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ऑनलाइन गेमर्स की सुरक्षा के लिए प्रतिबंध नहीं, विनियमन अधिक प्रभावी

  • ऑनलाइन गेमिंग के प्रोत्साहन एवं विनियमन अधिनियम (Promotion and Regulation of Online Gaming – PROG Act), 2025 को इस उद्देश्य से लागू किया गया था कि ऑनलाइन धन-आधारित खेलों (Real Money Gaming) से उत्पन्न सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक तथा गोपनीयता संबंधी दुष्प्रभावों से व्यक्तियों, विशेषकर युवाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा की जा सके।
  • इस अधिनियम का उद्देश्य ऑनलाइन जुए की लत, आर्थिक नुकसान तथा गोपनीयता संबंधी जोखिमों को कम करना था। किंतु इसके लागू होने के बाद प्राप्त प्रमाण यह संकेत देते हैं कि यह कानून अपने उद्देश्य के विपरीत परिणाम उत्पन्न कर रहा है। जुए की गतिविधियों को समाप्त करने के बजाय इसने उपयोगकर्ताओं को अवैध विदेशी (Offshore) प्लेटफॉर्मों की ओर स्थानांतरित कर दिया है, जिससे साइबर अपराध, धन शोधन (Money Laundering) तथा उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी नई चुनौतियाँ सामने आई हैं।

ऑफशोर प्लेटफॉर्मों के उपयोग में वृद्धि

घरेलू प्लेटफॉर्मों से अवैध विदेशी प्लेटफॉर्मों की ओर झुकाव

अक्टूबर 2025 में PROG Act लागू होने के बाद अनेक उपयोगकर्ताओं ने विनियमित भारतीय गेमिंग प्लेटफॉर्मों को छोड़कर अवैध विदेशी जुआ वेबसाइटों का उपयोग शुरू कर दिया।

CUTS International द्वारा किए गए अध्ययनों के अनुसार, अधिनियम लागू होने के बाद ऑफशोर प्लेटफॉर्मों का उपयोग उल्लेखनीय रूप से बढ़ा:

क्षेत्र

प्रतिबंध से पहले ऑफशोर उपयोग

प्रतिबंध के बाद ऑफशोर उपयोग

दिल्ली-एनसीआर

68.3%

82%

तमिलनाडु

67.8%

83%

महाराष्ट्र

66.7%

91.7%

तमिलनाडु में ऑफशोर प्लेटफॉर्मों का उपयोग लगभग 15.2 प्रतिशत अंक बढ़ा, जो विदेशी प्लेटफॉर्मों की ओर स्पष्ट व्यवहारिक परिवर्तन को दर्शाता है।

इससे स्पष्ट होता है कि उपयोगकर्ताओं ने ऑनलाइन जुआ गतिविधियों को छोड़ने के बजाय भारतीय नियमन से बाहर संचालित प्लेटफॉर्मों का सहारा लिया।

तकनीकी चुनौतियाँ

अवैध ऑफशोर संचालक सरकारी प्रतिबंधों से बचने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग करते हैं, जैसे :

  • वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) 
  • प्रॉक्सी सर्वर 
  • एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म जैसे Telegram और WhatsApp 
  • मिरर वेबसाइटें 

जब किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया जाता है, तो उपयोगकर्ताओं को शीघ्र ही वैकल्पिक वेबसाइटों पर स्थानांतरित कर दिया जाता है। VPN उपयोगकर्ताओं की वास्तविक लोकेशन को छिपा देते हैं, जिससे भौगोलिक प्रतिबंध कमजोर पड़ जाते हैं।

फलस्वरूप, बार-बार प्रतिबंध लगाने के बावजूद अवैध ऑनलाइन जुआ सेवाओं तक पहुंच बनी रहती है।

मजबूत विनियमन की आवश्यकता

पूर्ण प्रतिबंधों की सीमाएँ

  • विभिन्न क्षेत्रों के अनुभव बताते हैं कि कठोर प्रतिबंध उपभोक्ता मांग को समाप्त नहीं करते, बल्कि गतिविधियों को भूमिगत और अनियंत्रित क्षेत्रों में धकेल देते हैं।
  • डिजिटल क्षेत्र में यह चुनौती और अधिक गंभीर हो जाती है क्योंकि उपयोगकर्ता इंटरनेट के माध्यम से वैश्विक प्लेटफॉर्मों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
  • Ministry of Electronics and Information Technology ने लोकसभा में जानकारी दी कि अवैध सट्टेबाजी नेटवर्कों पर नियंत्रण हेतु 8,376 URL ब्लॉक किए गए।
  • इसके बावजूद वित्तीय धोखाधड़ी तथा ऑनलाइन जुए से जुड़ी आत्महत्याओं की खबरें सामने आती रही हैं, जो प्रतिबंधों की सीमाओं को दर्शाती हैं।

ऑफशोर प्लेटफॉर्मों से उत्पन्न खतरे

ऑफशोर जुआ प्लेटफॉर्म अनेक गंभीर जोखिमों से जुड़े हैं, जैसे :

वित्तीय एवं सुरक्षा संबंधी खतरे

  • धन शोधन (Money Laundering) 
  • आतंक वित्तपोषण (Terror Financing) 
  • अवैध वित्तीय लेनदेन 
  • कर चोरी 

कमजोर उपभोक्ता संरक्षण

इन प्लेटफॉर्मों पर उपयोगकर्ताओं को सामान्यतः निम्न सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं :

  • शिकायत निवारण व्यवस्था 
  • कानूनी संरक्षण 
  • डेटा सुरक्षा 
  • उपभोक्ता अधिकार सुरक्षा 

संगठित वित्तीय अपराधों का बढ़ता जोखिम

  • तमिलनाडु के सिवगंगा जिले में उजागर हुए एक अंतर्राज्यीय ऑनलाइन जुआ और धोखाधड़ी नेटवर्क ने इन जोखिमों को स्पष्ट किया।
  • इस मामले में आरोपियों ने Telegram के माध्यम से “Old Coin Purchase Task” नामक फर्जी योजना चलाई और लोगों को पुराने सिक्कों की नकली बोली योजनाओं में निवेश करने के लिए उच्च लाभ का लालच दिया।
  • इसके साथ ही सिवगंगा, परमाकुडी तथा कलैयारकोविल के ग्रामीणों को छोटे भुगतान के बदले बैंक खाते खोलने के लिए प्रेरित किया गया। बाद में इन खातों का उपयोग “म्यूल अकाउंट” के रूप में अवैध धन हस्तांतरण के लिए किया गया।
  • यह घटना दर्शाती है कि विदेशी नेटवर्क कमजोर समुदायों का शोषण कर संगठित वित्तीय अपराधों को बढ़ावा दे सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण

संयुक्त अरब अमीरात (UAE), 

संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जहां लंबे समय तक जुए पर प्रतिबंध था, ने वर्ष 2023 में एक नियंत्रित संघीय लाइसेंसिंग प्रणाली लागू की।

इस व्यवस्था में शामिल हैं :

  • लाइसेंसिंग आवश्यकताएँ 
  • अनुपालन मानक 
  • जमा सीमा (Deposit Limits) 
  • उपभोक्ता सुरक्षा उपाय 
  • हानि-निवारण तंत्र 

इसका उद्देश्य अवैध ऑफशोर गतिविधियों को नियंत्रित करते हुए उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

श्रीलंका 

श्रीलंका भी एक केंद्रीकृत गैंबलिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके जून 2026 तक कार्यशील होने की संभावना है।

इसका उद्देश्य :

  • ऑनलाइन जुआ गतिविधियों का विनियमन 
  • निगरानी तंत्र का केंद्रीकरण 
  • विदेशी गतिविधियों को घरेलू नियामकीय ढांचे के अंतर्गत लाना  है।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि अनेक देश पूर्ण प्रतिबंधों के बजाय विनियमित ढांचे की ओर बढ़ रहे हैं।

संतुलित नियामकीय ढांचे की आवश्यकता

विनियमन के लाभ

उपभोक्ता संरक्षण

विनियमित व्यवस्था निम्न उपाय उपलब्ध करा सकती है :

  • आयु सत्यापन प्रणाली 
  • जमा सीमा 
  • जिम्मेदार गेमिंग तंत्र 
  • शिकायत निवारण व्यवस्था 

बेहतर वित्तीय निगरानी

विनियमन के माध्यम से :

  • संदिग्ध लेनदेन की निगरानी 
  • अवैध धन प्रवाह की पहचान 
  • धन शोधन पर नियंत्रण 

संभव हो सकेगा।

राजस्व सृजन

विनियमित गेमिंग व्यवस्था से कर राजस्व प्राप्त हो सकता है, जिसका उपयोग निम्न क्षेत्रों में किया जा सकता है :

  • साइबर निगरानी तंत्र सुदृढ़ करना 
  • ऑफशोर नेटवर्कों की निगरानी 
  • जन-जागरूकता अभियान 
  • जुए की लत से निपटना 

केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता

अवैध ऑनलाइन जुए की समस्या से निपटने के लिए निम्न संस्थाओं के बीच समन्वय आवश्यक है :

  • केंद्र सरकार 
  • राज्य सरकारें 
  • साइबर अपराध इकाइयाँ 
  • वित्तीय खुफिया एजेंसियाँ 
  • नियामकीय संस्थाएँ 

प्रतिबंध के बजाय विनियमन, तकनीकी निगरानी और जन-जागरूकता आधारित दृष्टिकोण अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकता है।

निष्कर्ष

ऑनलाइन गेमिंग के प्रोत्साहन एवं विनियमन अधिनियम (PROG Act), 2025 के लागू होने के बाद के अनुभव यह दर्शाते हैं कि डिजिटल युग में पूर्ण प्रतिबंध हमेशा प्रभावी नहीं होते।

ऑनलाइन जुए को समाप्त करने के बजाय यह नीति उपयोगकर्ताओं को ऐसे विदेशी प्लेटफॉर्मों की ओर ले गई, जो घरेलू नियमन के बाहर संचालित होते हैं। ऑफशोर जुए, साइबर अपराध तथा वित्तीय धोखाधड़ी में वृद्धि यह संकेत देती है कि अधिक व्यावहारिक और संतुलित नीति दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

दीर्घकाल में मजबूत विनियमन, तकनीकी सुरक्षा उपाय, प्रभावी निगरानी तथा जन-जागरूकता अभियान ऑनलाइन जुए की चुनौतियों से निपटने के लिए पूर्ण प्रतिबंधों की तुलना में अधिक प्रभावी समाधान सिद्ध हो सकते हैं।

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