यूरोप में मौसम का बदलता मिजाज: स्प्रिंग हीटवेव ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड
चर्चा में क्यों ?
यूनाइटेड किंगडम (UK) तथा पश्चिमी और मध्य यूरोप के कई हिस्से इस समय रिकॉर्डतोड़ वसंतकालीन हीटवेव (Spring Heatwave) की चपेट में हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे “हीट डोम (Heat Dome)” नामक मौसमीय प्रणाली जिम्मेदार है, जिसने यूरोप के ऊपर अत्यधिक गर्म वायु को फँसा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण ऐसी शुरुआती हीटवेव अधिक गर्म, लंबी और बार-बार होने वाली बनती जा रही हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
ब्रिटेन में टूटा मई महीने का तापमान रिकॉर्ड
26 मई 2026 को Kew Gardens क्षेत्र में दिन का तापमान 35.1°C दर्ज किया गया, जो मई महीने का नया अस्थायी रिकॉर्ड है।
इससे एक दिन पहले यहाँ तापमान 34.8°C दर्ज हुआ था, जिसने 1922 में बने 32.8°C के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था।
इसके अलावा लंदन में “ट्रॉपिकल नाइट (Tropical Night)” भी दर्ज की गई, जिसमें रात का तापमान 20°C से नीचे नहीं गिरता।
यूरोप के कई देशों में असामान्य गर्मी
यूरोप के कई देशों में भी असामान्य गर्मी दर्ज की जा रही है।
दक्षिण-पश्चिमी France में 25 मई को तापमान 36°C तक पहुँच गया, जबकि कई क्षेत्रों में लगातार ट्रॉपिकल नाइट्स दर्ज की गईं।
इसके अतिरिक्त स्पेन, पुर्तगाल, आयरलैंड, जर्मनी तथा इटली भी असामान्य गर्मी की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
इन क्षेत्रों में तापमान सामान्य जलवायु औसत से लगभग 12°C-16°C अधिक दर्ज किया गया है।
क्या है ‘हीट डोम’ (Heat Dome) ?
हीट डोम (Heat Dome) एक ऐसी मौसमीय स्थिति है, जिसमें उच्च दाब प्रणाली (High Pressure System) किसी क्षेत्र के ऊपर लंबे समय तक स्थिर हो जाती है और वातावरण में ढक्कन (Lid) की तरह कार्य करते हुए गर्म हवा को नीचे फँसा देती है।
इसके परिणामस्वरूप सूर्य की तीव्र ऊर्जा सतह को अधिक गर्म करती है, हवा का संपीड़न (Compression) बढ़ जाता है तथा सतही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान हीट डोम उत्तरी अफ्रीका से विकसित होकर पश्चिमी और मध्य Europe तक फैल गया है, जिससे कई देशों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की जा रही है।
स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
अत्यधिक गर्मी का प्रभाव विशेष रूप से वृद्ध लोगों, बच्चों, पहले से बीमार व्यक्तियों, किसानों एवं बाहरी श्रमिकों तथा गरीब एवं संवेदनशील समुदायों पर अधिक पड़ता है।
लंबे समय तक अत्यधिक तापमान के संपर्क में रहने से हीट एक्सहॉशन (Heat Exhaustion) की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे निर्जलीकरण (Dehydration), चक्कर आना, कमजोरी और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएँ सामने आती हैं।
यदि समय पर उपचार और सावधानी न बरती जाए, तो यह स्थिति गंभीर रूप लेकर हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) में परिवर्तित हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।
हीट इंडेक्स (Heat Index) क्यों महत्त्वपूर्ण है ?
विशेषज्ञों के अनुसार केवल तापमान ही नहीं, बल्कि आर्द्रता (Humidity) भी गर्मी की तीव्रता बढ़ाती है।
इसी कारण Heat Index का उपयोग किया जाता है, जो तापमान और आर्द्रता के संयुक्त प्रभाव के आधार पर शरीर द्वारा महसूस की जाने वाली वास्तविक गर्मी को दर्शाता है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा खतरा
गैरीफालोस कोन्स्टेंटिनौडिस के अनुसार शुरुआती मौसम में आने वाली हीटवेव अधिक खतरनाक होती हैं, क्योंकि मानव शरीर को बढ़ते तापमान के अनुरूप स्वयं को अनुकूलित करने (Acclimatise) का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उनके अनुसार, इस हीटवेव के कारण केवल इंग्लैंड और वेल्स में 250 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।
वहीं फ्रीडेरिके ओटो ने कहा कि वसंत ऋतु के दौरान ब्रिटेन में 35°C तापमान दर्ज होना अत्यंत असाधारण है और यह जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेजी से कमी नहीं लाई गई, तो भविष्य में तापमान के रिकॉर्ड लगातार टूटते रहेंगे और ऐसी चरम मौसमी घटनाएँ अधिक सामान्य हो सकती हैं।
आगे क्या ?
विशेषज्ञों के अनुसार हीट डोम मई के शेष दिनों तक पश्चिमी और मध्य Europe पर बना रह सकता है, जिसके कारण नए तापमान रिकॉर्ड बनने, स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने तथा ऊर्जा एवं जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
यह स्थिति एक बार फिर स्पष्ट करती है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है, जिसके प्रभाव दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में चरम मौसमीय घटनाओं के रूप में दिखाई दे रहे हैं।
निष्कर्ष
यूनाइटेड किंगडम और पश्चिमी यूरोप में दर्ज की गई यह रिकॉर्डतोड़ वसंतकालीन हीटवेव केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का स्पष्ट संकेत है।
हीट डोम जैसी चरम मौसमीय परिस्थितियाँ अब अधिक तीव्र, लंबी और बार-बार होने लगी हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य, जल संसाधन, ऊर्जा व्यवस्था तथा सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जलवायु अनुकूलन रणनीतियों और आपदा तैयारी को तेज करना समय की आवश्यकता बन चुका है, ताकि भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम किया जा सके।