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हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH)

संदर्भ 

हाल ही में अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान का महज 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नामक बीमारी से पीड़ित थे।

हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) के बारे में 

  • यह मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) से जुड़ा एक अत्यंत दुर्लभ और खतरनाक विकार है। 
  • सामान्य तौर पर हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) शरीर को बीमारियों और बाहरी संक्रमणों से बचाती है। लेकिन एचएलएच की स्थिति में यह प्रणाली अनियंत्रित और अत्यधिक सक्रिय हो जाती है।   
  • स्वस्थ अंगों पर हमला: वायरस या बैक्टीरिया को मारने के बजाय, शरीर के रक्षक (इम्यून सेल्स) अपने ही स्वस्थ ऊतकों और अंगों को नष्ट करने लगते हैं।
  • अंगों में भारी सूजन: इसके कारण शरीर के भीतर गंभीर सूजन पैदा होती है, जो विशेष रूप से लिवर, प्लीहा (Spleen), बोन मैरो (अस्थि मज्जा) और दिमाग को नुकसान पहुँचाती है।
  • समय पर इलाज जरूरी: यदि इस बीमारी की पहचान कर तुरंत उपचार शुरू न किया जाए, तो यह बहु-अंग विफलता (Multi-organ Failure) का कारण बन सकती है और जानलेवा साबित होती है। 

एचएलएच के मुख्य प्रकार और उनके कारण:

चिकित्सा विज्ञान में इस बीमारी को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:

1. प्राइमरी (पारिवारिक/आनुवंशिक) एचएलएच 

  • यह जन्मजात होता है और माता-पिता से मिलने वाले डिफेक्टिव जीन्स (Genetic mutations) के कारण होता है। हालांकि यह ज्यादातर नवजात शिशुओं या छोटे बच्चों में दिखाई देता है, लेकिन कुछ मामलों में यह वयस्क होने पर भी उभर सकता है।
  • आनुवंशिक गणित: यदि माता और पिता दोनों इस बीमारी के जीन वाहक (Carriers) हैं, तो पैदा होने वाले बच्चे में बीमारी होने का जोखिम 25% होता है, स्वस्थ होने की संभावना 25% होती है, जबकि 50% संभावना इस बात की होती है कि बच्चा भी केवल इस जीन का वाहक बनेगा।  

2. सेकेंडरी (अर्जित) एचएलएच 

यह प्रकार जन्मजात नहीं होता, बल्कि जीवन में बाद में किसी बाहरी चिकित्सीय कारक की वजह से इम्यून सिस्टम के ट्रिगर होने पर होता है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं:

  • गंभीर वायरस: एपस्टीन-बार वायरस (EBV) या साइटोमेगालोवायरस (CMV) का संक्रमण।
  • अन्य संक्रमण: फंगल, परजीवी (Parasitic) या कुछ खतरनाक बैक्टीरिया।
  • ऑटोइम्यून डिसीज: ल्यूपस (Lupus) या रुमेटॉइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियां, जिनमें शरीर खुद को नुकसान पहुँचाता है। 
  • ब्लड कैंसर: ल्यूकेमिया या लिंफोमा जैसे रक्त से जुड़े कैंसर।
  • कमजोर प्रतिरोधक क्षमता: कुछ विशेष हैवी दवाओं के सेवन या अन्य बीमारियों के कारण इम्यून सिस्टम का कमजोर होना।

बीमारी के प्रमुख लक्षण (Symptoms):

शुरुआती दौर में इसके लक्षण किसी सामान्य या गंभीर संक्रमण जैसे ही लगते हैं, जिससे डॉक्टर भी तुरंत इसका अंदाजा नहीं लगा पाते। प्रमुख लक्षणों में ये शामिल हैं:  

  • दवाओं के बाद भी लगातार बना रहने वाला तेज बुखार
  • शरीर में अत्यधिक कमजोरी और हर समय थकान महसूस होना
  • पेट में लिवर या तिल्ली (Spleen) का आकार बढ़ जाना
  • गर्दन या अन्य हिस्सों की लसीका ग्रंथियों (Lymph Nodes) में सूजन 
  • त्वचा पर लाल चकत्ते या रैशेज पड़ना
  • शरीर पर बिना किसी बड़ी चोट के नीले निशान (Bruises) बनना या खून बहना
  • खून की कमी (Anemia) की वजह से चेहरा और शरीर पीला दिखना
  • ब्लड टेस्ट में खून की कोशिकाओं (रक्त कणिकाओं) का तेजी से घटना
  • आँखों और त्वचा में पीलापन (पीलिया के लक्षण) आना
  • स्थिति गंभीर होने पर मानसिक भ्रम, बेहोशी या न्यूरोलॉजिकल दौरे पड़ना 

उपचार:

एचएलएच का उपचार मरीज की उम्र, बीमारी के स्टेज और उसके होने के मुख्य कारण पर निर्भर करता है। इसके उपचार प्रोटोकॉल में आमतौर पर निम्नलिखित पद्धतियों का मिश्रण अपनाया जाता है: 

  • कीमोथेरेपी: अत्यधिक सक्रिय हो चुकी खराब कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कैंसर रोधी दवाओं का उपयोग। 
  • इम्यूनोथेरेपी और स्टेरॉयड: शरीर की अनियंत्रित रोग प्रतिरोधक क्षमता को शांत करने और अंदरूनी सूजन को कम करने के लिए।
  • एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल दवाएं: यदि बीमारी किसी संक्रमण या वायरस की वजह से फैली है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए। 
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