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हिमालयी पैंगोलिन को मिली स्वतंत्र प्रजाति की मान्यता: चीनी पैंगोलिन से कैसे है अलग ?

प्रारंभिक परीक्षा

करेंट अफेयर्स पर्यावरण और पारिस्थितिकी, जैव विविधता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी

मुख्य परीक्षा

GS Paper III : पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव संरक्षण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में Communications Biology जर्नल में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में हिमालयी पैंगोलिन (Manis aurita) को चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla) से अलग एक स्वतंत्र जीवित (Extant) प्रजाति के रूप में पुनः मान्यता दी गई है। शोधकर्ताओं ने व्यापक जीनोमिक (Genomic) और आकृतिक (Morphological) विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले और गंभीर रूप से संकटग्रस्त स्तनधारियों में से एक के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

प्रमुख बिंदु

  • हिमालयी पैंगोलिन अब एक स्वतंत्र प्रजाति Manis aurita के रूप में मान्य।
  • पहले इसे चीनी पैंगोलिन Manis pentadactyla की उप-प्रजाति माना जाता था।
  • लगभग 18 लाख वर्ष पूर्व जलवायु परिवर्तन के कारण दोनों प्रजातियाँ अलग हुईं।
  • शोध Communications Biology जर्नल में प्रकाशित।
  • प्रमुख वितरण नेपाल, दक्षिण तिब्बत और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (विशेषकर असम) में।
  • अवैध वन्यजीव व्यापार और अंतःप्रजनन (Inbreeding) इसके प्रमुख खतरे हैं। 

क्या है पूरा मामला ?

  • कई दशकों तक हिमालयी पैंगोलिन को चीनी पैंगोलिन की एक उप-प्रजाति माना जाता था। 
  • वर्ष 1836 में नेपाल से प्राप्त मूल नमूने (Lectotype) के आधार पर इसका वर्गीकरण किया गया था, लेकिन इसकी वास्तविक टैक्सोनॉमिक (Taxonomic) स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
  • अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने मूल नमूने का डीएनए अनुक्रमण (DNA Sequencing) कर उसकी तुलना आधुनिक आनुवंशिक आंकड़ों और शरीर संरचना से की। अध्ययन में यह प्रमाणित हुआ कि हिमालयी पैंगोलिन एक अलग और स्वतंत्र प्रजाति है।

दोनों प्रजातियाँ कैसे अलग हुईं ?

  • शोध के अनुसार, लगभग 18 लाख वर्ष पहले (Early Pleistocene Epoch) वैश्विक जलवायु परिवर्तन के दौरान दोनों प्रजातियों के पूर्वज अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित हो गए।
  • पश्चिमी समूह हिमालयी क्षेत्र में विकसित होकर Manis aurita बना।
  • पूर्वी समूह चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया में विकसित होकर Manis pentadactyla बना।
  • इस प्रक्रिया को भौगोलिक पृथक्करण (Allopatric Speciation) कहा जाता है, जिसमें भौगोलिक बाधाएँ नई प्रजातियों के विकास का कारण बनती हैं।

जलवायु परिवर्तन की भूमिका

  • अध्ययन के अनुसार प्लाइस्टोसीन काल में अत्यधिक ठंड और शुष्क जलवायु के कारण हिमालयी क्षेत्र में आवास तेजी से सीमित होता गया।

इसके परिणामस्वरूप

  • हिमालयी पैंगोलिन की आबादी में भारी गिरावट आई।
  • इसके आवास अस्थिर हो गए।
  • आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) प्रभावित हुई।
  • वहीं दक्षिणी चीन के समुद्री प्रभाव वाले वन अपेक्षाकृत स्थिर रहे, जिससे चीनी पैंगोलिन की आबादी अधिक सुरक्षित बनी रही।

हिमालयी पैंगोलिन की प्रमुख विशेषताएँ

  • शोध में हिमालयी पैंगोलिन को चीनी पैंगोलिन से कई मामलों में अलग पाया गया।

मुख्य अंतर

विशेषता

हिमालयी पैंगोलिन

चीनी पैंगोलिन

वैज्ञानिक नाम

Manis aurita

Manis pentadactyla

औसत लंबाई

लगभग 95.2 सेमी

लगभग 71.2 सेमी

शरीर का आकार

बड़ा

छोटा

खोपड़ी

बड़ी एवं मजबूत

अपेक्षाकृत छोटी

कान

छोटे

अपेक्षाकृत बड़े

नासिका अस्थि

छोटी एवं चौड़ी

लंबी

  • इसके अतिरिक्त, दोनों प्रजातियों में गंध पहचान (Olfaction) से जुड़े कई जीनों में भी महत्वपूर्ण अंतर पाया गया।

भारत में वितरण

  • हिमालयी पैंगोलिन का प्राकृतिक वितरण सीमित है।
  • यह प्रजाति पाई जाती है -
    • नेपाल
    • दक्षिण तिब्बत
    • भारत के पूर्वोत्तर राज्य
    • विशेष रूप से असम
  • शोधकर्ताओं के अनुसार ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (Brahmaputra Drainage) तथा अराकान पर्वतमाला (Arakan Mountains) ने दोनों प्रजातियों को लाखों वर्षों तक अलग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रमुख खतरे

1. अवैध वन्यजीव व्यापार

  • हिमालयी पैंगोलिन विश्व में सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारियों में शामिल है।
  • इसके शल्क (Scales),मांस अन्य अंग का उपयोग अवैध वन्यजीव व्यापार तथा कुछ पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में किया जाता है।
  • अध्ययन में यह भी पाया गया कि इस प्रजाति से प्राप्त अवैध उत्पाद वैध आपूर्ति श्रृंखलाओं (Formal Supply Chains) के माध्यम से बाजार तक पहुँच रहे हैं।

2. अंतःप्रजनन (Inbreeding)

  • शोध में पाया गया कि समग्र रूप से हिमालयी पैंगोलिन में अंतःप्रजनन चीनी पैंगोलिन की तुलना में कम है।
  • लेकिन काठमांडू घाटी के आसपास की आबादी में अत्यधिक अंतःप्रजनन पाया गया है।
  • यह स्थिति भविष्य में आनुवंशिक कमजोरी (Inbreeding Depression) का कारण बन सकती है।

संरक्षण के लिए शोधकर्ताओं की सिफारिशें

  • वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि Manis aurita को CITES Appendix-I में स्वतंत्र प्रजाति के रूप में शामिल किया जाए।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए।
  • नई टैक्सोनॉमिक पहचान को वैश्विक संरक्षण नीतियों में शीघ्र शामिल किया जाए।
  • अवैध वन्यजीव तस्करी पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
  • आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक संरक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ।

पैंगोलिन के बारे में

वैज्ञानिक वर्गीकरण

  • संघ (Phylum) : Chordata
  • वर्ग (Class) : Mammalia
  • गण (Order) : Pholidota
  • कुल (Family) : Manidae
  • वंश (Genus) : Manis

प्रमुख विशेषताएँ

  • विश्व का एकमात्र पूर्णतः शल्कयुक्त (Scaled) स्तनधारी।
  • मुख्य भोजन चींटियाँ और दीमक।
  • अत्यधिक विकसित घ्राण शक्ति।
  • खतरा महसूस होने पर स्वयं को गेंद की तरह मोड़ लेता है।
  • निशाचर एवं एकाकी स्वभाव का जीव।

CITES Appendix-I क्या है?

  • वन्य जीव एवं वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन (CITES) के Appendix-I में वे प्रजातियाँ शामिल होती हैं जो विलुप्ति के अत्यधिक खतरे में होती हैं।
  • इन प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध होता है।

निष्कर्ष

हिमालयी पैंगोलिन को स्वतंत्र प्रजाति के रूप में मान्यता मिलना जैव-वर्गीकरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह अध्ययन दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन, भौगोलिक पृथक्करण और आनुवंशिक विकास ने इस प्रजाति के विकास में निर्णायक भूमिका निभाई। साथ ही, यह नई पहचान हिमालयी पैंगोलिन के लिए अधिक प्रभावी संरक्षण रणनीतियाँ बनाने, अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराती है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न 

प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहे हिमालयी पैंगोलिन (Manis aurita) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसे हाल ही में चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla) से अलग एक स्वतंत्र जीवित (Extant) प्रजाति के रूप में मान्यता दी गई है।

  2. यह विश्व का एकमात्र पूर्णतः शल्कयुक्त (Scaled) स्तनधारी है।

  3. शोध के अनुसार, हिमालयी और चीनी पैंगोलिन का विकास लगभग 18 लाख वर्ष पूर्व भौगोलिक पृथक्करण (Allopatric Speciation) के कारण अलग हुआ।

  उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2

  2. केवल 2 और 3

  3. केवल 1 और 3

  4. 1, 2 और 3

 मुख्य परीक्षा प्रश्न 

प्रश्न."हाल ही में हिमालयी पैंगोलिन (Manis aurita) को एक स्वतंत्र प्रजाति के रूप में मान्यता दी गई है। इस खोज के वैज्ञानिक आधार तथा वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में इसके महत्व का विश्लेषण कीजिए।"

FAQ: हिमालयी पैंगोलिन को स्वतंत्र प्रजाति का दर्जा

1. प्रश्न:हिमालयी पैंगोलिन चर्चा में क्यों है ?

उत्तर : हाल ही में Communications Biology जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में हिमालयी पैंगोलिन (Manis aurita) को चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla) से अलग एक स्वतंत्र जीवित (Extant) प्रजाति के रूप में मान्यता दी गई है।

2. प्रश्न: पहले हिमालयी पैंगोलिन को किस रूप में माना जाता था ?

उत्तर : पहले इसे चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla) की उप-प्रजाति (Subspecies) माना जाता था।

3. प्रश्न: वैज्ञानिकों ने इसे अलग प्रजाति क्यों माना ?

उत्तर : डीएनए अनुक्रमण (DNA Sequencing), जीनोमिक (Genomic) और आकृतिक (Morphological) विश्लेषण से यह सिद्ध हुआ कि हिमालयी पैंगोलिन की आनुवंशिक एवं शारीरिक विशेषताएँ चीनी पैंगोलिन से स्पष्ट रूप से भिन्न हैं।

4. प्रश्न: हिमालयी और चीनी पैंगोलिन कब अलग हुए ?

 उत्तर : लगभग 18 लाख वर्ष पहले, प्लाइस्टोसीन (Pleistocene) काल में जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक पृथक्करण (Allopatric Speciation) के कारण दोनों प्रजातियाँ अलग विकसित हुईं।

5. प्रश्न: Allopatric Speciation क्या है ?

उत्तर : जब भौगोलिक बाधाओं (जैसे पर्वत, नदियाँ या समुद्र) के कारण एक ही प्रजाति की आबादी अलग-अलग हो जाती है और समय के साथ नई प्रजातियों का विकास होता है, तो इसे Allopatric Speciation कहते हैं।

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