New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

ग्रेप्स-3 (GRAPES-3)

संदर्भ

  • हाल ही में मुंबई, कोच्चि और जापान के वैज्ञानिकों ने ग्रेप्स-3 टेलीस्कोप का उपयोग करते हुए एक अध्ययन किया। इस शोध में यह समझने का प्रयास किया गया कि पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का तापमान तथा सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र म्यूऑन (Muons) नामक उप-परमाण्विक कणों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। म्यूऑन अंतरिक्ष से आने वाले उच्च-ऊर्जा कणों का एक प्रकार है। 

ग्रेप्स-3 दूरबीन के बारे में 

  • GRAPES-3 का पूरा नाम Gamma Ray Astronomy PeV EnergieS phase-3 है। यह एक उन्नत वेधशाला है, जिसे कॉस्मिक किरणों की उत्पत्ति, उनके त्वरण (Acceleration) तथा उनके प्रसार (Propagation) का अध्ययन करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।  
  • इसका कार्य पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाली प्राथमिक कॉस्मिक किरणों या गामा किरणों द्वारा उत्पन्न विस्तृत वायु वर्षा (Extensive Air Showers) का अवलोकन और मापन करना है। 
  • ये किरणें टेरा-इलेक्ट्रॉन वोल्ट (TeV) से लेकर पीटा-इलेक्ट्रॉन वोल्ट (PeV) तक की अत्यधिक ऊर्जा रखती हैं। 
  • ग्रेप्स-3 का उपयोग केवल कॉस्मिक किरणों के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह म्यूऑन कणों के माध्यम से सौर गतिविधियों और गरज-चमक (Thunderstorm) जैसी वायुमंडलीय घटनाओं का भी विश्लेषण करता है। 
  • इस वेधशाला में प्लास्टिक सिंटिलेटर डिटेक्टरों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ-साथ प्रपोर्शनल काउंटर तकनीक पर आधारित एक बड़ा म्यूऑन डिटेक्टर स्थापित किया गया है। 

स्थान और संचालन

  • स्थान : ऊटी, तमिलनाडु, भारत
  • संचालन : टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR)

कॉस्मिक किरणों से जुड़े प्रमुख तथ्य 

  • कॉस्मिक किरणों की खोज को सौ वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इन्हें ब्रह्मांड के सबसे अधिक ऊर्जा वाले कणों में शामिल किया जाता है।
  • पृथ्वी पर अंतरिक्ष से ये किरणें लगभग सभी दिशाओं से समान रूप से और लगातार प्रवाहित होती रहती हैं। 
  • जब ये किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो वे कणों की एक श्रृंखला (Particle Shower) उत्पन्न करती हैं, जो लगभग प्रकाश की गति से पृथ्वी की सतह की ओर बढ़ती है।
  • इन कणों की वर्षा में इलेक्ट्रॉन, फोटॉन, म्यूऑन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे अनेक कण शामिल होते हैं।  
  • कॉस्मिक किरणों की ऊर्जा सीमा अत्यंत व्यापक है, जो लगभग 108 इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) से लेकर 1020 इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) तक फैली हुई है। 

म्यूऑन क्या हैं ? 

  • म्यूऑन उप-परमाण्विक कण होते हैं, जिनका निर्माण तब होता है जब कॉस्मिक किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद परमाणुओं से टकराती हैं।
  • ये अत्यधिक ऊर्जावान कण होते हैं और बड़ी संख्या में पृथ्वी की सतह तक पहुँच जाते हैं। इनके अध्ययन से वैज्ञानिकों को अंतरिक्षीय प्रक्रियाओं तथा वायुमंडलीय घटनाओं को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR