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राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला

भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। देश के अनेक शहरों में PM2.5, PM10, NO₂, SO₂, O₃ जैसे प्रदूषकों का स्तर मानकों से अधिक पाया जाता है।

वायु गुणवत्ता की प्रभावी निगरानी के लिए स्वचालित निगरानी स्टेशन, लो-कॉस्ट सेंसर और स्मार्ट सिटी आधारित नेटवर्क तेजी से स्थापित किए जा रहे हैं। किन्तु, इन उपकरणों की सटीकता, मानकीकरण और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने हेतु एक राष्ट्रीय स्तर की मानक प्रयोगशाला का अभाव था।  इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए CSIR–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) द्वारा राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला (NESL) की स्थापना की गई है।


राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला

राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला (NESL) एक राष्ट्रीय संदर्भ प्रयोगशाला है, जिसका उद्देश्य भारत में प्रयुक्त वायु प्रदूषण निगरानी प्रणालियों एवं पर्यावरणीय सेंसरों का परीक्षण, सत्यापन और पुनः अंशांकन करना है, ताकि भारतीय पर्यावरणीय परिस्थितियों में सटीक और तुलनीय डेटा उपलब्ध कराया जा सके।

स्थान:-CSIR–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), नई दिल्ली

राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला स्थापना के उद्देश्य

  • भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरणों का परीक्षण और अंशांकन
  • पर्यावरण सेंसरों की मापन-सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लिए प्रमाणिक और मानकीकृत डेटा उपलब्ध कराना
  • आयातित परीक्षण सुविधाओं पर निर्भरता कम कर स्वदेशी मानक प्रणाली विकसित करना

प्रमुख विशेषताएँ

(क) उपकरण परीक्षण एवं सत्यापन

  • परिवेशीय वायु गुणवत्ता मॉनिटर
  • लो-कॉस्ट एयर सेंसर
  • औद्योगिक उत्सर्जन मापन उपकरण
  • स्मार्ट सिटी आधारित निगरानी नेटवर्क

(ख) संदर्भ गैस प्रोटोकॉल

  • मानक गैस मिश्रणों के माध्यम से सेंसर की कार्यक्षमता का मूल्यांकन
  • विभिन्न निगरानी प्रणालियों के डेटा की अंतर-तुलनीयता सुनिश्चित करना

(ग) औद्योगिक एवं शहरी अनुप्रयोग

  • औद्योगिक उत्सर्जन ऑडिट
  • नगरपालिकाओं एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को तकनीकी सहयोग
  • शहरी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणालियों का वैधीकरण

(घ) घरेलू सुविधा

  • उपकरण परीक्षण के लिए विदेश जाने की आवश्यकता समाप्त
  • समय और लागत में उल्लेखनीय कमी

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) से संबंध

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (2019) का उद्देश्य 2017 के स्तर की तुलना में PM2.5 और PM10 सांद्रता में 20–30% की कमी लाना है।

NESL की भूमिका—

  • वायु गुणवत्ता डेटा की विश्वसनीयता बढ़ाना
  • प्रदूषण स्रोतों की सटीक पहचान
  • साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सहायता
  • राज्यों और शहरों के प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन

महत्व (Significance)

(क) पर्यावरणीय शासन

  • बेहतर डेटा से नीतिगत निर्णय अधिक प्रभावी होंगे
  • नियामक संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी

(ख) आर्थिक एवं औद्योगिक महत्व

  • MSMEs, स्टार्ट-अप्स और स्वदेशी निर्माताओं को कम लागत पर गुणवत्ता प्रमाणन
  • आत्मनिर्भर भारत और Make in India को प्रोत्साहन
  • घरेलू पर्यावरण उपकरण उद्योग का विकास

(ग) स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव

  • प्रदूषण-जनित स्वास्थ्य जोखिमों का बेहतर आकलन
  • संवेदनशील क्षेत्रों और जनसंख्या समूहों की पहचान

CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) की भूमिका

CSIR-NPL भारत की राष्ट्रीय मापन एवं मानक प्रयोगशाला है, जो—

  • SI इकाइयों के राष्ट्रीय मानक बनाए रखती है
  • मापन विज्ञान (Metrology) में तकनीकी नेतृत्व प्रदान करती है
  • वैज्ञानिक उपकरणों के परीक्षण और अंशांकन की सुविधा देती है

NESL, NPL की इसी मापन-विशेषज्ञता का पर्यावरण क्षेत्र में विस्तार है।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR – Council of Scientific & Industrial Research)

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) भारत की सबसे बड़ी एवं प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्था है। यह संस्था विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से देश के औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्थापना एवं प्रशासन

  • स्थापना: 26 सितंबर 1942
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • संस्थापक: डॉ. शांति स्वरूप भटनागर
  • प्रशासनिक मंत्रालय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार
  • प्रकृति: स्वायत्त (Autonomous) निकाय

उद्देश्य

CSIR की स्थापना का मुख्य उद्देश्य देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना और उसे औद्योगिक एवं सामाजिक उपयोग से जोड़ना है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • औद्योगिक एवं वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान
  • स्वदेशी तकनीकों का विकास
  • नवाचार एवं पेटेंट को प्रोत्साहन
  • राष्ट्रीय विकास में विज्ञान की भूमिका सुदृढ़ करना
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