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केरल की वृद्ध होती जनसंख्या का संकट : वरिष्ठ नागरिकों के लिए भारत का पहला समर्पित विभाग

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में की केरल  नव निर्वाचित सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए एक समर्पित विभाग स्थापित करने की घोषणा की है। 
  • यह भारत का पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें बुजुर्गों के लिए अलग विभाग बनाया जा रहा है। वर्तमान में वृद्धजन कल्याण राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग के अंतर्गत आता है। 
  • यह निर्णय केरल की तेजी से वृद्ध होती जनसंख्या तथा जेरियाट्रिक (वृद्धजन) प्रशासन की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है।

केरल : भारत का सर्वाधिक तीव्र गति से वृद्ध हो रहा राज्य

  • केरल वर्तमान में जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) के उन्नत चरण से गुजर रहा है तथा इसकी जनसंख्या संरचना भारत के अन्य राज्यों की तुलना में पूर्वी एशियाई और यूरोपीय देशों से अधिक समानता रखती है।
  • वर्ष 2021 की ‘एल्डरली इन इंडिया रिपोर्ट’ के अनुसार राज्य की लगभग 16.5% जनसंख्या 60 वर्ष से अधिक आयु की है तथा वर्ष 2031 तक इसके बढ़कर लगभग 20.9% होने का अनुमान है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आँकड़ा 13.1% रहने का अनुमान है।
  • वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात (Old Age Dependency Ratio), अर्थात प्रति 100 कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या पर वृद्ध व्यक्तियों की संख्या, वर्ष 2011 में 19.6% से बढ़कर वर्ष 2021 में 26.1% हो गई है तथा वर्ष 2031 तक इसके 34.3% तक पहुँचने का अनुमान है। इसका अर्थ है कि अगले दशक में लगभग प्रत्येक तीन कार्यशील व्यक्तियों में से एक व्यक्ति किसी वृद्ध आश्रित का भार वहन करेगा।
  • इसके अतिरिक्त, केरल में वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों की संख्या वर्ष 2016–17 के 19,149 से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 37,895 हो गई है।

केरल में वृद्धावस्था तेजी से क्यों बढ़ रही है ?

1. प्रजनन दर में तीव्र गिरावट

  • केरल की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) घटकर केवल 1.35 रह गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) 2.1 से काफी कम है तथा भारत की राष्ट्रीय TFR 1.9 से भी नीचे है।
  • कम जन्म दर का अर्थ है कि जनसंख्या में युवाओं की संख्या कम हो रही है, जिससे वृद्ध आबादी का अनुपात तेजी से बढ़ रहा है।

2. जीवन प्रत्याशा में वृद्धि

  • बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और उन्नत जीवन स्तर के कारण केरल में जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 78.4 वर्ष तथा पुरुषों की लगभग 71.9 वर्ष है।
  • लंबी आयु के कारण वृद्ध जनसंख्या का आकार लगातार बढ़ रहा है।

3. कार्यशील आयु वर्ग का बड़े पैमाने पर प्रवासन

  • केरल से बड़ी संख्या में कार्यशील आयु वर्ग के लोग विदेशों में प्रवास कर चुके हैं। गैर-पश्चिम एशियाई देशों में जाने वाले अनेक लोग स्थायी रूप से वहीं बस जाते हैं तथा अपने वृद्ध माता-पिता को पीछे छोड़ देते हैं।
  • इसके परिणामस्वरूप राज्य में ऐसे परिवारों की संख्या बढ़ रही है जिनमें केवल वृद्ध सदस्य ही रह गए हैं।
  • साथ ही, पश्चिम एशियाई देशों से कार्यकाल समाप्त होने के बाद लौटने वाले प्रवासी भी वृद्ध आबादी में वृद्धि कर रहे हैं, जिससे राज्य पर दोहरा जनसांख्यिकीय दबाव उत्पन्न हो रहा है।

वृद्धावस्था के भौगोलिक और लैंगिक आयाम

  • भारत वृद्धावस्था रिपोर्ट 2023 के अनुसार केरल के ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 17.5% जनसंख्या 60 वर्ष से अधिक आयु की है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 15.4% है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्धों की अधिकता का मुख्य कारण रोजगार हेतु कार्यशील आयु वर्ग का शहरों और विदेशों की ओर पलायन है।

वृद्धावस्था का स्त्रीकरण (Feminisation of Ageing)

  • केरल में विशेषकर अधिक आयु वर्गों में वृद्ध महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है।
  • 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में लिंगानुपात लगभग 1,651 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष है।
  • महिलाओं की अधिक जीवन प्रत्याशा तथा विधवापन की स्थिति के कारण बड़ी संख्या में वृद्ध महिलाएँ अकेले जीवन व्यतीत कर रही हैं तथा उन्हें पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक सहयोग प्राप्त नहीं है।

केरल के वृद्धों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ

  • लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (LASI) के अनुसार केरल के 70% से अधिक वृद्ध कम से कम एक दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित हैं।
  • मुख्य रोगों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गठिया तथा हृदय संबंधी रोग शामिल हैं।
  • भारत वृद्धावस्था रिपोर्ट 2023 के अनुसार केरल के लगभग प्रत्येक चार वृद्धों में से एक व्यक्ति मनोवैज्ञानिक तनाव के लक्षण प्रदर्शित करता है।
  • केरल की डिमेंशिया पहल “स्मृतिपदम (Smruthipadham)” के अनुसार 65 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 4.86% लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं।
  • इस स्थिति से निपटने के लिए डिमेंशिया देखभाल सेवाओं, देखभालकर्ताओं के प्रशिक्षण, जनजागरूकता तथा प्रारंभिक निदान प्रणाली को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

केरल द्वारा प्रारंभ की गई प्रमुख पहलें

  • वर्ष 2025 में स्थापित राज्य वृद्ध आयोग वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा हेतु देश का पहला अर्द्ध-न्यायिक मंच है।
  • वायोमित्रम (Vayomithram) कार्यक्रम के माध्यम से वृद्ध नागरिकों को घर-घर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • समयप्रभा (Samayaprabha) वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित एक डे-केयर पहल है।
  • केरल केयर पैलिएटिव ग्रिड का गठन Digital University Kerala के सहयोग से किया गया है। इसमें लगभग 1,387 सरकारी संस्थान और 1,227 गैर-सरकारी संगठन शामिल हैं तथा वर्तमान में यह लगभग 1.5 लाख बिस्तरग्रस्त और 4 लाख अन्य रोगग्रस्त व्यक्तियों को सेवाएँ प्रदान कर रहा है।
  • इसके अतिरिक्त, राज्य की लगभग 75% वृद्ध आबादी कल्याण पेंशन योजनाओं के अंतर्गत आच्छादित है।

संसाधन एवं कार्यबल संबंधी चुनौतियाँ

  • वर्ष 2023 में केरल में लगभग 120 जेरियाट्रिशियन, 600 वृद्ध देखभाल प्रशिक्षित नर्सें, 400 फिजियोथेरेपिस्ट तथा केवल 50 ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट उपलब्ध थे।
  • हालाँकि, World Health Organization के बहु-विषयक देखभाल मॉडल के अनुसार वर्ष 2030 तक राज्य को लगभग 300 जेरियाट्रिशियन, 1,500 नर्सें, 900 फिजियोथेरेपिस्ट तथा 250 ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की आवश्यकता होगी।
  • इसलिए केरल को वृद्ध देखभाल अर्थव्यवस्था तथा स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार करना होगा।

भारत का बदलता जनसांख्यिकीय परिदृश्य

  • सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 हो गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से कम है।
  • भारत की जन्म दर 18.3 प्रति हजार, मृत्यु दर 6.4 प्रति हजार, जीवन प्रत्याशा लगभग 72 वर्ष तथा शिशु मृत्यु दर 24 प्रति हजार जीवित जन्म है।
  • इसके बावजूद भारत अभी भी जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) की स्थिति में है।
  • भारत की औसत आयु लगभग 29.2 वर्ष है तथा 15–29 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या लगभग 37–38 करोड़ है, जो कुल आबादी का लगभग 27% है। इसके अतिरिक्त देश की 65% से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है।

भविष्य की चुनौती : वृद्ध होता भारत

  • भारत अब जनसंख्या विस्फोट की चिंता से आगे बढ़कर वृद्ध होती आबादी और धीमी कार्यबल वृद्धि जैसी चुनौतियों की ओर बढ़ रहा है।
  • Japan, South Korea तथा अनेक यूरोपीय देशों ने इस प्रकार के संक्रमण का अनुभव किया है।
  • भारत को समय रहते वृद्ध स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, श्रम बाज़ार सुधार तथा देखभाल अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा।

निष्कर्ष

केरल द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए पृथक विभाग की स्थापना आयु-संवेदनशील शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केरल भारत की जनसांख्यिकीय प्रयोगशाला के रूप में उभर रहा है और यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दशकों में अन्य राज्यों को भी ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भारत को भविष्य के वृद्ध समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी नीतियों और संस्थागत व्यवस्थाओं को अभी से तैयार करना होगा।

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