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रगा जनजातीय और भारत की आवासीय चुनौती: यूएन-हैबिटेट वर्ल्ड सिटीज़ रिपोर्ट 2026 का विश्लेषण

  • हाल ही में जारी UN-Habitat World Cities Report 2026 ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती आवासीय असमानता, आवास की उपलब्धता, सामाजिक बहिष्करण तथा शहरी संकट की गंभीरता को रेखांकित किया है। 
  • रिपोर्ट में विशेष रूप से भारत की कोरगा जनजातीय का उल्लेख करते हुए बताया गया कि सामाजिक भेदभाव, जातिगत अवरोध और नीतिगत कमियां आज भी अनेक समुदायों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास से वंचित कर रही हैं। 
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत में किराए का बोझ लगातार बढ़ रहा है तथा वर्ष 2010 में घरेलू आय का लगभग 20 प्रतिशत भाग किराए पर खर्च होता था, जो वर्ष 2023 में बढ़कर 26 प्रतिशत हो गया है।

कोरगा जनजाति: परिचय एवं भौगोलिक वितरण

  • कोरगा भारत की एक स्वदेशी जनजातीय समुदाय है, जो मुख्य रूप से कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ (Dakshina Kannada) और उडुपी जिलों तथा केरल के कासरगोड जिले में निवास करती है। 
  • इसके अतिरिक्त कर्नाटक के लगभग सभी जिलों में इनकी सीमित आबादी पाई जाती है।
  • भारत सरकार ने कोरगा समुदाय को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group - PVTG) की श्रेणी में वर्गीकृत किया है, जो इनके सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दर्शाता है।

भाषा एवं सामाजिक संरचना

  • कोरगा समुदाय के लोग अपनी स्थानीय भाषा कोरगा भाषा (Koraga Bhasha) का प्रयोग करते हैं, जबकि तुलु भाषा भी इनके बीच व्यापक रूप से प्रचलित है। सामाजिक दृष्टि से यह समुदाय मातृवंशीय (Matrilineal) परिवार व्यवस्था का पालन करता है, जिसमें वंश और सामाजिक पहचान महिलाओं से जुड़ी होती है।
  • इनकी सामाजिक संरचना “बाली” नामक विशिष्ट कबीलाई व्यवस्था पर आधारित है, जो सामुदायिक संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समुदाय का नेतृत्व गांव के वरिष्ठतम व्यक्ति द्वारा किया जाता है, जिसे “मूप्पन (Mooppan)” कहा जाता है। मूप्पन समुदाय के सदस्यों के कल्याण और सामाजिक समन्वय को सुनिश्चित करता है।

आर्थिक जीवन एवं सांस्कृतिक पहचान

  • कोरगा समुदाय की आजीविका मुख्यतः कृषि और वन संसाधनों पर आधारित है। इसके अतिरिक्त यह समुदाय पारंपरिक हस्तशिल्प, विशेषकर टोकरी निर्माण (Basket Making) के लिए प्रसिद्ध है।
  • कोरगा समुदाय लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी करता है, जो उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करता है। इनके सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में संगीत का महत्वपूर्ण स्थान है।
  • ढोलु (Dholu) और वूटे (Voote) क्रमशः ढोल और बांसुरी के रूप में इनके प्रमुख वाद्ययंत्र हैं। विशेष रूप से ढोलु की तालबद्ध ध्वनि कोरगा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग मानी जाती है तथा इसका उपयोग विभिन्न धार्मिक और सामुदायिक अवसरों पर किया जाता है।

धार्मिक मान्यताएं

  • यद्यपि कोरगा समुदाय व्यापक रूप से हिंदू धर्म का पालन करता है, किंतु इनके अपने विशिष्ट जनजातीय धार्मिक विश्वास भी हैं। 
  • यह समुदाय “भूत” (Bhutas) अर्थात आत्माओं की पूजा करता है और जादुई तथा अनुष्ठानिक परंपराओं में विश्वास रखता है। 
  • समुदाय के लोग मानते हैं कि धार्मिक कर्मकांडों और पारंपरिक अनुष्ठानों के माध्यम से बुरी शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है।

UN-Habitat रिपोर्ट में कोरगा समुदाय का उल्लेख क्यों?

  • UN-Habitat World Cities Report 2026 में कोरगा समुदाय का उल्लेख उनकी आवासीय चुनौतियों के संदर्भ में किया गया है। 
  • रिपोर्ट के अनुसार, कोरगा समुदाय के लिए घर का स्वामित्व प्राप्त करना आज भी एक कठिन प्रक्रिया है, जो केवल आर्थिक स्थिति से नहीं बल्कि जातिगत संरचनाओं और नीतिगत अंतरालों से भी प्रभावित है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमित शिक्षा, सामाजिक बहिष्करण तथा संरचनात्मक बाधाओं के कारण कोरगा समुदाय सरकारी आवास योजनाओं तक पर्याप्त पहुंच नहीं बना पाता है। 
  • रिपोर्ट में ActionAid India, Koraga Federation तथा Samagra Grameena Ashram (SGA) की पहल “Restoration of Dignity and Human Rights of Indigenous Tribal Community in Karnataka” का उल्लेख किया गया है। 
  • इस पहल के माध्यम से कोरगा परिवारों को राज्य सरकार की आवास योजनाओं तक पहुंच प्राप्त करने में सहायता प्रदान की गई।

वैश्विक आवास संकट और शहरीकरण की चुनौती

  • रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में विश्व की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या, अर्थात लगभग 3.4 अरब लोग, आवास संकट से प्रभावित हैं। महंगे घर, आवास की कमी, निम्न गुणवत्ता वाले निवास और जल तथा स्वच्छता जैसी मूलभूत शहरी सेवाओं की अनुपलब्धता इस संकट के प्रमुख कारण हैं।
  • रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक विश्व के शहरों में लगभग 2 अरब अतिरिक्त लोग जुड़ जाएंगे, जिससे पहले से दबाव झेल रही आवास व्यवस्था पर और अधिक भार पड़ेगा।
  • इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाओं के कारण वर्ष 2040 तक लगभग 16.7 करोड़ घर नष्ट हो सकते हैं।

“हर शहर की समस्या अलग” 

  • विश्व शहरी मंच (World Urban Forum - WUF13) में अमेरिकी अर्थशास्त्री Jeffrey D. Sachs ने कहा कि वैश्विक शहरी संकट को एक समान दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।
  • उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की आर्थिक, जनसांख्यिकीय तथा भूमि संबंधी परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए उनकी शहरी चुनौतियां भी अलग हैं। 
  • उनके अनुसार लैटिन अमेरिका में छोटे परिवारों की प्रवृत्ति एक प्रमुख सामाजिक परिवर्तन है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में तेजी से बढ़ती शहरी आबादी भूमि, शहरी नियोजन और आवास व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन रही है।
  • उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपेक्षाकृत कम लेकिन महत्वपूर्ण शहरी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

  • कोरगा जनजाति की स्थिति केवल एक जनजातीय समुदाय की समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और आवासीय समानता का व्यापक प्रश्न है। 
  • UN-Habitat World Cities Report 2026 स्पष्ट करती है कि केवल आवास निर्माण योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी। 
  • सुरक्षित और सम्मानजनक आवास सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक भेदभाव, जातिगत अवरोधों और नीतिगत कमियों को दूर करना आवश्यक होगा। तभी “सभी के लिए आवास” और समावेशी शहरी विकास के लक्ष्य को वास्तविक रूप दिया जा सकेगा।
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