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इंडिया फार्मा सम्मेलन

संदर्भ 

  • भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र आज वैश्विक मंच पर एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से, औषधि विभाग और फिक्की (FICCI) द्वारा संयुक्त रूप से इंडिया फार्मा का 9वां संस्करण 13-14 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। 

इंडिया फार्मा की विकास यात्रा 

  • इंडिया फार्मा की परिकल्पना 2016 में सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में की गई थी। पिछले आठ वर्षों में, यह आयोजन केवल एक सम्मेलन मात्र न रहकर एक ऐसा वैश्विक मंच बन गया है जहाँ नीति निर्माता, नियामक, उद्योग जगत के दिग्गज और शिक्षाविद एक साथ आते हैं। 
  • 2016 के मेक इन इंडिया विजन से लेकर 2023 के नवाचार आधारित विकास तक, इस मंच ने भारत की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाया है। जहाँ पिछले आयोजनों ने सुलभता, जवाबदेही और आत्मनिर्भरता की नींव रखी, वहीं आगामी 9वां आयोजन भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने का संकल्प है। 

इंडिया फार्मा 2026: मुख्य विषय और उद्देश्य 

  • इस वर्ष के आयोजन का मुख्य विषय "भारत में खोज: जीवन विज्ञान नवाचार में छलांग" (Discovery in India: A Leap in Life Sciences Innovation) रखा गया है। 
  • इसका प्राथमिक लक्ष्य एक ऐसा इको-सिस्टम बनाना है जो भविष्य के लिए तैयार हो, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो और नवाचार को प्राथमिकता दे। 

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण और फोकस क्षेत्र  

  • सीईओ राउंडटेबल : उद्योग के शीर्ष नेतृत्व और सरकार के बीच सीधा संवाद ताकि नीतिगत चुनौतियों को तुरंत हल किया जा सके।
  • सक्षम नियामक तंत्र : नवाचार को गति देने के लिए एक सरल और प्रभावी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करना। 
  • भविष्य की तकनीक : अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों, बायोलॉजिक्स और उन्नत उपचारों (Advanced Therapeutics) पर विशेष जोर। 
  • सप्लाई चेन और निवेश : भारत की सीआरडीएमओ (CRDMO) क्षमताओं का विस्तार करना और एक मजबूत फार्मा वित्तपोषण प्रणाली विकसित करना।

भारतीय फार्मा उद्योग: एक वैश्विक शक्ति 

  • वर्तमान में भारतीय दवा उद्योग मात्रा (Volume) के हिसाब से दुनिया में तीसरे और मूल्य (Value) के हिसाब से 14वें स्थान पर है। 
  • आर्थिक योगदान : यह क्षेत्र जीडीपी में 1.7% का योगदान देता है।
  • भविष्य का लक्ष्य : 50 अरब अमेरिकी डॉलर के वर्तमान मूल्यांकन से बढ़कर 2030 तक 130 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
  • जैव प्रौद्योगिकी : भारत का बायोटेक क्षेत्र भी 2030 तक 300 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, जो वैश्विक स्तर पर शीर्ष 12 में शामिल है।  

भविष्य की राह 

  • इंडिया फार्मा 2026 से निकलने वाले निष्कर्षों और नीतिगत सिफारिशों से उम्मीद है कि भारत किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा। यह आयोजन न केवल निवेश के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि विज़न 2047 के अनुरूप भारत को स्वास्थ्य सेवा नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
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