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पेचोरा मिसाइल प्रणाली (S-125 Neva/Pechora): भारत की वायु-रक्षा का सशक्त स्तंभ

हाल ही में बेंगलुरु स्थित रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी Alpha Design Technologies Limited (ADTL) ने भारतीय वायु सेना (IAF) की पेचोरा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (SAM) के एक बड़े आधुनिकीकरण (Upgrade) कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह उपलब्धि केंद्र सरकार की स्वदेशीकरण (Indigenisation) और पुराने सैन्य हार्डवेयर के आधुनिकीकरण की नीति के अनुरूप मानी जा रही है।

पेचोरा मिसाइल प्रणाली क्या है ?

  • पेचोरा, जिसे आधिकारिक तौर पर S-125 Neva/Pechora कहा जाता है, सोवियत संघ द्वारा विकसित मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य कम से मध्यम ऊँचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों को नष्ट करना है।
  • यह प्रणाली कई दशकों से भारतीय वायु-रक्षा नेटवर्क का हिस्सा रही है और आज भी उन्नयन के बाद प्रभावी भूमिका निभा रही है।

प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ

1. मिसाइल और लॉन्चर

  • यह प्रणाली रडार-निर्देशित मिसाइल लॉन्चर और फायर कंट्रोल यूनिट से मिलकर बनी होती है।
  • सामान्यतः इसमें V-600 (5V24/5V27) मिसाइल का प्रयोग किया जाता है।

 2. उन्नत रडार प्रणाली

  • इसमें 4R90 “Yatagan” रडार लगाया गया है।
  • यह रडार पाँच पैराबोलिक एंटेना से लैस होता है।
  • कार्य:
    • लक्ष्यों का पता लगाना
    • उनका पीछा करना
    • और लॉक-ऑन करना

3. कम ऊँचाई वाले खतरों के विरुद्ध प्रभावी

  • यह प्रणाली विशेष रूप से:
    • ड्रोन
    • क्रूज़ मिसाइल
    • और धीमी गति से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों के विरुद्ध बेहद प्रभावी मानी जाती है।

4. इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग में भी सक्षम

  • भारी Electronic Warfare (EW) और जैमिंग वाले वातावरण में भी यह प्रणाली काम करने में सक्षम है।
  • इसे स्वतंत्र रूप से या एकीकृत वायु-रक्षा नेटवर्क के हिस्से के रूप में तैनात किया जा सकता है।

परिचालन क्षमता (Operational Capabilities)

क्षमता

विवरण

फायरिंग रेंज

लगभग 30 – 35.4 किलोमीटर

न्यूनतम ऊँचाई

20 मीटर

अधिकतम ऊँचाई

20 – 25 किलोमीटर

रडार डिटेक्शन रेंज

लगभग 100 किलोमीटर

यह व्यापक रेंज इसे कम और मध्यम ऊँचाई दोनों प्रकार के खतरों से निपटने में सक्षम बनाती है।

भारतीय संदर्भ में महत्व

  • ADTL द्वारा किया गया उन्नयन:
    • प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाता है
    • जीवन-काल (Service Life) को आगे बढ़ाता है
    • और आधुनिक हवाई खतरों के अनुरूप इसे सक्षम बनाता है
  • यह कदम:
    • आत्मनिर्भर भारत
    • मेक इन इंडिया (Make in India)
    • और रक्षा आयात में कमी की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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