह कारीगरों और बुनकरों को व्यापक बाजार पहुँच प्रदान करता है और खरीदारों को विश्वास और आसानी से हस्तनिर्मित उत्पादों की खोज करने में मदद करता है।