- हाल ही में कर्नाटक में 29 वर्षीय युवक की मृत्यु ने एक बार फिर क्यासानूर वन रोग (Kyasanur Forest Disease – KFD) को चर्चा में ला दिया है।
- यह बीमारी आमतौर पर तब तक लोगों की नज़र से ओझल रहती है, जब तक यह जानलेवा रूप न ले ले।
- इसे आम बोलचाल में “बंदर बुखार” भी कहा जाता है, क्योंकि इसका प्रकोप अक्सर बंदरों की मौत के साथ जुड़ा पाया गया है।

क्यासानूर वन रोग (KFD) क्या है ?
क्यासानूर वन रोग एक टिक-जनित वायरल रक्तस्रावी (Viral Hemorrhagic) रोग है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के कुछ वन क्षेत्रों में पाया जाता है।
- इस रोग की पहली पहचान वर्ष 1957 में कर्नाटक के क्यासानूर वन क्षेत्र में हुई थी।
- इसी स्थान के नाम पर इसे Kyasanur Forest Disease (KFD) कहा गया।
- यह रोग KFD वायरस के कारण होता है, जो Flaviviridae परिवार और Flavivirus जीनस से संबंधित है।
- यह वायरस Tick-Borne Encephalitis (TBE) complex का हिस्सा है।
“बंदर बुखार” क्यों कहा जाता है ?
- इस रोग के प्रकोप के दौरान वन क्षेत्रों में बंदरों की अचानक मौत देखने को मिलती है।
- बीमार या मृत बंदर अक्सर यह संकेत होते हैं कि उस इलाके में KFD वायरस सक्रिय है।
- इसी कारण स्थानीय लोग इसे बंदर रोग / बंदर बुखार कहते हैं।
रोग का संचरण (Transmission)
KFD मानव से मानव नहीं फैलता, लेकिन इसका प्रसार प्राकृतिक चक्र के माध्यम से होता है।
मुख्य वाहक:
- हार्ड टिक्स (Haemaphysalis spinigera) — यही इस वायरस का प्रमुख वाहक है।
संक्रमण कैसे फैलता है ?
- संक्रमित टिक के काटने से
- संक्रमित जानवरों (विशेषकर बीमार या हाल ही में मृत बंदर) के संपर्क में आने से
- जंगलों, घास के मैदानों या पत्तियों वाले क्षेत्रों में काम करने वालों को अधिक खतरा
महत्वपूर्ण: यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।
क्यासानूर वन रोग के लक्षण
संक्रमण के 3–8 दिनों के भीतर लक्षण अचानक उभर सकते हैं:
प्रारंभिक लक्षण:
- तेज बुखार
- अत्यधिक कमजोरी
- सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द
- मतली, उल्टी और दस्त
गंभीर मामलों में:
- रक्तस्रावी लक्षण (नाक, मसूड़ों से खून)
- तंत्रिका संबंधी समस्याएं (कंपकंपी, भ्रम, बेहोशी)
- कुछ मामलों में दूसरा चरण (Relapse) भी आ सकता है
यदि समय पर इलाज न मिले तो यह रोग घातक हो सकता है।
इलाज (Treatment)
- KFD का कोई विशिष्ट इलाज (Cure) नहीं है।
- उपचार पूरी तरह सहायक देखभाल (Supportive Care) पर आधारित होता है:
सहायक उपचार में शामिल:
- शरीर में तरल संतुलन बनाए रखना
- ऑक्सीजन सपोर्ट
- रक्तचाप का नियंत्रण
- द्वितीयक संक्रमणों का इलाज
- गंभीर मामलों में ICU देखभाल
टीकाकरण (Vaccine)
अच्छी खबर यह है कि:
- भारत में KFD के लिए वैक्सीन उपलब्ध है।
- यह वैक्सीन उन क्षेत्रों में सिफारिश की जाती है, जहां KFD स्थानिक (Endemic) है — जैसे कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्से।
- आमतौर पर यह दो खुराक + बूस्टर डोज़ के रूप में दी जाती है।
बचाव के उपाय (Prevention)
- जंगलों में जाते समय पूरे कपड़े पहनें
- टिक-रोधी रिपेलेंट का प्रयोग करें
- मृत या बीमार बंदरों को छूने से बचें
- वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का नियमित टीकाकरण
- बंदरों की असामान्य मौत की सूचना तुरंत प्रशासन को दें