New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM Spring Sale UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 6th Feb., 2026 GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM Spring Sale UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 6th Feb., 2026 GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM

क्यासानूर वन रोग /बंदर बुखार (KFD) क्या है?

  • हाल ही में कर्नाटक में 29 वर्षीय युवक की मृत्यु ने एक बार फिर क्यासानूर वन रोग (Kyasanur Forest Disease – KFD) को चर्चा में ला दिया है। 
  • यह बीमारी आमतौर पर तब तक लोगों की नज़र से ओझल रहती है, जब तक यह जानलेवा रूप न ले ले। 
  • इसे आम बोलचाल में “बंदर बुखार” भी कहा जाता है, क्योंकि इसका प्रकोप अक्सर बंदरों की मौत के साथ जुड़ा पाया गया है।

क्यासानूर वन रोग (KFD) क्या है ?

क्यासानूर वन रोग एक टिक-जनित वायरल रक्तस्रावी (Viral Hemorrhagic) रोग है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के कुछ वन क्षेत्रों में पाया जाता है।

  • इस रोग की पहली पहचान वर्ष 1957 में कर्नाटक के क्यासानूर वन क्षेत्र में हुई थी।
  • इसी स्थान के नाम पर इसे Kyasanur Forest Disease (KFD) कहा गया।
  • यह रोग KFD वायरस के कारण होता है, जो Flaviviridae परिवार और Flavivirus जीनस से संबंधित है।
  • यह वायरस Tick-Borne Encephalitis (TBE) complex का हिस्सा है।

“बंदर बुखार” क्यों कहा जाता है ?

  • इस रोग के प्रकोप के दौरान वन क्षेत्रों में बंदरों की अचानक मौत देखने को मिलती है।
  • बीमार या मृत बंदर अक्सर यह संकेत होते हैं कि उस इलाके में KFD वायरस सक्रिय है।
  • इसी कारण स्थानीय लोग इसे बंदर रोग / बंदर बुखार कहते हैं।

रोग का संचरण (Transmission)

KFD मानव से मानव नहीं फैलता, लेकिन इसका प्रसार प्राकृतिक चक्र के माध्यम से होता है।

मुख्य वाहक:

  • हार्ड टिक्स (Haemaphysalis spinigera) — यही इस वायरस का प्रमुख वाहक है।

संक्रमण कैसे फैलता है ? 

  • संक्रमित टिक के काटने से
  • संक्रमित जानवरों (विशेषकर बीमार या हाल ही में मृत बंदर) के संपर्क में आने से
  • जंगलों, घास के मैदानों या पत्तियों वाले क्षेत्रों में काम करने वालों को अधिक खतरा

 महत्वपूर्ण: यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।

क्यासानूर वन रोग के लक्षण

संक्रमण के 3–8 दिनों के भीतर लक्षण अचानक उभर सकते हैं:

प्रारंभिक लक्षण:

  • तेज बुखार
  • अत्यधिक कमजोरी
  • सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द
  • मतली, उल्टी और दस्त

गंभीर मामलों में:

  • रक्तस्रावी लक्षण (नाक, मसूड़ों से खून)
  • तंत्रिका संबंधी समस्याएं (कंपकंपी, भ्रम, बेहोशी)
  • कुछ मामलों में दूसरा चरण (Relapse) भी आ सकता है

यदि समय पर इलाज न मिले तो यह रोग घातक हो सकता है।

इलाज (Treatment)

  • KFD का कोई विशिष्ट इलाज (Cure) नहीं है।
  • उपचार पूरी तरह सहायक देखभाल (Supportive Care) पर आधारित होता है:

सहायक उपचार में शामिल:

  • शरीर में तरल संतुलन बनाए रखना
  • ऑक्सीजन सपोर्ट
  • रक्तचाप का नियंत्रण
  • द्वितीयक संक्रमणों का इलाज
  • गंभीर मामलों में ICU देखभाल

टीकाकरण (Vaccine)

अच्छी खबर यह है कि:

  • भारत में KFD के लिए वैक्सीन उपलब्ध है।
  • यह वैक्सीन उन क्षेत्रों में सिफारिश की जाती है, जहां KFD स्थानिक (Endemic) है — जैसे कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्से।
  • आमतौर पर यह दो खुराक + बूस्टर डोज़ के रूप में दी जाती है।

बचाव के उपाय (Prevention)

  • जंगलों में जाते समय पूरे कपड़े पहनें
  • टिक-रोधी रिपेलेंट का प्रयोग करें
  • मृत या बीमार बंदरों को छूने से बचें
  • वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का नियमित टीकाकरण
  • बंदरों की असामान्य मौत की सूचना तुरंत प्रशासन को दें
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR