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अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) रिपोर्ट

संदर्भ 

हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) की रिपोर्ट जारी की। एआईएसएचई वेब-आधारित डेटा कैप्चर फॉर्मेट (डीसीएफ) के माध्यम से देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों से विस्तृत जानकारी जमा करता है।

सर्वेक्षण से संबंधित प्रमुख बिंदु  

  • अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण छात्र नामांकन, संकाय और कर्मचारी, बुनियादी ढांचा, परीक्षा परिणाम आदि से संबंधित डेटा एआईएसएचई पोर्टल पर अपलोड करते हैं। उल्‍लेखनीय है कि एआईएसएचई भारत में उच्च शिक्षा पर आधिकारिक आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है और इस क्षेत्र की नीति निर्माण, योजना और निगरानी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। 
  • उच्च शिक्षा संस्थानों ने दोनों वर्षों के दौरान एआईएसएचई में मजबूत भागीदारी प्रदर्शित की। वर्ष 2022-23 में पंजीकृत 60,380 संस्थानों में से 56,180 संस्थानों ने भाग लिया, जबकि 2023-24 में पंजीकृत 64,756 संस्थानों में से 59,533 संस्थानों ने भाग लिया। दोनों सर्वेक्षणों में भागीदारी दर 90 प्रतिशत से अधिक रही। 

सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 

  • सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) की गणना 2011 के जनसंख्या अनुमान के आधार पर 18-23 वर्ष आयु वर्ग की कुल जनसंख्या में छात्रों के नामांकन के अनुपात के रूप में की जाती है। 
  • जीईआर, जो 2014-15 में 23.7 था, लगातार बढ़ रहा है और 2022-23 में 29.5 और 2023-24 में 30 तक पहुंच गया है।
  • महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 के 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 30.2 प्रतिशत और 2023-24 में 31.2 प्रतिशत हो गया है।

पिछले दशक के दौरान जीईआर का रुझान

  • शैक्षिक सत्र 2014-15 में अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों की प्रतिशत वृद्धि दर (जीईआर) 18.9 से बढ़कर 2023-24 में 27.8 हो गया है। 
  • अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों की प्रतिशत वृद्धि दर (जीईआर) 2014-15 में 13.5 से बढ़कर 2023-24 में 22.8 हो गई है। 

लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई)

  • महिला और पुरुष की उच्च शिक्षा में भागीदारी (जीआईआर) के अनुपात को लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई) के रूप में परिकलित किया जाता है, जो पुरुषों और महिलाओं की शिक्षा तक सापेक्ष पहुंच को मापता है। 
  • सत्र 2023-24 के लिए जीपीआई 1.08 है। जीपीआई लगातार सात वर्षों से 1.0 से ऊपर बना हुआ है, जो उच्च शिक्षा में महिलाओं की निरंतर उच्च भागीदारी को दर्शाता है।

नामांकन 

  • उच्च शिक्षा में नामांकन 2014-15 में 3.42 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.46 करोड़ और 2023-24 में 4.50 करोड़ (यानी 2014-15 से 31.5 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया है। 
  • वास्तव में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2014-15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 2.18 करोड़ और 2023-24 में 2.24 करोड़ (यानी 2014-15 से 42.2 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया है। 
  • अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों का नामांकन 2014-15 में 46.07 लाख से बढ़कर 2023-24 में 69.72 लाख (2014-15 से 51.4 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया है। 
  • अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों का नामांकन 2014-15 में 16.41 लाख से बढ़कर 2023-24 में 28.83 लाख (2014-15 से 75.7 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया है। इसी प्रकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों का नामांकन 2014-15 में 1.13 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 1.80 करोड़ (60.2 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया है। 

एसटीईएम नामांकन 

  • पिछले एक दशक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2014-15 में 91.5 लाख से बढ़कर 2023-24 में 1.02 करोड़ हो गया है, जो देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित शिक्षा पर बढ़ते रुझाान को दर्शाता है।
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में नामांकन के लिए महिला छात्रों की हिस्सेदारी में भी पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुधार देखा गया है, जो 2014-15 में 38.4 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 44 प्रतिशत हो गई है।
  • वस्तुतः यह रुझान देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित शिक्षा में बढ़ती लैंगिक समावेशिता को दर्शाती है। 
  • सत्र 2023-24 में शिक्षकों की कुल संख्या बढ़कर 17.32 लाख हो गई, जिनमें से 55.1 प्रतिशत पुरुष और 44.9 प्रति‍शत महिलाएं हैं।
  • महिला शिक्षकों की संख्या 2014-15 में 5.69 लाख से बढ़कर 2022-23 में 7.37 लाख और 2023-24 में 7.78 लाख हो गई है। 

उच्च शिक्षा विभाग के बारे में 

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे के समग्र विकास के लिए उत्तरदायी है। यह विकास नीति निर्माण तथा योजनाबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। 
  • उच्च शिक्षा विभाग का उद्देश्य विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से उच्च शिक्षा तक पहुँच का विस्तार करना तथा उसकी गुणवत्ता में सुधार करना है। 
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