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भारत में रामसर स्थल 2026, नाम, राज्यवार सूची, मानचित्र

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में भारत में दो नए रामसर स्थल-उत्तर प्रदेश का पटना पक्षी अभयारण्य (एटा जिला) और गुजरात का छारी-ढांड (कच्छ) शामिल किए गए हैं।

भारत में 98 रामसर स्थल हैं (2 फरवरी 2026), जिन्हें जैव विविधता संरक्षण और सतत उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। प्रवाल भित्तियों और मैंग्रोव  सहित ये आर्द्रभूमि विविध प्रकार के पौधों और जीव-जंतुओं का समर्थन करती हैं, स्थानीय समुदायों को आवश्यक सेवाएं प्रदान करती हैं और  जल शोधन एवं बाढ़ नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराती हैं । ये संरक्षित क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं।

रामसर कन्वेंशन: आर्द्रभूमि संरक्षण की वैश्विक संधि

  • रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • यह संधि 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में अपनाई गई थी और इसे 21 दिसंबर 1975 को लागू किया गया।
  • इस संधि का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को संरक्षित करना और उनके विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है।
  • इन्हे Kidneys of the Earth कहा जाता है 

महत्वपूर्ण तथ्य:-

बिंदु

जानकारी

स्थापना वर्ष

2 फ़रवरी 1971

लागू होने की तिथि

21 दिसंबर 1975

मुख्यालय

ग्लैंड (Gland), स्विट्ज़रलैंड

कुल सदस्य देश

172 देश (2024 तक)

भारत की सदस्यता

1 फ़रवरी 1982

विश्व आर्द्रभूमि दिवस

2 फ़रवरी

रामसर सचिवालय का प्रशासनिक नियंत्रण

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN)

रामसर कन्वेंशन के तीन मुख्य उद्देश्य

  1. आर्द्रभूमियों का संरक्षण और सतत उपयोग
  2. स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देना
  3. रामसर स्थलों की निगरानी और प्रबंधन करना

भारत और रामसर कन्वेंशन

महत्वपूर्ण तथ्य:-

बिंदु

जानकारी

भारत की सदस्यता

1 फरवरी 1982

भारत में कुल रामसर स्थल (जनवरी 2024 तक)

96  

सबसे पहला रामसर स्थल (1981)

चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान)

सबसे बड़ा रामसर स्थल

सुंदरबन डेल्टा (पश्चिम बंगाल)

सबसे छोटा रामसर स्थल

रुद्रसागर झील (त्रिपुरा)

2022 में सबसे ज्यादा जोड़े गए स्थल (11 स्थल)

15 अगस्त 2022 को

भारत में रामसर स्थलों की सूची 

क्र.सं.

रामसर साइट

राज्य / UT

वर्ष

1

कोल्लेरू झील

आंध्र प्रदेश

2002

2

दीपोर बील

असम

2002

3

कंवर (कबर) ताल

बिहार

2020

4

नंदा झील

गोवा

2022

5

खिजाडिया WLS

गुजरात

2021

6

नलसरोवर BS

गुजरात

2012

7

थोल झील

गुजरात

2021

8

वधवाना आर्द्रभूमि

गुजरात

2021

9

भिंडावास WLS

हरियाणा

2021

10

सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान

हरियाणा

2021

11

चंद्र ताल

हिमाचल प्रदेश

2005

12

पोंग बांध झील

हिमाचल प्रदेश

2002

13

रेणुका झील

हिमाचल प्रदेश

2005

14

रंगनाथितु BS

कर्नाटक

2022

15

मगाडी केरे संरक्षण अभयारण्य

कर्नाटक

2024

16

अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिजर्व

कर्नाटक

2024

17

अघनाशिनी मुहाना

कर्नाटक

2024

18

अष्टामुडी आर्द्रभूमि

केरल

2002

19

सस्थमकोट्टा झील

केरल

2002

20

वेम्बनाड-कोल (सबसे लंबी झील)

केरल

2005

21

भोज आर्द्रभूमि

मध्य प्रदेश

2002

22

साख्य सागर

मध्य प्रदेश

2022

23

सिरपुर आर्द्रभूमि

मध्य प्रदेश

2022

24

यशवंत सागर

मध्य प्रदेश

2022

25

लोनार झील (क्रेटर झील)

महाराष्ट्र

2020

26

नंदुर मधमेश्वर

महाराष्ट्र

2019

27

ठाणे क्रीक

महाराष्ट्र

2022

28

लोकतक झील

मणिपुर

1990

29

पाला आर्द्रभूमि

मिजोरम

2021

30

अंसुपा झील

ओडिशा

2021

31

भीतरकनिका मैंग्रोव

ओडिशा

2002

32

चिलिका झील (सबसे पुराना)

ओडिशा

1981

33

हीराकुड जलाशय

ओडिशा

2021

34

सतकोसिया घाटी

ओडिशा

2021

35

ताम्पारा झील

ओडिशा

2021

36

ब्यास CNR

पंजाब

2019

37

हरिके आर्द्रभूमि

पंजाब

1990

38

कांजली आर्द्रभूमि

पंजाब

2002

39

केशोपुर-मियानी CMR

पंजाब

2019

40

नांगल WLS

पंजाब

2019

41

रोपड़ आर्द्रभूमि

पंजाब

2002

42

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान

1981

43

सांभर झील

राजस्थान

1990

44

चित्रांगुडी BS

तमिलनाडु

2021

45

मन्नार की खाड़ी (समुद्री)

तमिलनाडु

2022

46

कांजिरनकुलम BS

तमिलनाडु

2022

47

करिकिली BS

तमिलनाडु

2022

48

कूनथंकुलम BS

तमिलनाडु

2021

49

पल्लीकरनई मार्श RF

तमिलनाडु

2022

50

पिचावरम मैंग्रोव

तमिलनाडु

2022

51

पॉइंट कैलिमेरे WLS

तमिलनाडु

2002

52

सुचिंद्रम-थेरूर परिसर

तमिलनाडु

2022

53

उदयमार्थंडपुरम BS

तमिलनाडु

2022

54

वडुवुर BS

तमिलनाडु

2022

55

वेदांतंगल BS

तमिलनाडु

2022

56

वेलोड BS

तमिलनाडु

2022

57

वेम्बन्नूर परिसर

तमिलनाडु

2022

58

करावेट्टी BS

तमिलनाडु

2024

59

लॉन्गवुड शोला RF

तमिलनाडु

2024

60

रुद्रसागर झील

त्रिपुरा

2005

61

होकेरा आर्द्रभूमि

जम्मू-कश्मीर

2005

62

हाइगम वेटलैंड CNR

जम्मू-कश्मीर

2022

63

शैलबुघ वेटलैंड CNR

जम्मू-कश्मीर

2022

64

सुरिंसर-मानसर झीलें

जम्मू-कश्मीर

2005

65

वुलर झील

जम्मू-कश्मीर

1990

66

त्सो कार (उच्च ऊँचाई)

लद्दाख

2020

67

त्सोमोरिरी

लद्दाख

2002

68

बखीरा WLS

उत्तर प्रदेश

2021

69

हैदरपुर आर्द्रभूमि

उत्तर प्रदेश

2021

70

नवाबगंज BS

उत्तर प्रदेश

2019

71

पार्वती अर्गा BS

उत्तर प्रदेश

2019

72

समन BS

उत्तर प्रदेश

2019

73

समसपुर BS

उत्तर प्रदेश

2019

74

सांडी BS

उत्तर प्रदेश

2019

75

सरसई नवर झील

उत्तर प्रदेश

2019

76

सुर सरोवर (कीथम)

उत्तर प्रदेश

2020

77

ऊपरी गंगा नदी

उत्तर प्रदेश

2005

78

आसन बैराज

उत्तराखंड

2020

79

पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि

पश्चिम बंगाल

2002

80

सुंदरबन (सबसे बड़ा)

पश्चिम बंगाल

2019

81

नागी पक्षी अभयारण्य

बिहार

2009

82

नकटी पक्षी अभयारण्य

बिहार

1984

83

काझुवेली BS

तमिलनाडु

2024

84

नंजरायन BS

तमिलनाडु

2024

85

तावा जलाशय

मध्य प्रदेश

2024

86

थेरथंगल BS

तमिलनाडु

2025

87

सक्कराकोट्टई BS

तमिलनाडु

2025

88

खेचोपलरी आर्द्रभूमि

सिक्किम

2025

89

उधवा झील

झारखंड

2025

90

खीचन

राजस्थान

2025

91

मेनार

राजस्थान

2025

92

गोकुल जलाशय

बिहार

2025

93

गोगाबील झील

बिहार

2025

94

उदयपुर झील

बिहार

2025

95

सिलिसरह झील

राजस्थान

2025

96

कोपरा जलाशय

छत्तीसगढ़

2025

97

पटना पक्षी अभयारण्य

उत्तर प्रदेश

2026

98

छारी-धंड

गुजरात

2026

  • भारत में रामसर स्थलों की सर्वाधिक संख्या तमिलनाडु (20) में है
  • इसके बाद उत्तर प्रदेश में 11 रामसर स्थल हैं।

रामसर कन्वेंशन के तहत आर्द्रभूमियों के प्रकार

रामसर संधि के अनुसार, आर्द्रभूमियों को तीन भागों में बांटा गया है:

  1. समुद्री और तटीय आर्द्रभूमियां - मैंग्रोव, मूंगा चट्टानें, समुद्री खाड़ियों और लैगून
  2. नदी और झीलें - झीलें, नदियों के डेल्टा, जलाशय
  3. कृत्रिम आर्द्रभूमियां - चावल के खेत, जलाशय, झीलें

भारत में रामसर स्थलों का महत्व

  • जैव विविधता संरक्षण: आर्द्रभूमियां वन्यजीवों और पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करती हैं।
  • जल संसाधन संरक्षण: ये जल संचयन और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • पर्यटन और अर्थव्यवस्था: रामसर स्थल इको-टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं।
  • कार्बन अवशोषण: आर्द्रभूमियां ग्रीनहाउस गैसों को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करती हैं।

आर्द्रभूमियों का महत्व

  • पर्यावरण संतुलन बनाए रखना: ये जलवायु को संतुलित करने में मदद करती हैं।
  • बाढ़ नियंत्रण: भारी वर्षा के दौरान जल को सोखकर बाढ़ से बचाव करती हैं।
  • जल शुद्धिकरण: गंदे पानी को साफ करने में जैव विविधता का संरक्षण: पक्षियों, मछलियों और अन्य जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं।
  • मानव जीवन पर प्रभाव: मछली पालन, कृषि, पर्यटन और जल आपूर्ति में सहायक होती हैं।
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