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जैव संसाधनों के संरक्षण की दिशा में पहल: नागोया प्रोटोकॉल पर पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट जारी

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने नागोया प्रोटोकॉल ऑन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) पर तैयार भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट से प्राप्त प्रमुख निष्कर्ष (Insights) जारी किए हैं।
  • यह रिपोर्ट भारत द्वारा 27 फरवरी 2026 को जैव विविधता अभिसमय (CBD) सचिवालय को प्रस्तुत की गई थी।
  • रिपोर्ट का उद्देश्य देश में जैव संसाधनों तक पहुंच (Access to Genetic Resources) और उनके उपयोग से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत एवं समान वितरण (Fair and Equitable Benefit Sharing) की स्थिति का आकलन करना है।

नागोया प्रोटोकॉल क्या है ?

  • नागोया प्रोटोकॉल जैव विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity-CBD) के अंतर्गत अपनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसे वर्ष 2010 में स्वीकार किया गया था, जबकि CBD को वैश्विक स्तर पर वर्ष 1992 में अपनाया गया था। 
  • इसका उद्देश्य जैव संसाधनों (Genetic Resources) तक पहुंच को विनियमित करना, उनके उपयोग से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत एवं समान वितरण सुनिश्चित करना तथा स्थानीय समुदायों एवं पारंपरिक ज्ञान धारकों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है। 
  • साथ ही यह जैव विविधता संरक्षण एवं जैव संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने पर भी बल देता है। 
  • भारत में इसका कार्यान्वयन जैव विविधता अधिनियम, 2002 तथा एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) विनियम, 2014 के माध्यम से किया जाता है।

रिपोर्ट की प्रमुख बिन्दु

देशभर में ABS अनुमोदनों में वृद्धि

  • रिपोर्ट के अनुसार 1 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2025 के बीच देश में एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) ढांचे के अंतर्गत कुल 12,830 अनुमोदन प्रदान किए गए। 
  • इनमें से 5,913 अनुमोदन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा जारी किए गए, जबकि 6,917 अनुमोदन राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) एवं केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों द्वारा प्रदान किए गए। यह देश में ABS तंत्र के बढ़ते क्रियान्वयन को दर्शाता है।

वैश्विक स्तर पर भारत का योगदान

  • भारत ने Access and Benefit Sharing Clearing-House के अंतर्गत 3,556 Internationally Recognised Certificates of Compliance (IRCC) प्रकाशित किए हैं। 
  • यह संख्या वैश्विक स्तर पर जारी कुल प्रमाणपत्रों का लगभग 60 प्रतिशत है। 
  • इससे स्पष्ट होता है कि जैव संसाधनों तक पहुंच एवं लाभ साझा करने की व्यवस्था के कार्यान्वयन में भारत अग्रणी देशों में शामिल है।

 लाभ साझा करने से आर्थिक उपलब्धि

  • ABS समझौतों के माध्यम से कुल ₹216.31 करोड़ की राशि प्राप्त हुई। 
  • इसमें से लगभग ₹139.69 करोड़ लाभार्थियों, स्थानीय समुदायों एवं हितधारकों को वितरित किए गए।
  • हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन समझौतों से संबंधित सूचनाओं एवं आंकड़ों के लिए अभी तक कोई समेकित सार्वजनिक डेटा रिपॉजिटरी (Public Data Repository) उपलब्ध नहीं है, जिससे सूचनाओं की पहुँच सीमित रहती है।

रिपोर्ट में शामिल प्रमुख केस स्टडी

  • रिपोर्ट में 12 सफल केस स्टडी शामिल की गई हैं, जो एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) तंत्र के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्थानीय समुदायों को हुए आर्थिक एवं सामाजिक लाभों को प्रदर्शित करती हैं।

मध्य प्रदेश: डेंगू उपचार हेतु औषधीय पौधे का उपयोग

  • वर्ष 2017 में Sun Pharmaceutical Industries द्वारा मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के वन क्षेत्रों से कोकुलस हिर्सुटस (Cocculus hirsutus) नामक औषधीय पौधे तक पहुंच प्राप्त की गई। कंपनी का मानना था कि इस पौधे में डेंगू के उपचार की संभावनाएं मौजूद हैं।
  • एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) व्यवस्था के अंतर्गत इस मामले में ₹4.5 लाख का अग्रिम भुगतान निर्धारित किया गया। कंपनी द्वारा शुल्क छूट (Waiver) का अनुरोध किया गया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद 24 जनवरी 2019 को समझौता संपन्न हुआ तथा कंपनी ने निर्धारित राशि का भुगतान किया।
  • ABS विनियमों के अनुसार प्राप्त राशि का 95 प्रतिशत (₹4,27,500) मध्य प्रदेश लघु वनोपज सहकारी संघ को हस्तांतरित किया गया। इस राशि का उपयोग जैव विविधता संरक्षण, संसाधन प्रबंधन एवं सामुदायिक विकास गतिविधियों के लिए किया गया, जबकि शेष राशि प्रशासनिक उद्देश्यों हेतु रखी गई।
  • यह उदाहरण दर्शाता है कि जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्रदान करने में ABS तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उत्तर प्रदेश: जैव-एथेनॉल अनुसंधान परियोजना

  • Indian Oil Corporation Limited द्वारा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के नराऊ गांव से प्राप्त कृषि अवशेषों का उपयोग जैव-एथेनॉल (Bioethanol) उत्पादन में सुधार संबंधी अनुसंधान के लिए किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि अपशिष्टों के बेहतर उपयोग के माध्यम से जैव ईंधन उत्पादन क्षमता को बढ़ाना था।
  • एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) व्यवस्था के अंतर्गत इस मामले में ₹18.60 लाख का अग्रिम भुगतान निर्धारित किया गया। प्राप्त राशि में से ₹17.67 लाख उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) को हस्तांतरित किए गए, जबकि शेष राशि प्रशासनिक व्यय के रूप में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) तथा राज्य जैव विविधता बोर्ड के पास रखी गई।
  • यह उदाहरण दर्शाता है कि जैव संसाधनों एवं कृषि अवशेषों के उपयोग से अनुसंधान, ऊर्जा उत्पादन और स्थानीय हितधारकों को लाभ सुनिश्चित किया जा सकता है।

महाराष्ट्र: मिट्टी के नमूनों से ग्रामीणों को लाभ

  • महाराष्ट्र के दापुर गांव के स्थानीय लोगों द्वारा मिट्टी के नमूने उपलब्ध कराए गए, जिनका उपयोग औद्योगिक महत्व वाले सूक्ष्मजीवों की पहचान तथा प्रोबायोटिक्स के व्यावसायीकरण (Commercialisation) के लिए किया गया।
  • इस मामले में Advanced Enzyme Technologies द्वारा लगभग ₹71.25 लाख की लाभ-साझेदारी (Benefit Sharing) राशि का भुगतान किया गया।
  • यह मामला ABS व्यवस्था की सफलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, क्योंकि इसमें स्थानीय समुदायों को उनके जैव संसाधनों एवं पारंपरिक योगदान के बदले प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। यह दर्शाता है कि जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय विकास एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

रिपोर्ट द्वारा चिन्हित प्रमुख चुनौतियाँ

रिपोर्ट ने ABS कार्यान्वयन में कुछ प्रमुख चुनौतियों की पहचान की है:

डिजिटल प्रणाली को मजबूत करना

  • बेहतर निगरानी प्रणाली
  • डेटा एकीकरण (Data Integration)

जैव संसाधनों का मूल्यांकन

  • जैव संसाधनों के आर्थिक मूल्यांकन हेतु उपयुक्त पद्धति विकसित करने की आवश्यकता

संस्थागत क्षमता निर्माण

  • राज्य एवं स्थानीय स्तर पर क्षमता विकास की जरूरत

जागरूकता एवं समन्वय

  • हितधारकों के बीच संस्थागत समन्वय बढ़ाना
  • ABS तंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाना

भारत में ABS तंत्र का महत्व

  • स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ
  • जैव विविधता संरक्षण को प्रोत्साहन
  • पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा
  • जैव संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा
  • अनुसंधान एवं नवाचार को समर्थन

निष्कर्ष

  • नागोया प्रोटोकॉल पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट देश में जैव संसाधनों के उपयोग, लाभ साझा करने और समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल की महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करती है।
  • रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भारत ने ABS तंत्र के माध्यम से न केवल वैश्विक स्तर पर नेतृत्व स्थापित किया है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। भविष्य में डिजिटल अवसंरचना, डेटा प्रबंधन और संस्थागत समन्वय को मजबूत कर इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
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